रविवार, 20 नवंबर 2016

हमर मन के गोठ


हमर बने हे अघवा जतका गोठ करथे बड मीठ-मीठ
पेराय खूसियार बरोबर हम हो जाथन सीठ-सीठ
काम करथन हम्मन घंस घंस मंजा कस कस के उड़ाथे
उरक जथे कंहूँ पइसा थोरको हमी ल दोसी ठहराथे
जाथन तिंहा तो कामे करथन घर के काम तियार देथे
कभू खेत डोली कभू सिलेंडर टंकी धरा के बइठार देथे
दस बज्जी जाथन कमाए बर टेम ले कुटेम कमाथन
आथन घर में थके मांदे गोसईनीन ले अउ गारी खाथन
हमर काम ल सेवा हे कहिथे तभो मिलत नंइहे फल
दु आना कि चार आना बढाही मिल जतीस आज कल
काडी मिठई ह बनगे हावे लइका सही भुरियारथ हे
चार महीना बीतत हावे मदारी कस नांच नंचावत हे
जेझन के मुडी म पागा हे सब अपन-अपन में मस्त हे
अइसन मस्तीजाद के मारे हालत हमर इहाँ खस्त हे
देख इंहा के रांगा चागा मुंह ले बिलई के नंइ निकले मिऊ
असने करम देख कथे सियान लल्लड जांता के लल्लड पऊ
©®
आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा

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