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भादो महिना अंधियारी पाख
लगे हावय देखव पितर शाख
पानी देवत दुनो अजुरी जोड़
पुरखउती परमपरा बात राख
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होवत बिहनिया अंगना लिपे
सुघ्घर चकचंदन चउंक पुराय
तोरई पाना फूल नीक लगे बेला
पिडहा माढे लोटा दतवन चाय
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पाना तोरई के भाग संहरावय
बरबट्टी करिया मेछरावत हो
फर तोरई संग साग बनावय
बड जोरदरहा रंग जमावत हो
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तीन-तीन घांव तिलांजलि देवय
दाई ददा अऊ पुरखा सोरियाके
भोग लगाथे आके करिया कागा
घूमत घामत सबझन सकलाके
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कथे सियानन पंदरा दिन बर
पुरवज मन परिवार तीर आथे
जनम जनम के भटकत जीवरा
लइका बर आशीष छोड़ जाथे
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-आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
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