गीत मिलन की छेड़ दे हिया के पट खोल
सावन की पुरवाई बाँधे तुझ संग प्रीत की डोर
आजा बसंत बहार में ले कोयल की बोल....
मिल जाए एक झलक देखूँ तुझे जो भोर
मेरे हिय के प्रेम को प्रेम तुला से अब तोल....
'धनगंइहा'
मुखिया अपने गाँव में,
आन बसे है तीन।
अपनी ही बस हाँकते,
लाख बजा लो बीन।
कारज कितना भी भला,
सही मिले ना दाम।
रखते ऐसी चाहतें,
अच्छा हो परिणाम।।
खाना ही दोगे नही,
कैसे लोगे काम।
समझो ना अब तुम यहाँ,
अपने को गुलफ़ाम।।
राजा अपने दास को,
समझे कोल्हू बैल।
तन मन धन शोषण करे,
पेर निकाले तैल।।
आने का है भान सब,
जाने का ना लेख।
अपना भी परिवार है,
घर पर जाकर देख।।
मीठा मीठा बोलके,
मन को लेते फाँस।
रखलें अपनी बात तो,
टाल देत है हाँस।
अपनी टोली में सभी,
रखते मुँह को बंद।
सुनके ही रह जात हैं,
करके नाड़ी मंद।।
खून पसीने सींचते,
देते विद्या दान।
समझें इनकी भावना,
दें नव वेतन मान।।
पेट अगर होगा भरा,
मुख से निकले वाह।
लात पड़े जो पेट में,
निकले दिल से आह।।
धन तो है मिलता नहीं,
मिलता केवल मान।
भूखा रहके हम मरें,
नहीं किसी को भान।।
लक्ष्य गर मिलता नहीं,
बदलें अपनी राह।
पा जाओगे साथियों,
जो है मन में चाह।
**************
मोर घर के खधर छानी
टिपिर टापर चुहे पानी
चिमनी मा अंजोर नंइहे
चातर गली खोर नंइहे
नरवा ढोरगा डबडबागे
खेती खार लबलबागे
हरेली के भावय तिहार
दसमूर हे घर घर दुवार
तुलसी के अमर कहानी
गावय गुनी मुनी ग्यानी
जुगुर जुगुर जोगनी बरे
रतिहा सावन कोन धरे
पुरवइय्या सरर सरर
घरजे बादर घरर घरर
भाई बहिनी के राखी
हावय बंधना के पाखी
मिलके झंडा फहिराबो
अजादी के गीत गाबो
नाचे रे मोर मन मंजूर
सुनले तैहा कन कजूर
माँत्रिक के छू छू मंतर
धरले तै जी जी अंतर
जय युवा जय किसान
होही तोषन नवा बिहान
**************
तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा
कज्जल छंद
बेटी हावय मोर आन।
बेटी हावय मोर शान।
पढ़ही तनुजा बढ़े मान।
सगरो दुनिया करे गान।
ये सबके बनाथे काज।
रखथे बेटी मोर लाज।
बनके तैहा शेर आज।
बैरी बर तै गिरा गाज।
चंदा जइसे तोर रूप।
सहिके तैहा छाँव धूप।
बाधा करथस ढेर लूप।
पूजय तोला सूरज भूप।
मिलही तोला दुआ ढेर।
होवय देर भले सवेर।
कोनों तोला दे नटेर।
आँखी देबे तै तरेर।
तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा
चलो संगी जाबो सब
भोले के द्वार हो
चरण मा मिलथे जेखर
सारा संसार हो
सगरो चराचर के
जीव ल बचाये
पान करे घोर हलाहल
नीलकंठ कहाये
मिल जुल देवता करे
जय जयकार हो...
अंग भभूति चुपरे
पहिरे बघवा छाल तै
कालों के काल भोले
जय महाकाल तै
शरन मा तोर आएँव
दे दे दुलार हो....
रीषि मुनि देवता धामी
रात दिन तोला ध्यावे
पूरा करे कामना तै
आशीष तोर पावे
नंइया हे मझधार मोरो
करदे तही पार हो....
तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा
"भइय्या बर बहिनी के राखी ह छुटगे
दाई ददा के डेहरी ले दीया ह बुझगे।
मोर भारत माता के अचरा खातिर
मंगल भगत खुदी फांसी म झुलगे।।"
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चलव संगी चलव जवान, देश के गुन ल गाबो
मोर सोन चिरइय्या भारत के, चरन म मांथ नवाबो
●
आजादी के खातिर कतको,अमर जवान बलिदान होईंन
बहिनी अपन भाई ल खोए,महतारी बेटा बर रोईन
याद करन ऊँखर कुरबानी,अश्रु के धार बोहाबो
सोन चिरइय्या भारत के चरन म मांथ नवाबो
●
भारत माता के आन खातिर, छाती म झेलिन हे गोली
सदा बढ़िन आघू मग म, नित खेलिन खून के होली
अइसन शहीद के सुरता म, दीया अखंड जलाबो
सोन चिरइय्या भारत के चरन म मांथ नवाबो
●
सबझन मिलके रहिबो संगी, एक सूँत मा बंधाके
चलबो कदम ले कदम मिलाके, मया पीरीत ल बसाके
आज खुसी ले झूमव नांचव, आजादी जसन मनाबो
सोन चिरइय्या भारत के चरन म मांथ नवाबो
●
आज पन्दरा अगस्त के दिन, देस अजादी पाईस हे
ये दिन ल हम कइसे भुलाबो, तिरंगा लहराईस हे
आवव सबझन एक जुरिया के, आजाद गीत ल गाबो
सोन चिरइय्या भारत के चरन म मांथ नवाबो
●
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
तोषन धनगंइहा
डौंडीलोहारा बालोद छत्तीसगढ़
सोने की नही है बारी
करो कूच की तैयारी
थर्र खाये सारे बैरी
जाने ये दुनिया सारी
रण के बाकुरों जागो
मेरे दुलारों जागो.....
बैरी दुवारे आये.....
ऊबाल भरो रग-रग में
बधायें कई है मग मे
फौलाद जिगर तुम रखलो
दंभ भरो पग-पग में
माई के लालों जागों
वीरों हुंकारों जागो....
बैरी दुवारे......
भारत की आन बचानें
बन जा तू शेर दिवानें
अरियों के छक्के छूटे
भीड़ जा बनकर परवाने
तिरंगा थामे जागो
जयहिंद सब गालो जागो...
बैरी दुवारे....
तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद
शिशु गीत
दीदी आई जी दीदी आई।
एक बड़ी सी पुड़िया लाई।
हमने जो देखा जब ये खोल,
एक सोने की गुढ़िया पाई।
श्याम सलोनी गुड़िया प्यारी।
लगती सबको न्यारी न्यारी।
संग घूमती है संग दौड़ती,
तितली जैसे क्यारी क्यारी।
कभी न रोती हँसती हरदम।
बिन पायल के नाचे छमछम।
जब शिव जी का डमरू बाजे,
बोले मुख से बम बम बम।
गुड़िया मेरे साथ है रहती।
मीठी मीठी बातें हैं कहती।
ऊपर देखो नीलगगन में,
खिल के चाँदनी वो है हँसती।
कभी नही तुम हमें रुलाना।
कभी नही तुम हमें सताना।
दूर मुझसे तुम जाना नहीं,
दौड़ के मेरे पास में आना।
॥हर हर महादेव॥
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(१)
भूत भामन भोला गंगाधर,माथे म चंदा ताज।
भीख मांगतहन तोरे तीर,दरस दिखादे आज।।
(२)
आवय सावन चले कंवरिया, हर हर के जयकार।
मुड़ी ले निकले गंगा धारा , सरपन पहिरे हार।।
(३)
सुरहिन गइय्या के दुध लाके,भोला तोला मनाय।
धथुरा फूल फर बेल पाना,सुघ्घर तोला चढाय।।
(४)
पावन परब तोर सावन मा, सबझन ह सकलाय।
ओमकारा नमो शिवा जपय,बमबम धुनी लगाय।।
(५)
राम नाम महादेवा जपय,शिवा जपय प्रभु राम।
राम उमापति दुनो जपय तब,बनथे बिगड़े काम।।
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तोर बिना तोर बिना
दिल नंइ लागय
मोर दिल नंइ लागय
तिही मोरे हस जिंनगी
तिही मोर हस हर खुशी
तिही मोर हस बंदगी
कइसे कहँव
कहाँ जावँव
कइसे करँव सजदा
तोरे बिन......
1.तोरे कसम तोरे कसम जाने जाना
तोरे बर तोरे बर मँय दिवाना
कइसे जीअँव कइसे जीअँव बताना
मरना घलो मोला नंइ आय
तिही मोरे हस जिंनगी
तिही मोर हस हर खुशी
तिही मोर हस बंदगी
तोरे बिन....
जोही मोरे जोही मोरे सोना सोना
रब्बा मोरे रब्बा मोरे हस सलोना
तोरे बिना अउ कोनों नंइ होना
सुरता तोरे कतना सताय
तिही मोरे हस जिंनगी
तिही मोर हस हर खुशी
तिही मोर हस बंदगी
कइसे कहँव
कहाँ जावँव
कइसे करँव सजदा
तोरे बिन......
तोला देखे ले..जान...मोर जान आगे
तोला देखे ले..जान...मोर जान आगे
मन के मंदिर में जइसे भगवान आगे
मोला लागे अइसे सगरो जहान आगे
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मन तो होथे तोला मँय निहारत रहँव
लेके बँइहा..मा तोला...झुलावत रहँव
तोर बिना...कहीं...चैन आ..वय नहीं
सुरता मा कहीं...मोला....भावय नहीं
रही-रही के तोरेच..तीर धियान लागे
मन के मंदिर में जइसे...भगवान आगे
मोला लागे अइसे..सगरो जहान आगे
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रोज सपना मा आके सताथस काबर
राति आवै न निंदिया जगाथस काबर
कलगी पागा...के तोर मन मोर मोहे ना
आज मन के मिलौना रद्दा तोर जोहे ना
उड़ँव बनके...मँय भँवरा अरमान जागे
मन के मंदिर में जइसे.....भगवान आगे
मोला लागे अइसे....सगरो जहान आगे
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पिता जैसा क्षमता है, भाई माँ की ममता है।
खुशियाँ जहान की ये,भाई से ही पाई है।
