मंगलवार, 10 सितंबर 2019

हवाई जहाज बनाऊँगा मैं।

छोटी सी बालमन की कविता

हवाई जहाज बनाऊँगा मैं।
नीले अम्बर में जाऊँगा मैं।
नभ मंडल की सैर करूँगा,
फिर घर वापस आऊँगा मैं।


सूरज चाचा से बातें होंगी।
चंदा मामा संग रातें होंगी।
सभी ग्रहों से दोस्ती करके,
तारों संग मुलाकातें होंगी।


धुएँ कारखानें वहाँ न होगी।
निर्मल शुद्ध हवाएँ होगी।
पान करूँगा हरपल हरदिन, 
रहेगा हमेशा तन ये निरोगी।


मोटर गाड़ी बहुत है चलते।
कितनों राही हैं जीते मरते।
इन सबसे मुझे मुक्ति मिलेगी,
लोग रहेंगे सदा ही तकते।


होगी अब ऊपर मेरी उड़ान।
बनेगा जब ये मेरा वायुयान।
चुन्नु,मुन्नु,पोषण,तोषण,
घुमेंगे नभ में सब सीना तान।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"


कर भला तो हो भला


*कर भला तो हो भला*

                                         पढ़ने के शौकीन शैलेष10 साल के उम्र  में रेल्वे स्टेशन पर आने जाने वाले लोगों के जूते पालीश करता ।जो भी कमाई होती बीमार माँ की दवाई और खाने पीने के सामान जुटाता । 

                                         एक दिन ईश्वर चंद नाम का एक सज्जन व्यक्ति को ट्रेन से कहीं जाना था।जो जोकि साफ्टवेयर इंजीनियर है । "चलो जूते को चमकाया जाये" ऐसा सोचकर इधर उधर देखने लगा तो नजर शैलेष पर पड़ी। पास जाकर जूते पालीश करवाते शैलेष के बारे में पूरी जानकारी पता करने लगा। 

                                     "तुम्हारा क्या नाम है?पढ़ने क्यों नही जाते?तुम्हारे माता पिता आदि आदि?" ईश्वरचंद ने पूछा। "पढ़ाई कैसे करूँ साहब,पिता जी भगवान को प्यारे हो गये,माँ बीमार है सो उनकी परवरिश के लिए कुछ तो काम करना पड़ेगा न साहब।"शैलेष ने जवाब दिया। इन सारी बातों को सुनकर ईश्वर चंद की आखें भर आई।और अपने बीते दिनों को याद करने लगा कि "मैं भी कभी शैलेष की तरह छोटी मोटी मजदूरी करके अपना जीवन बसर करता रहा।इसकी तो माँ है मेरी तो माँ भी नही थी।लेकिन जैसे तैसे पढा़ई पूरी करके आज इस मुकाम तक  पहुंच पाया।" "लो साहब जूता पालीश हो गया" आवाज सुनकर ईश्वर चंद का ध्यान टुटा।

                                      उसने कहा"चलो शैलेष आज से तुम्हें काम करने जरूरत नहीं पड़ेगी,मैं तुम्हें एक अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाऊँगा। और माँ को अपने साथ रखकर उसका इलाज भी करवाऊँगा।" शैलेष की आँखे भर आई ईश्वर चंद की बाते सुनकर।

                                     ईश्वर चंद अपने ट्रेन का सफर रद्द करके शैलेष और उसकी माँ लेकर घर ले आया। ईश्वर चंद एक बेटा बनकर माँ का ईलाज शुरू कर दिया ।जल्द ही माँ भी ठीक हो गई। शैलेष का अच्छे स्कूल में दाखिला हुआ।

                                    ईश्वर चंद के इस तरह के कार्य को देखकर माँ के मुख से यही आशीर्वाद निकला- "भगवान तुम्हें लंबी उम्र दे।जिस तरह तुने हमारा भला किया है,उसी तरह  भगवान भी तुम्हारा भला करे।दुधो नहाओ पूतो फलो।"

                                      ईश्वर चंद की आँखें खुशियों से भर आई।और एक टक माँ को देखने लगा।

                                                                                                                  तोषण कुमार चुरेन्द्र
                                                                                                                        "धनगंइहा"


शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

गणपति वंदना


नन्हें नन्हें हाथ जोड़कर,
गणपति तुम्हें प्रणाम करूँ।
दे दो बुद्धि हमें विनायक,
नित निरतंर जीत करूँ।


बिल्व पत्र मैं तुम्हें चढ़ाऊँ,
निशदिन तेरा ध्यान करूँ।
रिद्धि सिद्धि बुद्धि के दाता,
सब दुखियन के दुख हरूँ।


मोदक तुमको लगते प्यारे,
पार्वती के लाल हो।
पहिली पूजा होती तेरी,
देवो में देव कमाल हो।


माता पिता को माने जगत,
करे परिक्रमा सात।
गणों के देव हो तुम देवा,
कहलाये गणराज।


नंदी भृंगी संग खेले कूदे,
लीला अजब दिखाते।
देख देख मात पिता संग
जग सारे हर्षाते।


एकदंत दयावंत हो देवा,
लीला तेरी न्यारी।
जग में होती पूजा पहले,
मूषक तेरी सवारी।


कामना मेरी हो पूरी,
रख दो मेरी लाज।
सभी सुखी रहे जग में,
कहूँ कर जोड़ आज।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

बुधवार, 4 सितंबर 2019

राम

दोहा

मेरे रघुवर राम की,बड़ी निराली बात।
कृपा करे श्री राम जी,मिले अजब सौगात।।

हनुमत जिनके भक्त है,धरे हृदय में ध्यान।
बनके निशदिन दास जो,रखते प्रभु का मान।।

दशरथ नंदन हो प्रभु,करूँ सदा गुणगान।
सीता के हे प्राण पति,सदा करो कल्याण।।

कैकेयी के लाडले,कौशिल्या के लाल।
बसते शंकर के हृदय, जपे काल के काल।।

माया के संसार में,रहे हमेशा साथ।
तोषण माँगे वर सदा,चरण झुके बस माथ।।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"


सोमवार, 2 सितंबर 2019

गणेश वंदना



नन्हें नन्हें हाथ जोड़कर,
गणपति तुम्हें प्रणाम करूँ।
दे दो बुद्धि हमें विनायक,
नित निरतंर जीत करूँ।
                                बिल्व पत्र मैं तुम्हें चढ़ाऊँ,
                                निशदिन तेरा ध्यान करूँ।
                                रिद्धि सिद्धि बुद्धि के दाता,
                                सब दुखियन के दुख हरूँ।
मोदक तुमको लगते प्यारे,
पार्वती के लाल हो।
पहिली पूजा होती तेरी,
देवो में देव कमाल हो।
                               माता पिता को माने जगत,
                               करे परिक्रमा सात।
                               गणों के देव हो तुम देवा,
                               कहलाये गणराज।
नंदी भृंगी संग खेले कूदे,
लीला अजब दिखाते।
देख देख मात पिता संग
जग सारे हर्षाते।
                               एकदंत दयावंत हो देवा,
                               लीला तेरी न्यारी।
                               जग में होती पूजा पहले,
                               मूषक तेरी सवारी।
कामना मेरी हो पूरी,
रख दो मेरी लाज।
सभी सुखी रहे जग में,
कहूँ कर जोड़ आज।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

