रविवार, 20 नवंबर 2016

हावस

हावस काबर गुस्साए ,कुछु कहीं तो बोल
लगथे डर मोला गजब, भेद जिया के खोल
भेद जिया के खोल,नयना हवे कजरारी
जियरा बजथे ढोल,कुके कोयलिया कारी
झन र गोरी उदास,करे फिकर चोला मोर
रहिबे दिल के पास, मया मिलै मोला तोर
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आचार्य तोषण
९६१७५८९६६७
१४/११/१६

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