छोड़ पंछी अब नीड को ,बढ़े गगन की ओर।
इंद्रधनुषी किरणों संग, जगा रही है भोर॥
जगा रही है भोर , करले कदम तू आगे।
हुआ दिवस देखकर,निशा दूर-दूर भागे।।
सूरज आया देख,किसन छेेेड़े है बंशी।
सरर सरर की तान,नीड को छोड़े पंछी।।
© ®आचार्य तोषण कुमार चुरेन्द्र
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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