बुधवार, 5 अक्टूबर 2016

अतिक्रमण ( बेजाकब्जा )

अतिक्रमण ( बेजाकब्जा )
अतिक्रमण ही अतिक्रमण बढ़ा रहा पाक आज
खाल पहने हुए धूर्त लोमड़ी की बढ़ा रहा परवाज
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बनकर दिमक जो चांट रहा भरत भूमि मे आकर
आज वही जो आंख दिखाता हमसे रोशनी पाकर
याद दिलादो फिर कारगिल बिसर रहा जो आज
खाल पहने हुए धूर्त लोमड़ी की बढा रहा परवाज
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भारत की इस माटी पर कब्जा जो बेजा बढाएगा
कसम है भारत माता की धड से सर उड जाएगा
वीर सपूत इस धरती माँ की नाद कर रहा आज
खाल पहने हुए धूर्त लोमड़ी की बढा रहा परवाज
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छुपकर वार करने वाले सुनले तेरी अब खैर नहीं
बहुत हो चुका लुका छिपी मन कोई अब धैर नहीं
कहता "तोषण" मिलके साथी जोर लगा आवाज़
खाल पहने हुए धूर्त लोमड़ी की बढ़ा रहा परवाज
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आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
४९१७७१

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