रविवार, 20 नवंबर 2016

तुलसी के...


तुलसी के कहिनी बड़े , तुलसी बन के घास ।
राम-राम तुलसी जपय ,बन गे तुलसी दास ।।
बन गे तुलसी दास , सुने रत्ना के बानी ,
तरे भव डगर पार , रमायन लिखे कहानी ।
सुन 'तोषण'के बात ,तनय दुलरू हुलसी के ,
अमर करे जग नाम ,गजब महिमा तुलसी के ॥

©®
आचार्य तोषण ९६१७५८९६६७

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...