शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

अंडा


अंडा

अंडा सोया मिल रहा,बच्चे नाचे झूम।
सरकारी आदेश है,मचा रही है धूम।।
मचा रही है धूम,आस्तिक मन कतरावे।
कहाँ फँसे है आन,जरा भी रास न आवे।।
कह तोषन कविराज,फाँस ये कैसा फंडा।
आधे मन को मार,आध है खाये अंडा।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

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