रविवार, 18 दिसंबर 2016

वाह रे आतंकवाद..."

एक नानकून ल इका के मनोभाव ल उकेरत चार लैन आप सबके नवकंज पद म समरपित

वाह रे !आतंकवाद
बनहूँ तोर बर फौलाद

होन दे मोला बड़े
देखत रहिबे खड़े-खड़े
सैनिक देशी बनके
रहूँ सीमा तीर तनके
आ कभू सीमा तोड़
देंहूँ तोर आँखी फोड़
आगु म बम बन जाहूँ
तन ल तोर आगि लगाहूँ
कसम हवे माटी के
पिहुँ लहू तोर छाती के
तिरंगा मोर मान हे
मोर भारत के शान हे
मिट जही नाम निशान
करबे कोंनो अपमान
भारत के लइका अंव
एक में कोरी खइका अंव
लड़त भले मर जाहूँ
फेर पहिली मार गिराहूँ
होही जी नांव अमर
भजही तोषण डगर-डगर
© ®
आचार्य तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडीलोहारा बालोद
छत्तीसगढ़ ४९१७७१

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