शनिवार, 31 अगस्त 2019

ईश वंदना

*ईश वंदना*



बम बम बोल बम,
    खींचे गांजा एक दम,
       अंग में भभूति सोहे,
           दूज चंदा माथ में।

हिमाले पे डेरा रहे,
    गल नाग फेरा रहे,
          वामंग बिराजे सती,
               गणपति साथ में।

हलाहल पीने वाले,
   परहित जीने वाले,
        नीलकंठ बन गये,
            विष लिए हाथ में।

तेरी लीला न्यारी लागे,
    जग हितकारी लागे,
         मेरी नाव पार करो,
              खड़ा मैं हूँ बाट में।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

शुक्रवार, 30 अगस्त 2019

बहना का प्यार

लघु कथा



*बहना का प्यार*

                                            बहन को तीज लिवाने के लिए किसन घर से मोटर सायकल लेके निकला।मन ही मन मुस्कुराते हुए जा ही रहा था कि अचानक.....पीछे से एक मोटर सायकल वाले ने तेज रफ्तार से आते हुए किसन को ठोकर मार दी।

                                           इधर सुनीता भी आज मन ही मन गुनगुना रही है कि आज भैय्या मेरा तीज के लिए लिवाने आने वाला है।मुंडेर पें कौआ कांव-कांव करते संदेशा सुना रहा है।पंछी की कलरव भी मन को भा रही है।

                                          सुनीता भैय्या के आने का इंतजार कर रही थी।तभी.... फोन की घंटी बजी।संदेश आया कि तेरा भैय्या अस्पताल में भर्ती है जल्दी से आ जाओ।

                                          संदेश मिलते ही दंग रह गयी।"हे भगवान! सोचा क्या और क्या हो गया?" सुनीता सोचने लगी। जैसे तैसे बहना अस्पताल पहुंची।भैय्या को देखा ।सुकुन की साँस ली कि ज्यादा चोटें नही आईं।कहने लगी "क्या भैय्या !धीरे चलाना चाहिए न!तुम्हें कुछ हो जाता तो...?"

                                           "जब तक तेरी जैसी बहन मेरे साथ है तो मुझे  कुछ भी नही हो सकता।" किसन ने कहा।

                                         "इस साल तीज में भोलेनाथ से अपने पति अपने बच्चों की सलामती के साथ-साथ तेरे लिए भी दुआ मागूँगी कि तू सदा खुश रहे ।तुम्हें दुनिया में कोई तकलीफ न हो।" सुनीता ने कहा।
                                         किसन एक टक अपनी बहन को देखता रहा।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

सरगम



सरगम तेरी पायल की मेरे मन की बोल
गीत मिलन की छेड़ दे हिया के पट खोल


छम छम वन में नाचती देखते ही बादल मोर
सावन की पुरवाई बाँधे तुझ संग प्रीत की डोर
आजा बसंत बहार में ले कोयल की बोल....


मेरे मन की गजगामिनी मैं हूँ तेरा चितचोर
मिल जाए एक झलक देखूँ तुझे जो भोर
मेरे हिय के प्रेम को प्रेम तुला से अब तोल....


तोषण कुमार चुरेन्द्र
'धनगंइहा'

गुरुवार, 29 अगस्त 2019

ईश वंदना

माखन खाता नन्द घर,मधुबन करता रास।
कब आओगे मोहना,बसी नयन में आस।।
हाथ पसारे द्वार तिहारो।
मेरो मन करता जयकारो।
मुरलीधर तुम नाग नँथायो।
राधे रानी के मन  भायो।
गोपाला केशव बहुते नामा।
आना माधव अपनो ग्रामा।
मीत सुदामा तोहे प्यारा।
जानत हर कोई जग सारा।
दे दीजै प्रभु यह वरदाना ।
सकल जगत हो आप समाना।
आओ नटवर धीर बँधाओ।
फिर एक बार गीता गाओ।
तेरे दरशन की आस में,रोवत हैं बृज धाम।
आजा गिरधर लौट के,फिर राधा के ग्राम।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

ईश वंदना



माखन खाता नन्द घर,मधुबन करता रास।
कब आओगे मोहना,बसी नयन में आस।।


हाथ पसारे द्वार तिहारो।
मेरो मन करता जयकारो।

मुरलीधर तुम नाग नँथायो।
राधे रानी के मन  भायो।

गोपाला केशव बहुते नामा।
आना माधव अपनो ग्रामा।

मीत सुदामा तोहे प्यारा।
जानत हर कोई जग सारा।

दे दीजै प्रभु यह वरदाना ।
सकल जगत हो आप समाना।

आओ नटवर धीर बँधाओ।
फिर एक बार गीता गाओ।


तेरे दरशन की आस में,रोवत हैं बृज धाम।
आजा गिरधर लौट के,फिर राधा के ग्राम।।



तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"

प्यार करता हूँ

चोरी छिपे सही दीदार करता हूँ।
जानें नहीं कभी मैं प्यार करता हूँ।

देखे कभी नमी आँखें झलक से जो,
अपनी झुकी निगाहें चार करता हूँ।

तेरे हँसी लबों की चाहत मुझे है,
खुद को कभी-कभी बीमार करता हूँ।

माना मुझे नही आता मुस्कुराना,
तेरे लिए जहाँ गुलजार करता हूँ।

समझो नहीं कभी गूँगा बधिर हमको,
इश़्की जुबाँ अभी इजहार करता हूँ।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
"धनगंइहा"


बुधवार, 28 अगस्त 2019

अंत्याक्षरी



अभ्यास की दृष्टि से सादर ....मंच पर

अवहेलना,

मत करना अवहेलना,कभी बड़ों की बात।
दुआ कभी मिलता नहीं,हो दिन चाहे रात।।


विवेचना,

करिए कर्म विवेचना,रखिए सदा ये ध्यान।
धन दौलत जब पास हो,ना रख कभी गुमान।।


व्याप्त,

गुण अवगुण सब व्याप्त है,यही जगत की रीत।
मीठी वाणी बोल के,सकल विश्व लो जीत।


आकंठ,

भरा हुआ आकंठ तक,सदा पतित में दंभ।
झुकना कभी न जानते,तने रहे बन खंभ।


ममता,

माँ की ममता को भला,आँक सके न कोय।
भरकर सुत के पेट को,खुद ही भूखी सोय।।


प्रलाप,

सुख दुख के इस खेल में,करते नहीं प्रलाप।
धैर्य मन में धारिए,मिट जाए संताप।।


लालसा,

त्यागें मन की लालसा,करें ईश का ध्यान।
धन दौलत साथी नहीं,रखिए इसका ज्ञान।।


वन्दना,

मातु पिता की वन्दना,करलें आठों याम।
जिनके पुण्य प्रताप से,बनते बिगड़े काम।।


चापलूस,

चापलूस के काम का,रहता जग में शोर।
बड़े-बड़े ठग जात हैं,क्या ठाकुर क्या चोर।।


झंझावत

आते झंझावत शाम जो,हिय में उठती आह।
पिया गये परदेश को,घर से तकती राह।।


तोषण कुमार चुरेन्द्र "धनगंइहा"

भारत के प्यारे जागव



भारत के प्यारे जागव
देश के रखवारे जागव
बइरी दुवारे आवय
तुम सिर उतारव जागव


झोंकय अपन जिनगानी
शिवाजी मनु मर्दानी
आजाद भगत के टोली
सुनले तैं अमर कहानी
भुजा फड़कालव जागव
आगी भड़कालव जागव...
बइरी दुवारे आवय...

सुते के नंइहे पारी
करव लड़े के तइयारी
थर्र खावय जम्मो बइरी
जानय ये दुनिया सारी
रण के बाकुरों जागव
जग के दुलारों जागव....
बइरी दुवारे आवय.....


ऊबाल भरव रग-रग में
बाधा कतको हे पथ मे
फौलाद करेजा रखलव
दंभ भरव पग-पग में
दाई के ललना जागव
भरके हुंकार जागव....
बइरी दुवारे आवय......


जागव मोर देश के हीरा
हर लेवव सब दुख पीरा
भारत माता के दुलरवा
बहिनी के भइय्या वीरा
रक्षा के सूंत बधावव
मिलके सब फरज निभावव....
बइरी दुवारे आवय....


भारत के  आन बचावव
बन जा तैं बघवा मानव
दुसमन के छक्का छूटय
भाग जावय अबके दानव
तिरंगा थामव जावव
जयहिंद सब मिलजुल गावव...
बइरी दुवारे आवय....


तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद

दोहालरी


मुखिया अपने गाँव में,
      आन बसे है तीन।
अपनी ही बस हाँकते,
       लाख बजा लो बीन।

कारज कितना भी भला,
       सही मिले ना दाम।
रखते ऐसी चाहतें,
       अच्छा हो परिणाम।।

खाना ही दोगे नही,
       कैसे लोगे काम।
समझो ना अब तुम यहाँ,
       अपने को गुलफ़ाम।।

राजा अपने दास को,
       समझे कोल्हू बैल।
तन मन धन शोषण करे,
       पेर निकाले तैल।।

आने का है भान सब,
       जाने का ना लेख।
अपना भी परिवार है,
       घर पर जाकर देख।।

मीठा मीठा बोलके,
        मन को लेते फाँस।
रखलें अपनी बात तो,
        टाल देत है हाँस।

अपनी टोली में सभी,
        रखते मुँह को बंद।
सुनके ही रह जात हैं,
        करके नाड़ी मंद।।

खून पसीने सींचते,
        देते विद्या दान।
समझें इनकी भावना,
        दें नव वेतन मान।।

पेट अगर होगा भरा,
        मुख से निकले वाह।
लात पड़े जो पेट में,
        निकले दिल से आह।।

धन तो है मिलता नहीं,
        मिलता केवल मान।
भूखा रहके हम मरें,
        नहीं किसी को भान।।

लक्ष्य गर मिलता नहीं,
        बदलें अपनी राह।
पा जाओगे साथियों,
        जो है मन में चाह।

मंगलवार, 13 अगस्त 2019

खधर छानी


**************

मोर घर के खधर छानी
टिपिर टापर  चुहे पानी

चिमनी मा अंजोर नंइहे
चातर  गली  खोर नंइहे

नरवा ढोरगा डबडबागे
खेती   खार  लबलबागे

हरेली के भावय तिहार
दसमूर हे घर घर दुवार

तुलसी के अमर कहानी
गावय गुनी मुनी ग्यानी

जुगुर जुगुर जोगनी बरे
रतिहा सावन कोन धरे

पुरवइय्या सरर सरर
घरजे बादर घरर घरर

भाई  बहिनी  के राखी
हावय बंधना के पाखी

मिलके  झंडा फहिराबो
अजादी  के  गीत गाबो

नाचे  रे  मोर मन मंजूर
सुनले  तैहा  कन कजूर

माँत्रिक  के  छू छू मंतर
धरले  तै  जी  जी अंतर

जय युवा  जय किसान
होही तोषन नवा बिहान

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तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा

खधर छानी


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मोर घर के खधर छानी
टिपिर टापर  चुहे पानी

चिमनी मा अंजोर नंइहे
चातर  गली  खोर नंइहे

नरवा ढोरगा डबडबागे
खेती   खार  लबलबागे

हरेली के भावय तिहार
दसमूर हे घर घर दुवार

तुलसी के अमर कहानी
गावय गुनी मुनी ग्यानी

जुगुर जुगुर जोगनी बरे
रतिहा सावन कोन धरे

पुरवइय्या सरर सरर
घरजे बादर घरर घरर

भाई  बहिनी  के राखी
हावय बंधना के पाखी

मिलके  झंडा फहिराबो
अजादी  के  गीत गाबो

नाचे  रे  मोर मन मंजूर
सुनले  तैहा  कन कजूर

माँत्रिक  के  छू छू मंतर
धरले  तै  जी  जी अंतर

जय युवा  जय किसान
होही तोषन नवा बिहान

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तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा

सोमवार, 12 अगस्त 2019

आ जाओ हे प्यारे


आ जाओ हे प्यारे कान्हा धरती के भार हटाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने को


अनगिन अत्याचार करने बढ़ रहे अत्याचारी
स्वार्थी बनकर तेरे जग में करते भ्रष्टाचारी
भरदो सबके अंतरात्मा समरसता के गाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने को


द्रोपदी की लाज आज भी जरा नही है बाकी
दुर्योधन दुशासन जैसे दिखते कितनों झाँकी
मुक्त कर से प्रतिपल अपने शील पर चीर लुटाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने को


ये मेरा ये तेरा कहके राग हैं सभी आलापे
एक दूसरे को फाँसने रोग बड़े है ब्यापे
रहे सदा एक छत के नीचे गोवर्धन उठाने को
तरस रही है कान आजा गीता ज्ञान सुनाने


तोषन धनगंइहा

बेटी हावय मोर आन


कज्जल छंद

बेटी हावय मोर आन।
बेटी हावय मोर शान।
पढ़ही तनुजा बढ़े मान।
सगरो दुनिया करे गान।

ये सबके बनाथे काज।
रखथे  बेटी मोर लाज।
बनके तैहा  शेर आज।
बैरी बर तै गिरा गाज।

चंदा जइसे  तोर रूप।
सहिके तैहा छाँव धूप।
बाधा करथस ढेर लूप।
पूजय तोला सूरज भूप।

मिलही तोला दुआ ढेर।
होवय  देर  भले सवेर।
कोनों  तोला   दे  नटेर।
आँखी   देबे   तै  तरेर।

तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा

भोले के द्वार


चलो संगी जाबो सब
भोले के द्वार हो
चरण मा मिलथे जेखर
सारा संसार हो

सगरो चराचर के
जीव ल बचाये
पान करे घोर हलाहल
नीलकंठ कहाये
मिल जुल देवता करे
जय जयकार हो...