बने कभी हाथी घोड़े,भूलकर दुख सारे,
लिए मुस्कान अपने,गम को छिपाई है।
सारी सुविधाएँ दिए,बहनों पे वार भाई
खाए तूने रुखी सूखी,खीर को खिलाई है।
कृष्ण जैसा रक्षा करे,द्रौपती के चीर भरे,
आँचल को चीरकर,राखी जो बंधाई है।
भैय्या मेरी लाज रखो,जिंदगी आबाद रखो,
आपने कलाई में जो,राखी ये बंधायी है।
लाख आएँ तूफाँ कोई,या कोई बहने रोई,
मुश्किलों में आके भाई,जान जो बचायी है।
दिल को दुखाना नहीं, हमें यूँ रूलाना नहीं,
मुखड़े को देख देख, फूले न समाई है।
जग में है न्यारा भाई,सबसे है प्यारा भाई,
तारा माँ की आँखो का है,दुलारा ये भाई है।
तोषण कुमार चुरेन्द्र"धनगंइहा"
डौंडी लोहारा बालोद
छ.ग. ९६१७५८९६६७
मनुज आचरण बने रखव,मीठा रखव जुबान।
क्षमाशील गुनवान बनव,रहव दया के खान।।
मुढ़ अनपढ़ बर शास्त्र के,रथे भला का दाम।
थस अंधरा बर दरपन के,रहय नहीं कुछु काम।।
अभिमानी अपन आप में,भरत रथे हूँकार।
अइसन मनखे दुनिया में,पावे ना सत्कार।।
सब झन मिलके बने रहव,चलत रहव सब साथ।
दिन दरिद के सेवा करव,कृपा करे रघुनाथ।।
कारज मन मा राखे ले,कभु पूरा नइ होय।
मुख भीतर नइ जाय हिरन,लगे शेर जब सोय।।
तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद
सुम्मत ले गाड़ी चलय,बनथे बिगड़े काज।
अइसे भारत देश मा,अवधपुरी हे राज।।
राजा दशरथ के महल,रानी रहिथे तीन।
देवइया पानी घलो,बेटा नइहे एक झीन।।
बेटा बनके राम हा,राजमहल मा आय।
अवधपुरी नाचे लगे,भर भर मन हरसाय।।
कैकैयी रानी सुने,राम राज के बात।
सुधबुध सबला त्याग के,खाय नही ओ भात।
बनही राजा अब भरत,राम जही बनवास।
बात मोर तै मान ले,तभ्भे आही रास।
राम सिया भाई लखन,जावय गंगा पार।
अड़हा केंवट हा घलो,तार डरे परिवार।।
पंचवटी बनगे कुटी,सुख्खा डारा पान।
हर लेगे माता जानकी,रावन जे शैतान।।
खोजत सीता राम हा,जटायु दिये उबार।
जूठा बोइर बाँटके,शबरी होगे पार।।
रघुवर अउ सुगरीव जी,सुग्घर बधे मितान।
सुखदुख सब ला जान के,किरपा दे भगवान।
मातु सिया के खोज बर,चंगा हे हनुमान।
बाधा जम्मो भाग गे,लगे राम के ध्यान।।
साधु कुटिया देखके,गये विभीषण तीर।
गोठ बात मा जान गे,मातु सिया के पीर।।
वाटिका पहुँचे तभे,मिले सिया के शोर।
राम बसा के ध्यान मा,भुँजे गली सब खोर।
पाए सिया के शोर जब,पहुँचे लंका धाम।
रावन के परिवार के,करदिस काम तमाम।।
सिया राम भाई लखन,आय अवधपुर धाम।
बरगे दीया चौमुड़ा,राम सिया के नाम।।
तोषन के हे लेखनी,लिखे रमायन सार ।
माँगत हावँव दव क्षमा,गलती देहु जी टार।
तोषन धनगंइहा
झन कर गरब गुमान झन कर गरब गुमान रे
भैय्या मोर जायेला परही शमशान
पाँच रतन के बने तोर काया
जेकर नँइहे ठिकाना।
चारेच दिन हरिहर पाना
पाछू परेहे अइलाना
समय रहत पहिचान
समय रहत पहिचान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान
कौड़ी कौड़ी जोड़े खोंधरा बनाए
एक दिन छोड़ के जाना
साथी संगी सब रही जाही
जग के हे रीत पुराना
सुनले सिरतो ईमान
सुनले सिरतो ईमान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान
माटी माटी के काया बने हे
माटी मा मिल जाही
धरम करम के करले कमाई
पुरखा हा तर जाही
झन तै बिरथा जान
झन तै बिरथा जान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान
तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौ.लोहारा
बालोद छ.ग.
