रविवार, 20 नवंबर 2016

हजार पांच सो के नोट

हजार पांच सो के नोट धरे
खडे रहेव जी बीच बजार
आके कहिथे एक झन टुरा
देबे का चिल्हर हजार

में केहेंव रे बाबू सून
रहितिस मोर कर कोई चिल्हर
माछी बिदारत नंइ बइठे रहितेंव
ठेला म ओध के पिल्हर

टुरा सियाना मोला कहिथे
चिल्हर दे देंहूँ तोला
एक हजार म दू सो बटटा
काट के दे बे तै मोला

कांट के बट्टा आठ सो मिल जाही
लैन लगे नंइ परही
कोन सो मार मोर पइसा हे
पाए रेहेंव जी कल ही

धरीस हजार के नोट ल टुरा
पल्ला छाड़ भगाईस
चुरमुरा रहिगेंव मेहा संगी
आठ सो घलक नंइ आईस

मोर संन होईस जइसन तइसन
तुम झन करहू जी दाऊ
अपन पइसा भंजाए बर सोझे
अपन बैंक के रद्दा जाहू
©®
आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा

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