समीक्षार्थ
दिनांक:-26/11/19
विषय :-नदी का संरक्षण
विधा :-कुण्डलिनी
नदियाँ गन्दी हो रही,हम है जिम्मेदार।
खुद ही में जब दोष है,करते क्या सरकार।।
करते क्या सरकार,नदी है अब आफत में।
रक्षण की है बात,योजना की लागत में।
कह तोषन कविराज, भूलकर अपनी कमियाँ।
सरिता माता मान,सभी सिरजाओ नदियाँ।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
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