दुरगा दाई के नवरात म सब संगी संगवारी मन ल गाड़ी गाड़ी बधाई
दाई दुरगा के चरन म काव्य सुमन सादर समर्पित करत हंव ।
सबझन मोला आशीष देहू अमर के पांव तुंहर परत हंव।।
दाई दुरगा के चरन म काव्य सुमन सादर समर्पित करत हंव ।
सबझन मोला आशीष देहू अमर के पांव तुंहर परत हंव।।
॥🕉🕉॥जंवारा॥🕉🕉॥
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मन हमरो झुमय नाचय मिलके करव जयकारा।
आगे तिहार नवरात के रिग बिग जोत जंवारा।।
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आगे नवरात दाई केचलना दीया जलाबो।
चइत महीना दाई ल नरिहर धरके मनाबो।
🍍🍍🍍🍍🍍🍍🍍🍍🍍🍍🍍
पबरित मांटी लान केसुघर फुलवरिया बनाबो।
पोक्खा गंहू छान के दाई बर बिरही भिंगाबो।।
💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮
एक्कम ले शुरू होवय दुरगा दाई के नवरात।
अंधियारा मन दूर करय जोत जलय दिनरात।।
🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔🔔
गऊ माता के गोबर लानय खुंट धर अंगना लिपाय।
अगरी चंऊर बगरी पिसान सुगहर चंऊक पुराय।।
🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱
सोनेन सोन कलसा साजे आमा पान संहराय।
दीया जलय रिगबिग चंहू दिश अंजोर बगराय।।
⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜
पंडा लानय करसा पानी रहे फुलवरिया सिंचाय।
दुरगा दाई के बाढ़य जंवारा लहर लहर लहराय।।
🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾
मांदर ढोल नंगारा बाजय सब देंवता ह नाचत हे।
देखै दाई अपन फूलवरिया मुच मुचले हांसत हे।।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
पंडा नाचय बइगा नांचय नांचय गांव अउ पारा।
नयना भरगे खुसी हंमागे देख देख जोत जंवारा।।
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
अईस पंचमी धरिन नरिहर दाई दुवरिया तीर आगे।
सेऊक भक्तन हांथ जोंड मन के मनउती सब मांगे।।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
हरियागे माता के जंवारा छप्पन कोटि देंवता आगे।
हवन पूजन होय आठे मा हुंम धूप ल सब पागे।।
🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀
नवम दिन बिदागरी केझूमय नाचय सब संसारा।
बिसरजन बर जावय सुघर मोर दुरगा दाई के जंवारा।।
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आचार्य तोषण
गांव -धनगांव ,डौंडीलोहारा जिला-बालोद, छत्तीसगढ़
टीप ;- इही कविता म मोला "छत्तीसगढ़ साहित्य मंच" ले छत्तीसगढ़ के पागा कलगी ७ म सम्मान करे गेहे ।
मन हमरो झुमय नाचय मिलके करव जयकारा।
आगे तिहार नवरात के रिग बिग जोत जंवारा।।
आगे नवरात दाई केचलना दीया जलाबो।
चइत महीना दाई ल नरिहर धरके मनाबो।
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पबरित मांटी लान केसुघर फुलवरिया बनाबो।
पोक्खा गंहू छान के दाई बर बिरही भिंगाबो।।
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एक्कम ले शुरू होवय दुरगा दाई के नवरात।
अंधियारा मन दूर करय जोत जलय दिनरात।।
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गऊ माता के गोबर लानय खुंट धर अंगना लिपाय।
अगरी चंऊर बगरी पिसान सुगहर चंऊक पुराय।।
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सोनेन सोन कलसा साजे आमा पान संहराय।
दीया जलय रिगबिग चंहू दिश अंजोर बगराय।।
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पंडा लानय करसा पानी रहे फुलवरिया सिंचाय।
दुरगा दाई के बाढ़य जंवारा लहर लहर लहराय।।
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मांदर ढोल नंगारा बाजय सब देंवता ह नाचत हे।
देखै दाई अपन फूलवरिया मुच मुचले हांसत हे।।
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पंडा नाचय बइगा नांचय नांचय गांव अउ पारा।
नयना भरगे खुसी हंमागे देख देख जोत जंवारा।।
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अईस पंचमी धरिन नरिहर दाई दुवरिया तीर आगे।
सेऊक भक्तन हांथ जोंड मन के मनउती सब मांगे।।
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हरियागे माता के जंवारा छप्पन कोटि देंवता आगे।
हवन पूजन होय आठे मा हुंम धूप ल सब पागे।।
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नवम दिन बिदागरी केझूमय नाचय सब संसारा।
बिसरजन बर जावय सुघर मोर दुरगा दाई के जंवारा।।
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आचार्य तोषण
गांव -धनगांव ,डौंडीलोहारा जिला-बालोद, छत्तीसगढ़
टीप ;- इही कविता म मोला "छत्तीसगढ़ साहित्य मंच" ले छत्तीसगढ़ के पागा कलगी ७ म सम्मान करे गेहे ।

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