रविवार, 20 नवंबर 2016

ये सिला दिया

बदलते जमाने में लोगों को बदलते देखा है
हँसते को रोते और रोते को हँसते देखा है।।

 हमने तो थोड़ा टेस्ट बदला जमाने को परखने के लिए
जमाना है कि हमें ही गलत साबित करने पर तुला हुआ है।


क्या सपने थे मेरे
लेकिन तूमने सबकी वाट लगा दी
जितना मैंने तुमको पूजा था
उसकी तूमनी खाट लगा दी
क्या कमी रह गयी थी मेरे प्यार में
जो तूमने मूझे ऐसी सजा दी
कि मै न घर का रहा
न घाट का
लोग आज मुझ पर थू थू कर रहे है
पगली तेरे लिए
मैने क्या कुछ नहीं
किया कभी छडिया चुराए
कभी ईनटीना उडाए
और तुमने मुझ ये सिला दिया

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