अंग भभूति चुपरे
पहिरे बघवा छाल तै
कालों के काल भोले
जय महाकाल तै
शरन मा तोर आएँव
दे दे दुलार हो....

रीषि मुनि देवता धामी
रात दिन तोला ध्यावे
पूरा करे कामना तै
आशीष तोर पावे
नंइया हे मझधार मोरो
करदे तही पार हो....

तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा

चलव संगी चलव जवान

"भइय्या बर बहिनी के राखी ह छुटगे
दाई ददा के डेहरी ले दीया ह बुझगे।
मोर भारत माता के अचरा खातिर
मंगल भगत खुदी फांसी म झुलगे।।"
-------------------------------------


चलव संगी चलव जवान, देश के गुन ल गाबो
मोर सोन चिरइय्या भारत के, चरन म मांथ नवाबो
●
आजादी के खातिर कतको,अमर जवान बलिदान होईंन
बहिनी अपन भाई ल खोए,महतारी बेटा बर रोईन
याद करन ऊँखर कुरबानी,अश्रु के धार बोहाबो
सोन चिरइय्या भारत के चरन म मांथ नवाबो
●
भारत माता के आन खातिर, छाती म झेलिन हे गोली
सदा बढ़िन आघू मग म, नित खेलिन खून के होली
अइसन शहीद के सुरता म, दीया अखंड जलाबो
सोन चिरइय्या भारत के चरन म मांथ नवाबो
●
सबझन मिलके रहिबो संगी, एक सूँत मा बंधाके
चलबो कदम ले कदम मिलाके, मया पीरीत ल बसाके
आज खुसी ले झूमव नांचव, आजादी  जसन मनाबो
सोन चिरइय्या भारत के चरन म मांथ नवाबो
●
आज पन्दरा अगस्त के दिन, देस अजादी पाईस हे
ये दिन ल हम कइसे भुलाबो, तिरंगा लहराईस हे
आवव सबझन एक जुरिया के, आजाद गीत ल गाबो
सोन चिरइय्या भारत के चरन म मांथ नवाबो
●
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

                 तोषन धनगंइहा
डौंडीलोहारा बालोद छत्तीसगढ़

शुक्रवार, 9 अगस्त 2019

देश के रखवारे


भारत के प्यारे जागो
देश के रखवारे जागो
बैरी दुवारे आये
तुम सिर उतारो जागो

सोने की नही है बारी
करो कूच की तैयारी
थर्र खाये सारे बैरी
जाने ये दुनिया सारी
रण के बाकुरों जागो
मेरे दुलारों जागो.....
बैरी दुवारे आये.....

ऊबाल भरो रग-रग में
बधायें कई है मग मे
फौलाद जिगर तुम रखलो
दंभ भरो पग-पग में
माई के लालों जागों
वीरों हुंकारों जागो....
बैरी दुवारे......

भारत की  आन बचानें
बन जा तू शेर दिवानें
अरियों के छक्के छूटे
भीड़ जा बनकर परवाने
तिरंगा थामे जागो
जयहिंद सब गालो जागो...
बैरी दुवारे....

तोषन धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद


गुरुवार, 8 अगस्त 2019

दीदी आई


शिशु गीत

दीदी आई जी दीदी आई।
एक बड़ी सी पुड़िया लाई।
हमने जो देखा जब ये खोल,
एक सोने की गुढ़िया पाई।

श्याम सलोनी गुड़िया प्यारी।
लगती सबको न्यारी न्यारी।
संग घूमती है संग दौड़ती,
तितली जैसे क्यारी क्यारी।

कभी न रोती हँसती हरदम।
बिन पायल के नाचे छमछम।
जब शिव जी का डमरू बाजे,
बोले मुख से बम बम बम।

गुड़िया मेरे साथ है रहती।
मीठी मीठी बातें हैं कहती।
ऊपर देखो नीलगगन में,
खिल के चाँदनी वो है हँसती।

कभी नही तुम हमें रुलाना।
कभी नही तुम हमें सताना।
दूर मुझसे तुम जाना नहीं,
दौड़ के मेरे पास में आना।

हर हर महादेव

॥हर हर महादेव॥
^^^^^^^^^^^^^●^^^^^^^^^^^^^
                        (१)
भूत भामन भोला गंगाधर,माथे म चंदा ताज।
भीख मांगतहन तोरे तीर,दरस दिखादे आज।।
                        (२)
आवय सावन चले कंवरिया, हर हर के जयकार।
मुड़ी ले  निकले  गंगा धारा , सरपन पहिरे हार।।
                        (३)
सुरहिन गइय्या के दुध लाके,भोला तोला मनाय।
धथुरा फूल फर बेल पाना,सुघ्घर तोला चढाय।।
                       (४)
पावन परब तोर सावन मा, सबझन ह सकलाय।
ओमकारा नमो शिवा जपय,बमबम धुनी लगाय।।
                        (५)
राम नाम महादेवा जपय,शिवा जपय प्रभु राम।
राम उमापति दुनो जपय तब,बनथे बिगड़े काम।।
^^^^^^^^^^^^^●^^^^^^^^^^^^^

तोर बिना


तोर बिना तोर बिना
दिल नंइ लागय
मोर दिल नंइ लागय
तिही मोरे हस जिंनगी
तिही मोर हस हर खुशी
तिही मोर हस बंदगी

कइसे कहँव
कहाँ जावँव
कइसे करँव सजदा
तोरे बिन......

1.तोरे कसम तोरे कसम जाने जाना
तोरे बर तोरे बर मँय दिवाना
कइसे जीअँव कइसे जीअँव बताना
मरना घलो मोला नंइ आय
तिही मोरे हस जिंनगी
तिही मोर हस हर खुशी
तिही मोर हस बंदगी
तोरे बिन....

जोही मोरे जोही मोरे सोना सोना
रब्बा मोरे रब्बा मोरे हस सलोना
तोरे बिना अउ कोनों नंइ होना
सुरता तोरे कतना सताय
तिही मोरे हस जिंनगी
तिही मोर हस हर खुशी
तिही मोर हस बंदगी

कइसे कहँव
कहाँ जावँव
कइसे करँव सजदा
तोरे बिन......

