आना चाहती थी वो जिन्दगी में हमारी
"तोषण"
कम्बख्त वक्त ने कर दिया दूर मुझसे
सरदार है हम सभी बेवफाओं का
"तोषण"
सीखते है हमीं से बेवफाई करना
भूल गयी तू उन सब कसमों उन वादों को
मै तो वो एहसास हूँ वो सांस हूँ इसे भुला पाओगी कैसे
"तोषण"
कम्बख्त वक्त ने कर दिया दूर मुझसे
सरदार है हम सभी बेवफाओं का
"तोषण"
सीखते है हमीं से बेवफाई करना
भूल गयी तू उन सब कसमों उन वादों को
मै तो वो एहसास हूँ वो सांस हूँ इसे भुला पाओगी कैसे
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें