रविवार, 20 नवंबर 2016

मनके अंधियारा मेटव"

"मनके अंधियारा मेटव"

आतंकवाद के चक्का म मोर भारत ल झन रेतव
सुमता के दीया जलाइके मन के अंधियारा मेटव

जइसे मिलके चंदा सूरज उइथे दिन अउ रात
संग दूनो झन मिलके देखव करथे मया बरसात
बनके गगन अपन कोरा म जम्मो चंदैनी समेटव
सुमता के दीया जलाइके मन के अंधियारा मेटव

करिस हिरनाक्ष अत्याचार प्रान ल अपन गंवाए
बैरी बनके हिरण्यकशिपु ह हरि ले बच नंइ पाए
प्रहलाद ल होलिका जइसन आगी म झन लपेटव
सुमता के दीया जलाइके मन के अंधियारा मेटव

झन बन कखरो बैरी दुसमन बने रहव मीत मितान
आदर देथे आदर पाथे जग में मनखे विही महान
देवारी के दीया बरोबर जुगजुगले अंजोर बिखेरव
सुमता के दीया जलाइके मन के अंधियारा मेटव

अंधियारा आतंकवाद के कोन जनी कब दूर भगाही
मोर सोनचिरइय्या भारत म नवा अंजोर हर कब आही
जूरमिल आतंकवाद ल कोस दूरिहा लेज ढकेलव
सुमता के दीया जलाइके मन के अंधियारा मेटव
©®
आचार्य तोषण धनगांव डौंडीलोहारा बालोद
छत्तीसगढ़ ४९१७७१

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