तोला देखे ले..जान


तोला देखे ले..जान...मोर जान आगे
तोला देखे ले..जान...मोर जान आगे
मन के मंदिर में जइसे भगवान आगे
मोला लागे अइसे सगरो जहान आगे
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
मन तो होथे तोला मँय निहारत रहँव
लेके बँइहा..मा तोला...झुलावत रहँव
तोर बिना...कहीं...चैन आ..वय नहीं
सुरता मा कहीं...मोला....भावय नहीं
रही-रही के तोरेच..तीर धियान लागे
मन के मंदिर में जइसे...भगवान आगे
मोला लागे अइसे..सगरो जहान आगे
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
रोज सपना मा आके सताथस काबर
राति आवै न निंदिया जगाथस काबर
कलगी पागा...के तोर मन मोर मोहे ना
आज मन के मिलौना रद्दा तोर जोहे ना
उड़ँव बनके...मँय भँवरा अरमान जागे
मन के मंदिर में जइसे.....भगवान आगे
मोला लागे अइसे....सगरो जहान आगे
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^

बुधवार, 7 अगस्त 2019

भैय्या मेरा प्यारा


पिता जैसा क्षमता है, भाई माँ की ममता है।
खुशियाँ जहान की ये,भाई से ही पाई है।
बने कभी हाथी घोड़े,भूलकर दुख सारे,
लिए मुस्कान अपने,गम को छिपाई है।
सारी सुविधाएँ दिए,बहनों पे वार भाई
खाए तूने रुखी सूखी,खीर को खिलाई है।
कृष्ण जैसा रक्षा करे,द्रौपती के चीर भरे,
आँचल को चीरकर,राखी जो बंधाई है।

भैय्या मेरी लाज रखो,जिंदगी आबाद रखो,
आपने कलाई में जो,राखी ये बंधायी है।
लाख आएँ तूफाँ कोई,या कोई बहने रोई,
मुश्किलों में आके भाई,जान जो बचायी है।
दिल को दुखाना नहीं, हमें यूँ रूलाना नहीं,
मुखड़े को देख देख, फूले न समाई है।
जग में है न्यारा भाई,सबसे है प्यारा भाई,
तारा माँ की आँखो का है,दुलारा ये भाई है।

तोषण कुमार चुरेन्द्र"धनगंइहा"
डौंडी लोहारा बालोद
छ.ग. ९६१७५८९६६७

मनुज आचरण


मनुज आचरण बने रखव,मीठा रखव जुबान।
क्षमाशील गुनवान बनव,रहव दया के खान।।

मुढ़ अनपढ़ बर शास्त्र के,रथे भला का दाम।
थस अंधरा बर दरपन के,रहय नहीं कुछु काम।।

अभिमानी अपन आप में,भरत रथे हूँकार।
अइसन मनखे दुनिया में,पावे ना सत्कार।।

सब झन मिलके बने रहव,चलत रहव सब साथ।
दिन दरिद के सेवा करव,कृपा करे रघुनाथ।।

कारज मन मा राखे ले,कभु पूरा नइ होय।
मुख भीतर नइ जाय हिरन,लगे शेर जब सोय।।

तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद

रामायण सार


सुम्मत ले गाड़ी चलय,बनथे बिगड़े काज।
अइसे भारत देश मा,अवधपुरी हे राज।।

राजा दशरथ के महल,रानी रहिथे तीन।
देवइया पानी घलो,बेटा नइहे एक झीन।।

बेटा बनके राम हा,राजमहल मा आय।
अवधपुरी नाचे लगे,भर भर मन हरसाय।।

कैकैयी रानी सुने,राम राज के बात।
सुधबुध सबला त्याग के,खाय नही ओ भात।

बनही राजा अब भरत,राम जही बनवास।
बात मोर तै मान ले,तभ्भे आही रास।

राम सिया भाई लखन,जावय गंगा पार।
अड़हा केंवट हा घलो,तार डरे परिवार।।

पंचवटी बनगे कुटी,सुख्खा डारा पान।
हर लेगे माता जानकी,रावन जे शैतान।।

खोजत सीता राम हा,जटायु दिये उबार।
जूठा बोइर बाँटके,शबरी होगे पार।।

रघुवर अउ सुगरीव जी,सुग्घर बधे मितान।
सुखदुख सब ला जान के,किरपा दे भगवान।

मातु सिया के खोज बर,चंगा हे हनुमान।
बाधा जम्मो भाग गे,लगे राम के ध्यान।।

साधु कुटिया देखके,गये विभीषण तीर।
गोठ बात मा जान गे,मातु सिया के पीर।।

वाटिका पहुँचे तभे,मिले सिया के शोर।
राम बसा के ध्यान मा,भुँजे गली सब खोर।

पाए सिया के शोर जब,पहुँचे लंका धाम।
रावन के परिवार के,करदिस काम तमाम।।

सिया राम भाई लखन,आय अवधपुर धाम।
बरगे दीया चौमुड़ा,राम सिया के नाम।।

तोषन के हे लेखनी,लिखे रमायन सार ।
माँगत हावँव दव क्षमा,गलती देहु जी टार।

तोषन धनगंइहा

गुरुवार, 1 अगस्त 2019

झन कर गरब गुमान


झन कर गरब गुमान झन कर गरब गुमान रे
भैय्या मोर जायेला परही शमशान

पाँच रतन के बने तोर काया
जेकर नँइहे ठिकाना।
चारेच दिन हरिहर पाना
पाछू परेहे अइलाना
समय रहत पहिचान
समय रहत पहिचान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान

कौड़ी कौड़ी जोड़े खोंधरा बनाए
एक दिन छोड़ के जाना
साथी संगी सब रही जाही
जग के हे रीत पुराना
सुनले सिरतो ईमान
सुनले सिरतो ईमान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान

माटी माटी के काया बने हे
माटी मा मिल जाही
धरम करम के करले कमाई
पुरखा हा तर जाही
झन तै बिरथा जान
झन तै बिरथा जान रे
भैय्या मोर
झन कर गरब गुमान

तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौ.लोहारा
बालोद छ.ग.

बुधवार, 31 जुलाई 2019

धनगाँव पुरान


धरती दाई तोर मैं,
माथ नवावँव आज।
तोर दया परताप ले,
बाँचय मोरो लाज।।१।।

मोर गाँव धनगाँव के,
कतका करिहँव गोठ।
अगुवा भंडारी हवय,
गुरतुर बोली पोठ।।२।।

बीच गली हनुमान के,
अड़बड़ शोभा पाय।
कतको संकट हे रहय,
चुटकी मा सिरजाय।।३।।

शीतल रुप हे शीतला,
शीतलता पहुँचाय।
पाके छँइहा मातु के,
सब झन हे हरसाय।।४।।

बिकटराव बाबा हमर,
देवता बड़का जान।
नर नारी सब देत हे,
दुनिया भरके मान।।५।।

शिव शंकर के ठाँव हे,
गाँव नहर के तीर।
करके पूजा पाठ सब,
अपन मिटावय पीर।।६।।

देवता हावय साँहड़ा,
गजब बढ़ावय मान।
जेकर किरपा ले सुनव,
गोधन बढ़थे जान।।७।।

करथे रक्षा गाँव के,
देवता कथे सियार।
कोनो अलहन नइ रहय,
सुख पुरवक संसार।।८।।

आ जाबे बुधवार के,
रहिथे गाँव बजार।
किसम किसम के तै बिसा,
हरिहर हे तरकार।।९।।

पहिली ले हे आठवीं,
हावय जी इसकूल।
जाके सब लइका पढ़े,
करय नहीं जी भूल।।१०।।

मातर मड़ई मा घलो,
रहिथे जी बड़ धूम।
खाके बीड़ा पान तै,
जोर लगा के घूम।।११।।

रहिथन संगी साथ मा,
सबके आथन काम।
सुम्मत ले गाड़ी चले,
बगरे जग मे नाम।।१२।।

तोषन कहिथे हे सखा,
राखव मीठ जबान।
होही हमरो गाँव हा,
जग में कभू महान।।१३।।

तोषन धनगंइहा

सावन


सावन है मन मोहना,
        बरसे मेघ फुहार।
वन में नाचे मोरनी,
        देखो पंख पसार।।

शिव शंकर के धाम को,
         चलते भक्त हजार।
हँसते गाते झूमते,
         करते जय जय कार।।

हरा भरा खलिहान अब,
         दिखते चारो ओर।
झूमते गाते पेड़ हैं,
         नदिया करते शोर।

आते बादल देख के,
          होते मगन किसान।
धरती बदले काँचली,
          हरित दिखे है धान।।

तोषन धनगंइहा

करमा


का:-डोंगरी के तीर मा आबे
करमा के धून ला गाबे
माँदर बजाहूँ करमा ताल मा
करमा नँचाहूँ एसो साल मा

की:-हाय रे मोर छैला बाबू
करे तै दिल ला काबू
माँदर बजादे करमा ताल मा
करमा नँचादे एसो साल मा

का:-आमा के रूखवा
कोयली हा छेड़े तान
देखँव रे तोला
मैं साँझ अउ बिहान

मोर आँखी के काजर
घूमें रे मनवा बादर
माँदर बजाहूँ करमा ताल मा
करमा नँचाहूँ एसो साल मा

की:-भादो के महिना
फूले ला साँवा गा
पातर कनिहा मा
ढिले ला दाँवा गा

सुरता हा तोर आथे
रतिहा मोला जगाथे
माँदर बजादे करमा ताल मा
करमा नँचादे एसो साल मा

का:-चले पुरवइय्या
सावन महिना
बान चलाये
दुनो ये नँयना

देखे बर तोला रे
तरसथे चोला रे
माँदर बजाहूँ करमा ताल मा
करमा नँचाहूँ एसो साल मा

की:-चंदा अँजोरी के
निरमल रात
करबे अगोरा
हे दू दिन के बात

लागे हे पीरीत रे
मोर मन मीत रे
माँदर बजादे करमा ताल मा
करमा नँचादे एसो साल मा

©®
तोषन धनगंइहा
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद

सोमवार, 29 जुलाई 2019

आचार्य जी


आचार्य जी....

कितना सम्मानजनक शब्द है,किंतु शब्दार्थ अथाह ।जिसे समझ पाना हर किसी के लिए संभव नही है। जिन्हे इनकी समझ है वह स्वयं ब्रह्म से कम नही है। कोई भी व्यक्ति आचार्य तभी हो सकता है जब वह सही और गलत का अंतर स्पष्ट करते हुए भैय्या बहनों के अंतकरण में अपनी अमिट छाप छोड़ सके। जो अपने कर्मो के द्वारा अपने पूर्वजों ,महापुरूषों से प्रेरणा पाकर अपने अनुशरणकर्ताओं का पथप्रदर्शक बनकर संबल व प्रोत्साहित करे। आचार्य को मन ,शरीर,बुद्धि ,नैतिक व आध्यत्म दृष्टि से परिपक्व होने की आवाश्यकता है जो राष्ट्र के निर्माण में सहयोगी बन सके।जिस प्रकार कुम्हार मिट्टी से घड़ा बनाने के लिए अनेक कठिनाईयों का सामना करते हुए उसका निर्माण करता है ठीक वैसे ही आचार्य भी अपने भैय्या बहनों के सर्वागिण विकास के लिए विभिन्न प्रकार के प्रयोग नवाचार आदि प्रतिपादित करता है। श्री रामचरित्र मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसी दास जी ने अपनी धर्मपत्नी से प्रेरित होकर महान ग्रंथ की रचना की।जो आज हम सबके लिए प्रेरणादायी है।अगर हम अपने आने वाली पीढ़ी, समाज, राष्ट्र और विश्व व भैय्या बहनों का कल्याण करना चाहते हैं प्रेरणा बनना चाहते हैं   तो हमें अपने दुर्गुणो का त्यागकर एक अच्छे आचरण करने वाला आचार्य बनना होगा।

गुरुवार, 25 जुलाई 2019

दोहालरी


नाम: तोषण कुमार चुरेन्द्र

साहित्यिक उपनाम: तोषन धनगंइहा

मोबाइल नं: ९६१७५८९६६७

ईमेल: yoyokumartoshan@gmail.com

पता: ग्राम धनगाँव, पोष्ट ,थाना व तहसील -डौंडी लोहारा, जिला - बालोद (छ.ग.)
पिन ४९१७७१

मुख्यालय: सरस्वती शिशु मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय डौंडी लोहारा

सूरज बाँटे रौशनी, खुद ही जल कर रोज।
देता प्रतिपल चेतना, करता प्रतिदिन खोज॥

करलें रक्षा हम सभी, बनकर माली आज।
महकेंगी बेटी तभी, करेंगी जग में राज॥

मत समझो लाचार अब, बेटी तनुज समान।
भरती अब हुंकार है, लेकर हाथ कमान॥

कच्ची मिट्टी सा अभी, दिजे मुझे आकार।
भल मानुष मैं बन सकूँ, बचे न शेष विकार॥

महिना सावन में सखी, मयूर प्यासा रोय।
हरले धरणी पीर को, दे संदेशा कोय॥

बसन्त आती जान के, कोयल छेडे़ तान।
सर्दी गर्मी सम लगे, ऋतु की है पहचान॥

मिट्टी की मटकी भली, रखती भीतर ठंड।
शीतल जल ही बाँटती, गर्मी भले प्रचंड॥

परहित जीवन जो जिये, परहित करते काज।
उनकी होती जय सदा, दुनिया करती नाज॥

तरुवर झुकते हैं सदा, देते सबको सीख।
बनकर दानी ही रहो, कभी न मांगों भीख॥

झरझर नदिया बह रही, मीठा जल दे दान।
करती रहती हित सदा, करे न कभी गुमान॥

इन्द्रधनुष के रंग से, जगमग है संसार।
सप्त सुरों की धुन बजी, बजते राग अपार॥

प्रेम अनूठा जानिए, गढ़ता जो इतिहास।
मीरा तुलसी बन गए, मिले जहाँ मधुमास॥

अजब-गजब है प्रेम ये, हर लेता है प्राण।
मन को जब वश में करे, नैन चलाएं बाण॥

अनुभव तो होगा कभी, वो ममता वो प्यार।
जिनसे जीवन में मिले, स्नेह प्रेम संसार॥

जीवन ये अनमोल है, यूँ न कुड़े में रोल।
पाप पुण्य के खेल में, बिरथा बाजा ढोल॥

मेरी नइया धार में, हाथ नहीं पतवार।
होता साथी जो यहाँ, सबको करता पार॥

रोटी कपड़ा औ मकाँ, देता सबका साथ।
मंजिल होगी पास में, लो हाथों में हाथ॥

फल यूँ ही मिलता नहीं, देखो सब इतिहास।
कर्म बिना कुछ भी नहीं, आता है खुद पास॥

बँसुरी बनती बेंत से, मधुर सुनाती तान।
कोयल भी काली भली, देती मुख मुस्कान॥

सीख नदी से चाल तू, बढ़ना सीना तान।
चट्टानी बाधा सभी, हो जाती आसान॥

गुरुवार, 18 जुलाई 2019

बाबा शिव शंखर के धाम


*बाबा शिव शंखर के धाम...*

(लड़का)
चल ना जाबो दुनो झन मंगलू के दाई
बाबा शिव शंखर के धाम

(लड़की)
चल ना जाबो दुनो झन बुधिया के बाबू
बाबा शिव शंखर के धाम...

