मत बन खुद का बैरी दुश्मन
दुसरे को क्यों तडपाता है
बनकर तू खुद का घर भेदी
अपनी लंका ढहाता है
मिलकर रहना जग में सबसे
है दुनिया की रीत यहीं
मिलेगा न ऐसा जहाँ कोई दूजा
मरकर जीना हमको यहीं
इस मिट्टी का तिलक करो तुम
क्यों दूर दूर यूँ जाता है
मत बन खुद का बैरी दुश्मन
दुसरे को क्यों तडपाता है
बनकर तू खुद का घर भेदी
अपनी लंका ढहाता है
जीतकर लंका छोड़ दी हमने
रखकर अपने मित्र का मान
दिया सम्मान जो हमने उनको
मिलता रहा सदा सम्मान
कहा राम ने सुन भाई लक्ष्मण
प्यारी भारत माता है
मत बन खुद का बैरी दुश्मन
दुसरे को क्यों तडपाता है
बनकर तू खुद का घर भेदी
अपनी लंका ढहाता है
द्वार द्वार पर अब भी खड़े है
छुपकर जयचंद की खाल में
ना आना इनकी बातों में
देखकर नोंट टकसाल में
कभी जीवन में सुख नहीं मिलता
जो भाई भाई को लडाता है
मत बन खुद का बैरी दुश्मन
दुसरे को क्यों तडपाता है
बनकर तू खुद का घर भेदी
अपनी लंका ढहाता है
©®
आचार्य तोषण
है दुनिया की रीत यहीं
मिलेगा न ऐसा जहाँ कोई दूजा
मरकर जीना हमको यहीं
इस मिट्टी का तिलक करो तुम
क्यों दूर दूर यूँ जाता है
मत बन खुद का बैरी दुश्मन
दुसरे को क्यों तडपाता है
बनकर तू खुद का घर भेदी
अपनी लंका ढहाता है
जीतकर लंका छोड़ दी हमने
रखकर अपने मित्र का मान
दिया सम्मान जो हमने उनको
मिलता रहा सदा सम्मान
कहा राम ने सुन भाई लक्ष्मण
प्यारी भारत माता है
मत बन खुद का बैरी दुश्मन
दुसरे को क्यों तडपाता है
बनकर तू खुद का घर भेदी
अपनी लंका ढहाता है
द्वार द्वार पर अब भी खड़े है
छुपकर जयचंद की खाल में
ना आना इनकी बातों में
देखकर नोंट टकसाल में
कभी जीवन में सुख नहीं मिलता
जो भाई भाई को लडाता है
मत बन खुद का बैरी दुश्मन
दुसरे को क्यों तडपाता है
बनकर तू खुद का घर भेदी
अपनी लंका ढहाता है
©®
आचार्य तोषण

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