धरती दाई तोर मैं,
माथ नवावँव आज।
तोर दया परताप ले,
बाँचय मोरो लाज।।१।।
मोर गाँव धनगाँव के,
कतका करिहँव गोठ।
अगुवा भंडारी हवय,
गुरतुर बोली पोठ।।२।।
बीच गली हनुमान के,
अड़बड़ शोभा पाय।
कतको संकट हे रहय,
चुटकी मा सिरजाय।।३।।
शीतल रुप हे शीतला,
शीतलता पहुँचाय।
पाके छँइहा मातु के,
सब झन हे हरसाय।।४।।
बिकटराव बाबा हमर,
देवता बड़का जान।
नर नारी सब देत हे,
दुनिया भरके मान।।५।।
शिव शंकर के ठाँव हे,
गाँव नहर के तीर।
करके पूजा पाठ सब,
अपन मिटावय पीर।।६।।
देवता हावय साँहड़ा,
गजब बढ़ावय मान।
जेकर किरपा ले सुनव,
गोधन बढ़थे जान।।७।।
करथे रक्षा गाँव के,
देवता कथे सियार।
कोनो अलहन नइ रहय,
सुख पुरवक संसार।।८।।
आ जाबे बुधवार के,
रहिथे गाँव बजार।
किसम किसम के तै बिसा,
हरिहर हे तरकार।।९।।
पहिली ले हे आठवीं,
हावय जी इसकूल।
जाके सब लइका पढ़े,
करय नहीं जी भूल।।१०।।
मातर मड़ई मा घलो,
रहिथे जी बड़ धूम।
खाके बीड़ा पान तै,
जोर लगा के घूम।।११।।
रहिथन संगी साथ मा,
सबके आथन काम।
सुम्मत ले गाड़ी चले,
बगरे जग मे नाम।।१२।।
तोषन कहिथे हे सखा,
राखव मीठ जबान।
होही हमरो गाँव हा,
जग में कभू महान।।१३।।
तोषन धनगंइहा
सावन है मन मोहना,
बरसे मेघ फुहार।
वन में नाचे मोरनी,
देखो पंख पसार।।
शिव शंकर के धाम को,
चलते भक्त हजार।
हँसते गाते झूमते,
करते जय जय कार।।
हरा भरा खलिहान अब,
दिखते चारो ओर।
झूमते गाते पेड़ हैं,
नदिया करते शोर।
आते बादल देख के,
होते मगन किसान।
धरती बदले काँचली,
हरित दिखे है धान।।
तोषन धनगंइहा
का:-डोंगरी के तीर मा आबे
करमा के धून ला गाबे
माँदर बजाहूँ करमा ताल मा
करमा नँचाहूँ एसो साल मा
की:-हाय रे मोर छैला बाबू
करे तै दिल ला काबू
माँदर बजादे करमा ताल मा
करमा नँचादे एसो साल मा
का:-आमा के रूखवा
कोयली हा छेड़े तान
देखँव रे तोला
मैं साँझ अउ बिहान
मोर आँखी के काजर
घूमें रे मनवा बादर
माँदर बजाहूँ करमा ताल मा
करमा नँचाहूँ एसो साल मा
की:-भादो के महिना
फूले ला साँवा गा
पातर कनिहा मा
ढिले ला दाँवा गा
सुरता हा तोर आथे
रतिहा मोला जगाथे
माँदर बजादे करमा ताल मा
करमा नँचादे एसो साल मा
का:-चले पुरवइय्या
सावन महिना
बान चलाये
दुनो ये नँयना
देखे बर तोला रे
तरसथे चोला रे
माँदर बजाहूँ करमा ताल मा
करमा नँचाहूँ एसो साल मा
की:-चंदा अँजोरी के
निरमल रात
करबे अगोरा
हे दू दिन के बात
लागे हे पीरीत रे
मोर मन मीत रे
माँदर बजादे करमा ताल मा
करमा नँचादे एसो साल मा
©®
तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद
आचार्य जी....
कितना सम्मानजनक शब्द है,किंतु शब्दार्थ अथाह ।जिसे समझ पाना हर किसी के लिए संभव नही है। जिन्हे इनकी समझ है वह स्वयं ब्रह्म से कम नही है। कोई भी व्यक्ति आचार्य तभी हो सकता है जब वह सही और गलत का अंतर स्पष्ट करते हुए भैय्या बहनों के अंतकरण में अपनी अमिट छाप छोड़ सके। जो अपने कर्मो के द्वारा अपने पूर्वजों ,महापुरूषों से प्रेरणा पाकर अपने अनुशरणकर्ताओं का पथप्रदर्शक बनकर संबल व प्रोत्साहित करे। आचार्य को मन ,शरीर,बुद्धि ,नैतिक व आध्यत्म दृष्टि से परिपक्व होने की आवाश्यकता है जो राष्ट्र के निर्माण में सहयोगी बन सके।जिस प्रकार कुम्हार मिट्टी से घड़ा बनाने के लिए अनेक कठिनाईयों का सामना करते हुए उसका निर्माण करता है ठीक वैसे ही आचार्य भी अपने भैय्या बहनों के सर्वागिण विकास के लिए विभिन्न प्रकार के प्रयोग नवाचार आदि प्रतिपादित करता है। श्री रामचरित्र मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसी दास जी ने अपनी धर्मपत्नी से प्रेरित होकर महान ग्रंथ की रचना की।जो आज हम सबके लिए प्रेरणादायी है।अगर हम अपने आने वाली पीढ़ी, समाज, राष्ट्र और विश्व व भैय्या बहनों का कल्याण करना चाहते हैं प्रेरणा बनना चाहते हैं तो हमें अपने दुर्गुणो का त्यागकर एक अच्छे आचरण करने वाला आचार्य बनना होगा।
नाम: तोषण कुमार चुरेन्द्र
साहित्यिक उपनाम: तोषन धनगंइहा
मोबाइल नं: ९६१७५८९६६७
ईमेल: yoyokumartoshan@gmail.com
पता: ग्राम धनगाँव, पोष्ट ,थाना व तहसील -डौंडी लोहारा, जिला - बालोद (छ.ग.)
पिन ४९१७७१
मुख्यालय: सरस्वती शिशु मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय डौंडी लोहारा
सूरज बाँटे रौशनी, खुद ही जल कर रोज।
देता प्रतिपल चेतना, करता प्रतिदिन खोज॥
करलें रक्षा हम सभी, बनकर माली आज।
महकेंगी बेटी तभी, करेंगी जग में राज॥
मत समझो लाचार अब, बेटी तनुज समान।
भरती अब हुंकार है, लेकर हाथ कमान॥
कच्ची मिट्टी सा अभी, दिजे मुझे आकार।
भल मानुष मैं बन सकूँ, बचे न शेष विकार॥
महिना सावन में सखी, मयूर प्यासा रोय।
हरले धरणी पीर को, दे संदेशा कोय॥
बसन्त आती जान के, कोयल छेडे़ तान।
सर्दी गर्मी सम लगे, ऋतु की है पहचान॥
मिट्टी की मटकी भली, रखती भीतर ठंड।
शीतल जल ही बाँटती, गर्मी भले प्रचंड॥
परहित जीवन जो जिये, परहित करते काज।
उनकी होती जय सदा, दुनिया करती नाज॥
तरुवर झुकते हैं सदा, देते सबको सीख।
बनकर दानी ही रहो, कभी न मांगों भीख॥
झरझर नदिया बह रही, मीठा जल दे दान।
करती रहती हित सदा, करे न कभी गुमान॥
इन्द्रधनुष के रंग से, जगमग है संसार।
सप्त सुरों की धुन बजी, बजते राग अपार॥
प्रेम अनूठा जानिए, गढ़ता जो इतिहास।
मीरा तुलसी बन गए, मिले जहाँ मधुमास॥
अजब-गजब है प्रेम ये, हर लेता है प्राण।
मन को जब वश में करे, नैन चलाएं बाण॥
अनुभव तो होगा कभी, वो ममता वो प्यार।
जिनसे जीवन में मिले, स्नेह प्रेम संसार॥
जीवन ये अनमोल है, यूँ न कुड़े में रोल।
पाप पुण्य के खेल में, बिरथा बाजा ढोल॥
मेरी नइया धार में, हाथ नहीं पतवार।
होता साथी जो यहाँ, सबको करता पार॥
रोटी कपड़ा औ मकाँ, देता सबका साथ।
मंजिल होगी पास में, लो हाथों में हाथ॥
फल यूँ ही मिलता नहीं, देखो सब इतिहास।
कर्म बिना कुछ भी नहीं, आता है खुद पास॥
बँसुरी बनती बेंत से, मधुर सुनाती तान।
कोयल भी काली भली, देती मुख मुस्कान॥
सीख नदी से चाल तू, बढ़ना सीना तान।
चट्टानी बाधा सभी, हो जाती आसान॥
*बाबा शिव शंखर के धाम...*
(लड़का)
चल ना जाबो दुनो झन मंगलू के दाई
बाबा शिव शंखर के धाम
(लड़की)
चल ना जाबो दुनो झन बुधिया के बाबू
बाबा शिव शंखर के धाम...
(संयुक्त)
बेलपाना अउ धथरा चढ़ाके बना लेबो बिगड़े काम....
(लड़का)
सावन महिना भोले बाबा के मन ला गजब सुहाथे ना
हाथ मा डमरू तिरशुल साजे सबके मन ला भाथे ना
चल ना जाबो दुनो झन मंगलू के दाई
बाबा शिव शंखर के धाम
(लड़की)
गंगा के पानी धरे कंवरिया अवघड़िया ल मनावय
बोल बम बोल बम बोल के नारा जयकारा ल लगावय
चल ना जाबो दुनो झन बुधिया के बाबू
बाबा शिव शंखर के धाम
(लड़का)
उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम बाबा के हावय धाम
चल रे कंवरिया शिव के गुजरिया करले कोटि प्रणाम
चल ना जाबो दुनो झन मंगलू के दाई
बाबा शिव शंखर के धाम
(लड़की)
पारबती दाई तोरे सुवारी पूजय बनके पुजारी
मोरो तँय बेड़ा पार करदे आए हँव मँय दुखियारी
आगेन आगेन दुनो झन बुधिया के बाबू
बाबा शिव शंखर के धाम
(संयुक्त)
पागेन पागेन दुनो झन मंगलू के दाई/बुधिया के बाबू
बाबा शिव शंखर के नाम
तोषण धनगंइहा
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद
http://acharya toshan.blogspot.com
लड़की:-
हावय तोला किरिया राजा जाबे झन छोड़ के
लड़का:-
हावय मोला किरिया रानी जावँव नहीं छोड़ के
सगरी पीरितिया के वादा ल तोड़ के
लड़का:-
तोर पीरीत ह गोरी जिंनगी के अधार हो
कम झन होवय बइरी तोर मोर प्यार हो
लड़की
साजे रहिहँव तोला मैहा कजरा बनाके
खोपा के अपन छंइया गजरा बनाके
राखे रहिहँव तोला मैहा हिरदे मा संजोर के....
लड़का:-
मया के घरोंदा हावय हमर घर दुवार ह
सुख दुख मा रहिबो संगे साजे संसार ह
लड़की
तिही मोर हितवा साजन तिही भगवान हो
तोरे सेवा मा बीते सांझे बिहान हो
चंदा ह कइसे रही बिना अंजोर के.....
तोषण धनगंइहा
9617589667
तोर मया के गाँठ हा हावय ओ बड़ पोठ।
गुरतुर मोला लागथे तोर हँसइ अउ गोठ।।
सपना आथे रात मा चेहरा झुलथे नैन।
सोवत बइठत का कहँव दिल मा नंइहे चैन।।
लागे रे पीरीतिया गुड़ मा पागे सोठ।
गुरतुर मोला लागथे तोर हँसइ अउ गोठ।।
आथे सुरता तोर जब ढारय नैना नीर।
तोरे सूरत हे छिपे देखव हिरदे चीर।।
राखँव तोला धाँधके बनके सुग्घर कोठ।
गुरतुर मोला लागथे तोर हँसइ अउ गोठ।।
दिल के रानी मोर तँय हावस मोर परान।
बन जा तैहा राधिका मोला बिलवा जान।।
गुलगुल भजिया मोर तै मैहा मिठई रोठ।
गुरतुर मोला लागथे तोर हँसइ अउ गोठ।।
तोषण धनगंइहा
धनगांव डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग.
९६१७५८९६६७
लड़की:-
कहाँ लुकागे रे करिया तैहर
खोजँव किंजर किंजर के
लड़का:-
तोर निहोरा म नाँचत हावय
मनवा झूमर झूमर के
लड़की:-
पथरा गेहे नैना मोरे
आके प्यास बुझादे
हो जावय अंग अंग हरियर
पानी पीरीतिया पियादे
मया के बदरा मोरो जिनगी मा
छावय घूमर घूमर के
तोर आगोरा म नाँचत हावय
मनवा झूमर झूमर के
लड़का:-
तरसत हावँव महूं गुजरिया
पिया मिलन के आस मा
मोर जिया अब मोर नंइहे
हावय जेन तोर पास मा
भोला ल मनावँव मैहर
घेरी बेरी सुमर सुमर के
तोर आगोरा म नाँचत हावय
मनवा झूमर झूमर के
मोला बनाले खोपा के गजरा
हाय मोर आँखी के कजरा
चढ़ती जवानी तोर रानी उमर लागे सोला सतरा
खतरा खतरा....
मोर मनबसिया तै आजा
हिरदय म आके समाजा
चढ़ती जवानी तोर रानी उमर लागे सोला सतरा
खतरा खतरा....
क्रमशः....
तोषण चुरेन्द्र
रूख़सत पे दोनों की अपनी देखो जमाना खड़ा था।
डोली दर पे उसकी खड़ी थी मेरा ज़नाजा पड़ा था।
वो गैरों की बाँह में हम कब्रगाह में जानें लगे हैं।
देखो कैसे कैसे फर्ज़ अपने हम.. निभाने लगे हैं।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
आगामी रचना
सुनलव महिमा भारी हे
छत्तीसगढ़ महतारी के2
बड़े बिहनिया चिरई चिरगुन
जेकर महिमा गाथे
हाथ जोड़े आसीस खातिर
चरन माथ नवाथे
कोरा म खेले जेखर लइका,
मीठ मीठ गुंज किलकारी के
छत्तीसगढ़ महातारी के....
हरियर लुगरा हरियर पोलखा
हरियर हाँथ मा धान हे
खेती डोली के साज सिंगारे
जोहर ललना किसान हे
हाँथ तुतारी खाँध मा नाँगर
बइला जस संगवारी के
छत्तीसगढ़ महातारी के...
अरपा पैरी महानदी के
लहरा मा सब तर जाथे
पीके पानी निर्मल गंगा
भुंइया हमर हरियाथे
चंपा चमेली महके जिंहा
सुघर सोभा फुलवारी के
छत्तीसगढ़ महातारी के...
सुआ करमा पंथी ददरिया
पंडवानी के राग हवय
थिरके थाप नंगारा के संग
सतरंगी रंग फाग हवय
ऊंच नीच ल जाने नाहीं
भरे भरे रंग पिचकारी के
छत्तीसगढ़ महातारी के...
राजीम लोचन शिवरीनारायन
जग म मान बढ़ाए
बइठके जिंहा भाँचा राम
शबरी के बोईर खाए
भगति नवधा पावय जिंहा
रघवर राम उपकारी के
छत्तीसगढ़ महातारी के...
दुरगा दाई के पबरित डेरा
डोंगरगढ़ बमलाई
महामाई अंगारमोती संग
किंजरय बिलई माई
आस पुरोदे तै हो माता
तोषण असन पुजारी के
छत्तीसगढ़ महातारी के...
बीर नरायन गुंडाधुर जस
कतको बीर बलिदानी हे
पार नइ पावन अड़हा लइका
जेखर अमर कहानी हे
रही जियत ले खून म सबो के
फूंक अइसन चिंगारी के
छत्तीसगढ़ महातारी के...
**************
तोषण धनगंइहा
९६१७५८९६६७
लड़की:-
कहाँ लुकागे रे करिया तैहर
खोजँव किंजर किंजर के
लड़का:-
तोर निहोरा म नाँचत हावय
मनवा झूमर झूमर के
लड़की:-
पथरा गेहे नैना मोरे
आके प्यास बुझादे
हो जावय अंग अंग हरियर
पानी पीरीतिया पियादे
मया के बदरा मोरो जिनगी मा
छावय घूमर घूमर के
तोर आगोरा म नाँचत हावय
मनवा झूमर झूमर के
लड़का:-
तरसत हावँव महूं गुजरिया
पिया मिलन के आस मा
मोर जिया अब मोर नंइहे
हावय जेन तोर पास मा
भोला ल मनावँव मैहर
घेरी बेरी सुमर सुमर के
तोर आगोरा म नाँचत हावय
मनवा झूमर झूमर के
मैंह तोर दिल के राजा
तैह मोर पीरीत हो
संग कभू छूटय नहीं
मोर मन के मीत हो
**************
मैंह तोर दिल के रानी
तैह मोर पीरीत हो
संग कभू छूटय नहीं
मोर मन के मीत हो
**************
रिमझिम फूहार परे
एसो के सावन मा
नाँचत हे मयूरा रानी
हिरदे के आँगन मा
**************
जियरा अगोरत बइठे
आजा मोर बँइहा मा
झूलना झूलाहू तोला
मया के छँइहा मा
**************
हाय रे सतरंगी छैला
नंइ जाने पीरीत हो
संग कभू छूटय नहीं
मोर मन के मीत हो...
**************
तिही मोर दुख के साँथी
झनजा मोरले दूरिहा ना
आजा रे मोर मयारू
पीरीत के कुरिया मा
**************
जुरमिल रहिबो संगे
एक दूसर साँथ मा
राखे रहूँ जिनगी भर
हाँथे ल हाँथ मा
**************
मैंह तोर गीत गोरिया
तैह मोर संगीत हो
संग कभू छूटय नहीं
मोर मन के मीत हो....