(संयुक्त)
बेलपाना अउ धथरा चढ़ाके बना लेबो बिगड़े काम....

(लड़का)
सावन महिना भोले बाबा के मन ला गजब सुहाथे ना
हाथ मा डमरू तिरशुल साजे सबके मन ला भाथे ना
चल ना जाबो दुनो झन मंगलू के दाई
बाबा शिव शंखर के धाम

(लड़की)
गंगा के पानी धरे कंवरिया अवघड़िया ल मनावय
बोल बम बोल बम बोल के नारा जयकारा ल लगावय
चल ना जाबो दुनो झन बुधिया के बाबू
बाबा शिव शंखर के धाम

(लड़का)
उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम बाबा के हावय धाम
चल रे कंवरिया शिव के गुजरिया करले कोटि प्रणाम
चल ना जाबो दुनो झन मंगलू के दाई
बाबा शिव शंखर के धाम

(लड़की)
पारबती दाई तोरे सुवारी पूजय बनके पुजारी
मोरो तँय बेड़ा पार करदे आए हँव मँय दुखियारी
आगेन आगेन दुनो झन बुधिया के बाबू
बाबा शिव शंखर के धाम

(संयुक्त)
पागेन पागेन दुनो झन मंगलू के दाई/बुधिया के बाबू
बाबा शिव शंखर के नाम

तोषण धनगंइहा
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद
http://acharya toshan.blogspot.com

बुधवार, 10 जुलाई 2019

हावय तोला किरिया


लड़की:-
हावय तोला किरिया राजा जाबे झन छोड़ के

लड़का:-
हावय मोला किरिया रानी जावँव नहीं छोड़ के
सगरी पीरितिया के वादा ल तोड़ के

लड़का:-
तोर पीरीत ह गोरी जिंनगी के अधार हो
कम झन होवय बइरी तोर मोर प्यार हो

लड़की
साजे रहिहँव तोला मैहा कजरा बनाके
खोपा के अपन छंइया गजरा बनाके
राखे रहिहँव तोला मैहा हिरदे मा संजोर के....

लड़का:-
मया के घरोंदा हावय हमर घर दुवार ह
सुख दुख मा रहिबो संगे  साजे संसार ह

लड़की
तिही मोर हितवा साजन तिही भगवान हो
तोरे सेवा मा बीते सांझे बिहान हो
चंदा ह कइसे रही बिना अंजोर के.....

तोषण धनगंइहा
9617589667

तोर मया के गाँठ हा


तोर मया के गाँठ हा हावय ओ बड़ पोठ।
गुरतुर मोला लागथे तोर हँसइ अउ गोठ।।

सपना आथे रात मा चेहरा झुलथे नैन।
सोवत बइठत का कहँव दिल मा नंइहे चैन।।
लागे रे पीरीतिया गुड़ मा पागे सोठ।
गुरतुर मोला लागथे तोर हँसइ अउ गोठ।।

आथे सुरता तोर जब ढारय नैना नीर।
तोरे सूरत हे छिपे देखव हिरदे चीर।।
राखँव तोला धाँधके बनके सुग्घर कोठ।
गुरतुर मोला लागथे तोर हँसइ अउ गोठ।।

दिल के रानी मोर तँय हावस मोर परान।
बन जा तैहा राधिका मोला बिलवा जान।।
गुलगुल भजिया मोर तै मैहा मिठई रोठ।
गुरतुर मोला लागथे तोर हँसइ अउ गोठ।।

तोषण धनगंइहा
धनगांव डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग.
९६१७५८९६६७

रविवार, 7 जुलाई 2019

कहाँ लुकागे करिया


लड़की:-
कहाँ लुकागे रे करिया तैहर
खोजँव किंजर किंजर के

लड़का:-
तोर निहोरा म नाँचत हावय
मनवा झूमर झूमर के

लड़की:-
पथरा गेहे नैना मोरे
आके प्यास बुझादे
हो जावय अंग अंग हरियर
पानी पीरीतिया पियादे
मया के बदरा मोरो जिनगी मा
छावय घूमर घूमर के
तोर आगोरा म नाँचत हावय
मनवा झूमर झूमर के

लड़का:-
तरसत हावँव महूं गुजरिया
पिया मिलन के आस मा
मोर जिया अब मोर नंइहे
हावय जेन तोर पास मा
भोला ल मनावँव मैहर
घेरी बेरी सुमर सुमर के
तोर आगोरा म नाँचत हावय
मनवा झूमर झूमर के

मोला बनाले खोपा के गजरा

मोला बनाले खोपा के गजरा
हाय मोर आँखी के कजरा
चढ़ती जवानी तोर रानी उमर लागे सोला सतरा
खतरा खतरा....

मोर मनबसिया तै आजा
हिरदय म आके समाजा
चढ़ती जवानी तोर रानी उमर लागे सोला सतरा
खतरा खतरा....

क्रमशः....

तोषण चुरेन्द्र

रूख़सत

रूख़सत पे दोनों की अपनी देखो जमाना खड़ा था।
डोली दर पे उसकी खड़ी थी मेरा ज़नाजा पड़ा था।

वो  गैरों की  बाँह में  हम कब्रगाह में  जानें लगे हैं।
देखो  कैसे कैसे  फर्ज़ अपने  हम..  निभाने लगे हैं।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667

सुनलव महिमा


आगामी रचना

सुनलव महिमा भारी हे
छत्तीसगढ़ महतारी के2

बड़े बिहनिया चिरई चिरगुन
जेकर महिमा गाथे
हाथ जोड़े आसीस खातिर
चरन माथ नवाथे
कोरा म खेले जेखर लइका,
मीठ मीठ गुंज किलकारी के
छत्तीसगढ़ महातारी के....

हरियर लुगरा हरियर पोलखा
हरियर हाँथ मा धान हे
खेती डोली के साज सिंगारे
जोहर ललना किसान हे
हाँथ तुतारी खाँध मा नाँगर
बइला जस संगवारी के
छत्तीसगढ़ महातारी के...

