शिक्षक
शिक्षक
बनकर शिक्षक आज जो , बाँट रहे है ज्ञान।
महिमा इनकी है बड़ी , गाते सन्त सुजान ।।
गाते सन्त सुजान , दोष सब दूर हटाते ।
गुरुवर है भगवान , ब्रह्म भी शिव भी गाते ।।
कह तोषन कविराज , वृक्ष है सीधा तनकर ।
धन्य धन्य यह प्राण ,खड़े है शिक्षक बनकर।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें