रविवार, 20 नवंबर 2016

क्षमता

मुझमें नहीं कोई क्षमता
न ही हूँ मैं खासम खास
आता नहीं काम किसी का
हर पल रहता मन उदास

देखता अक्स आईने में
खूद से नजर चुराता हूँ
तन्हाई डसती है मुझको
रो-रोकर चिल्लाता हूँ

हूँ बेरोजगार काम नहीं
बोझ हो गया खुद के लिए
रोटी नहीं मिलती अब तो
जी मिचलाती भूख के लिए

कोसता हूँ अपने आप को
क्यों मैंने है जनम लिया
माँ बाप के लिए कुछ कर न सका
भारत माँ को भी कुछ न दिया

मन में अब ये ठान लिया
कुछ तो कर दिखलाऊँगा
भारत माँ की सेवा करते
जीवन से मुक्ति पाऊँगा

मरने पर मुझे कुछ न देना
देना भारत की माटी को
तब पडेगी ठंडक मेरी
ज्वाला भरी इस छाती को
©®
आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

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