**************
तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
तोर बर पीरीत रे,मोर मन के मीत रे,
तोला मँय अगोरँव,आना तै बजार में।
तोर जस नंइ कोनों,रबो संग संग दुनों,
जोड़ी तोर मोरहावै,करोड़ हजार में।
झन छोड़ मोला जाबे,मोर सही कहाँ पाबे,
फूल मैं गुलाब अँव,गुल गुलजार में।
सावन मा नाचे मोर,हाय रे मयारू चोर,
दिल मोर हासे रोये,तोर ओ खुमार में।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
मैंह तोर दिल के राजा
तैह मोर पीरीत हो
संग कभू छूटय नहीं
मोर मन के मीत हो
**************
मैंह तोर दिल के रानी
तैह मोर पीरीत हो
संग कभू छूटय नहीं
मोर मन के मीत हो
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रिमझिम फूहार परे
एसो के सावन मा
नाँचत हे मयूरा रानी
हिरदे के आँगन मा
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जियरा अगोरत बइठे
आजा मोर बँइहा मा
झूलना झूलाहू तोला
मया के छँइहा मा
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हाय रे सतरंगी छैला
नंइ जाने पीरीत हो
संग कभू छूटय नहीं
मोर मन के मीत हो...
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तिही मोर दुख के साँथी
झनजा मोरले दूरिहा ना
आजा रे मोर मयारू
पीरीत के कुरिया मा
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जुरमिल रहिबो संगे
एक दूसर साँथ मा
राखे रहूँ जिनगी भर
हाँथे ल हाँथ मा
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मैंह तोर गीत गोरिया
तैह मोर संगीत हो
संग कभू छूटय नहीं
मोर मन के मीत हो....
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तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
पानी गिरत नंइहे मेंचका नरियात हे
बबा ह नाती ल कहनी सुनात हे
सोंचे बइठ चौपाल म का करय किसान
दुख के बादर हटे कब होही नवा बिहान
पानी ल देखत सबके आंखी खीझ गे
तन के पसीना बिन बादर के रीस गे
जावत हे अषाड़ अब पानी रितयागेहे
तरी तरी के घूना म जीवरा भुँजागेहे
भोला ले फरियाद हे एसो के सावन में
सब किसान खुश रहय पानी ल आवन दे
मन हर हरिया जही अब के हरेली में
एक मूठा ऊपरहा लूके बोरा भरबो पैली में
तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
मोहनी सुरतिया तोरे ले डारे परान हो
का जादू डारे गोरी सिरतो ईमान हो
हिरदे के भीतरी मा तही ह समाये ना
तोर मुसकाई मोर जिया ललचाये ना
तिरछी नजरिया तोर लागे नयना बान हो
का जादू डारे ओ गोरी गउ सिरतो ईमान हो
****************
तोषण कुमार चुरेन्द्र
नयना ह त़ोर कटार हे जइसे छुरी के धार हे
अंग अंग भिंझे तोर मया लागे मदरस के झार हे
झुलत रहिथे तोर चेहरा मोर आंखी के कोर मा
तोला बसाएंव मैंहा ओ मोर अंग के पोर पोर मा
झन तै जाबे छोड़के पगली मोला तै मझधार में
अंग अंग भिंझे तोर मया लागे मदरस के झार हे
**************
तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
😢दगा म डारे करिया रे💐
-------------------------------
दगा म डारे करिया रे,
काबर हमला, दगा म डारे।
तोर अगोरा म रे करिया,
आँखी सबके तरसत हे।
का होगे रे ,ये करिया ल,
काबर वो नई बरसत हे।।
रुख राई अउ चिरई -चिरगुन,
तोला पूछे रे करिया,
नदिया -नरवा ,डबरा- डबरी,
तोला पूछे रे तरिया।।
दगा म डारे--
तोला देखत दिन पहागे,
बीतगे महीना आषाढ़ के।
अब तक दरशन होवे नई हे,
नरवा -नदियाँ म बाढ़ के।।
दगा म डारे----
सुन रे करिया,जब ते रोबे,
तभे तो दुनियाँ ह हाँसही।
तोर आँसू जब धरती म गिरही,
तभे तो दुनियाँ ह बाँचहि।।
दगा म डारे -----
तोर भरोसा म दुनियाँ हे,
हावय तोर बर बिस्वास रे।
अब तो बरस जा ,रे मोर करिया,
सबके बुझा दे प्यास रे।।
दगा म डारे ---
सुने हावंव तोर अछरा म,
कतको भरे हावय पानी।
तभे तो सब दुनियाँ कहिथे,
करिया तोला औघड़ दानी।।
दगा म डारे---
गरज चमक के ,अब तो करिया,
बरसा जा तेहा पानी।
नाचे, झूमें ये धरती ह,
खुश होवे सब ,जिनगानी।।
दगा म डारे-----
✒रचना
श्रवण कुमार साहू"प्रखर"
राजिम, गरियाबंद,(छ .ग.)
😢दगा म डारे करिया रे💐
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दगा म डारे करिया रे,
काबर हमला, दगा म डारे।
तोर अगोरा म रे करिया,
आँखी सबके तरसत हे।
का होगे रे ,ये करिया ल,
काबर वो नई बरसत हे।।
रुख राई अउ चिरई -चिरगुन,
तोला पूछे रे करिया,
नदिया -नरवा ,डबरा- डबरी,
तोला पूछे रे तरिया।।
दगा म डारे--
तोला देखत दिन पहागे,
बीतगे महीना आषाढ़ के।
अब तक दरशन होवे नई हे,
नरवा -नदियाँ म बाढ़ के।।
दगा म डारे----
सुन रे करिया,जब ते रोबे,
तभे तो दुनियाँ ह हाँसही।
तोर आँसू जब धरती म गिरही,
तभे तो दुनियाँ ह बाँचहि।।
दगा म डारे -----
तोर भरोसा म दुनियाँ हे,
हावय तोर बर बिस्वास रे।
अब तो बरस जा ,रे मोर करिया,
सबके बुझा दे प्यास रे।।
दगा म डारे ---
सुने हावंव तोर अछरा म,
कतको भरे हावय पानी।
तभे तो सब दुनियाँ कहिथे,
करिया तोला औघड़ दानी।।
दगा म डारे---
गरज चमक के ,अब तो करिया,
बरसा जा तेहा पानी।
नाचे, झूमें ये धरती ह,
खुश होवे सब ,जिनगानी।।
दगा म डारे-----
✒रचना
श्रवण कुमार साहू"प्रखर"
राजिम, गरियाबंद,(छ .ग.)
आवत नंइहे जोड़ी मोर होगे बतर के बेरा
कोन जनी अउ कोन मुड़ा डारे हावय डेरा
खेत किसानी के चेत नंइहे कइसे तैं बिलमाये
नांगर बइला के हाल.नंइहे कोन ऐला समझाये
दिन बादर बरसात के धराय नंइहे पेरा
कोन जनी अउ कोन मुड़ा डारे हावय डेरा
फूटे परे हे छानी परवा घर हवै बिन हाल के
होगे जइसे मोर जिंनगी बिन पाती जस डाल के
पानी बिन मछरी तड़पे खोजै अपन डेरा
कोन जनी अउ कोन मुड़ा डारे हावय डेरा
पानी बिन जस धरती तरसै देखत बादर कोती
आजा 'तोषण' घर म तैहा गांव म हीरा मोती
कबले तैहा मारत रहिबे एती तेती के फेरा
कोन जनी अउ कोन मुड़ा डारे हावय डेरा
✒✒✒✒✒
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा
बदरा रानी बदरा रानी
लेते आना भर भर पानी
बड़ी राह निहारत बैठे
झूम के नाचे मयुरा रानी
ऋतु सावन तुझे प्यारी
लगे धरती न्यारी न्यारी
सौंधी खुशबू मिट्टी की
है महके क्यारी क्यारी
अब ना तुम लगाओ देर
राह निहारत आंखें टेर
बरस अब कारे बदरा
समय बीते हो गयी ढेर
छाएगी मगन हरियाली
बात बोले कोयल काली
हो जगत सारा खुशहाल
जैसे सारी दुनिया पाली
तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
29_06_19
आज मोर जनमदिन
पीपर पाना म लिखंव दिल के बात ना
कइसे कटे दिन मोरे कइसे कटे रात ना
निचट तोर सुरता आथे सांझे बिहान हो
हो जाथे करेजा चानी सिरतो ईमान हो
नैना निहोरत बइठे होही मुलाकात ना
कइसे कटे दिन मोरे कइसे कटे रात ना
चंदा जइसे तोर चेहरा चमके आगास म
चैन नंइहे दिल म गोरी रहिथे उदास म
निंदिया नंइ आवै बइरी होगे रात ना
कइसे कटे दिन मोरे कइसे कटे रात ना
मोहनी खवाके तैहा मनवा ल रिझा डरे
पीरीत के पानी तोरे देहिंया ल भिंझा डरे
सावन बिन अब होही कइसे बरसात ना
कइसे कटे दिन मोरे कइसे कटे रात ना
तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
28_06_2019
आज मोर जनमदिन म एचठन नानकून रचना सादर समीक्षार्थ
पीपर पाना म लिखंव दिल के बात ना
कइसे कटे दिन मोरे कइसे कटे रात ना
निचट तोर सुरता आथे सांझे बिहान हो
हो जाथे करेजा चानी सिरतो ईमान हो
नैना निहोरत बइठे होही मुलाकात ना
कइसे कटे दिन मोरे कइसे कटे रात ना
चंदा जइसे तोर चेहरा चमके आगास म
चैन नंइहे दिल म गोरी रहिथे उदास म
निंदिया नंइ आवै बइरी होगे रात ना
कइसे कटे दिन मोरे कइसे कटे रात ना
मोहनी खवाके तैहा मनवा ल रिझा डरे
पीरीत के पानी तोरे देहिंया ल भिंझा डरे
सावन बिन अब होही कइसे बरसात ना
कइसे कटे दिन मोरे कइसे कटे रात ना
तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667
28_06_2019
गोरी ओ तोर सुरता मा सावन कस नैना बरसे ना
दुरिहा मा हावस चंदा बरोबर हिरदे तोर बर तरसे ना
मया के रोग लगाके तै मोला ओ बिलमाये
आनी बानी के सपना देखाके कांहा तै भुलाये
भादो महिना के बदरा कस बिन पानी के गरजे ना
दुरिहा,,,,,,,,
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा
गोरी ओ तोर सुरता मा सावन कस नैना बरसे ना
दुरिहा मा हावस चंदा बरोबर हिरदे तोर बर तरसे ना
मया के रोग लगाके तै मोला ओ बिलमाये
आनी बानी के सपना देखाके कांहा तै भुलाये
भादो महिना के बदरा कस बिन पानी के गरजे ना
दुरिहा,,,,,,,,
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...