अरपा पैरी महानदी के
लहरा मा सब तर जाथे
पीके पानी निर्मल गंगा
भुंइया हमर हरियाथे
चंपा चमेली महके जिंहा
सुघर सोभा फुलवारी के
छत्तीसगढ़ महातारी के...

सुआ करमा पंथी ददरिया
पंडवानी के राग हवय
थिरके थाप नंगारा के संग
सतरंगी रंग फाग हवय
ऊंच नीच ल जाने नाहीं
भरे भरे रंग पिचकारी के
छत्तीसगढ़ महातारी के...

राजीम लोचन शिवरीनारायन
जग म मान बढ़ाए
बइठके जिंहा भाँचा राम
शबरी के बोईर खाए
भगति नवधा पावय जिंहा
रघवर राम उपकारी के
छत्तीसगढ़ महातारी के...

दुरगा दाई के पबरित डेरा
डोंगरगढ़ बमलाई
महामाई अंगारमोती संग
किंजरय बिलई माई
आस पुरोदे तै हो माता
तोषण असन पुजारी के
छत्तीसगढ़ महातारी के...

बीर नरायन गुंडाधुर जस
कतको बीर बलिदानी हे
पार नइ पावन अड़हा लइका
जेखर अमर कहानी हे
रही जियत ले खून म सबो के
फूंक अइसन चिंगारी के
छत्तीसगढ़ महातारी के...

**************
तोषण धनगंइहा
९६१७५८९६६७

कहाँ लुकागे करिया

लड़की:-
कहाँ लुकागे रे करिया तैहर
खोजँव किंजर किंजर के

लड़का:-
तोर निहोरा म नाँचत हावय
मनवा झूमर झूमर के

लड़की:-
पथरा गेहे नैना मोरे
आके प्यास बुझादे
हो जावय अंग अंग हरियर
पानी पीरीतिया पियादे
मया के बदरा मोरो जिनगी मा
छावय घूमर घूमर के
तोर आगोरा म नाँचत हावय
मनवा झूमर झूमर के

लड़का:-
तरसत हावँव महूं गुजरिया
पिया मिलन के आस मा
मोर जिया अब मोर नंइहे
हावय जेन तोर पास मा
भोला ल मनावँव मैहर
घेरी बेरी सुमर सुमर के
तोर आगोरा म नाँचत हावय
मनवा झूमर झूमर के

गुरुवार, 4 जुलाई 2019

मैंह तोर राजा

मैंह तोर दिल के राजा
तैह मोर पीरीत हो
संग कभू छूटय नहीं
मोर मन के मीत हो
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मैंह तोर दिल के रानी
तैह मोर पीरीत हो
संग कभू छूटय नहीं
मोर मन के मीत हो
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रिमझिम फूहार परे
एसो के सावन मा
नाँचत हे मयूरा रानी
हिरदे के आँगन मा
**************
जियरा अगोरत बइठे
आजा मोर बँइहा मा
झूलना झूलाहू तोला
मया के छँइहा मा
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हाय रे सतरंगी छैला
नंइ जाने पीरीत हो
संग कभू छूटय नहीं
मोर मन के मीत हो...
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तिही मोर दुख के साँथी
झनजा मोरले दूरिहा ना
आजा रे मोर मयारू
पीरीत के कुरिया मा
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जुरमिल रहिबो संगे
एक दूसर साँथ मा
राखे रहूँ जिनगी भर
हाँथे ल हाँथ मा
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मैंह तोर गीत गोरिया
तैह मोर संगीत हो
संग कभू छूटय नहीं
मोर मन के मीत हो....
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तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667

पीरीत

तोर बर पीरीत रे,मोर मन के मीत रे,
तोला मँय अगोरँव,आना तै बजार में।
तोर जस नंइ कोनों,रबो संग संग दुनों,
जोड़ी तोर मोरहावै,करोड़ हजार में।
झन छोड़ मोला जाबे,मोर सही कहाँ पाबे,
फूल मैं गुलाब अँव,गुल गुलजार में।
सावन मा नाचे मोर,हाय रे मयारू चोर,
दिल मोर हासे रोये,तोर ओ खुमार में।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667

मैंह तोर राजा


मैंह तोर दिल के राजा
तैह मोर पीरीत हो
संग कभू छूटय नहीं
मोर मन के मीत हो
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मैंह तोर दिल के रानी
तैह मोर पीरीत हो
संग कभू छूटय नहीं
मोर मन के मीत हो
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रिमझिम फूहार परे
एसो के सावन मा
नाँचत हे मयूरा रानी
हिरदे के आँगन मा
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जियरा अगोरत बइठे
आजा मोर बँइहा मा
झूलना झूलाहू तोला
मया के छँइहा मा
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हाय रे सतरंगी छैला
नंइ जाने पीरीत हो
संग कभू छूटय नहीं
मोर मन के मीत हो...
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तिही मोर दुख के साँथी
झनजा मोरले दूरिहा ना
आजा रे मोर मयारू
पीरीत के कुरिया मा
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जुरमिल रहिबो संगे
एक दूसर साँथ मा
राखे रहूँ जिनगी भर
हाँथे ल हाँथ मा
**************
मैंह तोर गीत गोरिया
तैह मोर संगीत हो
संग कभू छूटय नहीं
मोर मन के मीत हो....
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तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667

पानी गिरत नंइहे

पानी गिरत नंइहे मेंचका नरियात हे
बबा ह नाती ल कहनी सुनात हे

सोंचे बइठ चौपाल म का करय किसान
दुख के बादर हटे कब होही नवा बिहान

पानी ल देखत सबके आंखी खीझ गे
तन के पसीना बिन बादर के रीस गे

जावत हे अषाड़ अब पानी रितयागेहे
तरी तरी के घूना म जीवरा भुँजागेहे

भोला ले फरियाद हे एसो के सावन में
सब किसान खुश रहय पानी ल आवन दे

मन हर हरिया जही अब के हरेली में
एक मूठा ऊपरहा लूके बोरा भरबो पैली में

तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667


बुधवार, 3 जुलाई 2019

मोहनी सुरतिया

मोहनी सुरतिया तोरे ले डारे परान हो
का जादू डारे गोरी सिरतो ईमान हो
हिरदे के भीतरी मा तही ह समाये ना
तोर मुसकाई मोर जिया ललचाये ना
तिरछी नजरिया तोर लागे नयना बान हो
का जादू डारे ओ गोरी गउ सिरतो ईमान हो
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तोषण कुमार चुरेन्द्र

नयना ह तोर

नयना ह त़ोर कटार हे जइसे छुरी के धार हे
अंग अंग भिंझे तोर मया लागे मदरस के झार हे

झुलत रहिथे तोर चेहरा मोर आंखी के कोर मा
तोला बसाएंव मैंहा ओ मोर अंग के पोर पोर मा
झन तै जाबे छोड़के पगली मोला तै मझधार में
अंग अंग भिंझे तोर मया लागे मदरस के झार हे

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तोषण कुमार चुरेन्द्र
9617589667

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...