सत्य घटना पर आधारित कविता
आप तक सादर समर्पित----------
मोर जिंनगी होगे हे अंधियार
~~~~~~~~~$$$~~~~~~
नंइहे मोर कर रूपिया पइसा
कइसे मनावंव देवारी तिहार
धान पान घलो मिंजाय नंइहे
मोर जिंनगी होगे हे अंधियार
आप तक सादर समर्पित----------
मोर जिंनगी होगे हे अंधियार
~~~~~~~~~$$$~~~~~~
नंइहे मोर कर रूपिया पइसा
कइसे मनावंव देवारी तिहार
धान पान घलो मिंजाय नंइहे
मोर जिंनगी होगे हे अंधियार
नौकरी करत हन जी नाम के
पइसा कउड़ी के ठिकाना निंही
मिल जथे जी दू.....तीन हजार
लाज..शरम सेती बताना निंही
दुसर घर सउघा दीया बरत हे
गरीबी म होवत हे बंटा―धार
नंइहे मोर कर रूपिया पइसा
कइसे मनावंव देवारी तिहार
धान पान घलो मिंजाय नंइहे
मोर जिंनगी होगे हे अंधियार
नंइ लेवाय हे ददा बर कुरथा
एकझन लइका बर जींस सेट
बाई कथे मोर बर लेदे लुगरा
सन्न रहिगेंव मेहर सुनके रेट
काहत हवय उपराहा एकठन
मोर बर लेदेतेस सोनहा हार
नंइहे मोर कर रूपिया पइसा
कइसे मनावंव देवारी तिहार
धान पान घलो मिंजाय नंइहे
मोर जिंनगी होगे हे अंधियार
खेती खार के गोठे झनकर
बनी भूती म चलथे गुजारा
मिल जथे एदे पैंतीस किलो
आधा बोरी चँउर के सहारा
सोंचथों जातेंव परदेश कमाए
ददा के आंखी होगे हे अंधियार
नंइहे मोर कर रूपिया पइसा
कइसे मनावंव देवारी तिहार
धान पान घलो मिंजाय नंइहे
मोर जिंनगी होगे हे अंधियार
करजा के मारे चिंता धरेहे
गुनथों एहा कइसे छुटाही
कब किरपा होही लछमी के
दुख दलिदरी कब ए सिराही
सोंचत-सोचत तन ह घुरत हे
जिंनगी म होही कब उजियार
नंइहे मोर कर रूपिया पइसा
कइसे मनावंव देवारी तिहार
धान पान घलो मिंजाय नंइहे
मोर जिंनगी होगे हे अंधियार
©®
आचार्य तोषण, धनगांव डौंडीलोहारा, बालोद
छत्तीसगढ़ ४९१७७१
पइसा कउड़ी के ठिकाना निंही
मिल जथे जी दू.....तीन हजार
लाज..शरम सेती बताना निंही
दुसर घर सउघा दीया बरत हे
गरीबी म होवत हे बंटा―धार
नंइहे मोर कर रूपिया पइसा
कइसे मनावंव देवारी तिहार
धान पान घलो मिंजाय नंइहे
मोर जिंनगी होगे हे अंधियार
नंइ लेवाय हे ददा बर कुरथा
एकझन लइका बर जींस सेट
बाई कथे मोर बर लेदे लुगरा
सन्न रहिगेंव मेहर सुनके रेट
काहत हवय उपराहा एकठन
मोर बर लेदेतेस सोनहा हार
नंइहे मोर कर रूपिया पइसा
कइसे मनावंव देवारी तिहार
धान पान घलो मिंजाय नंइहे
मोर जिंनगी होगे हे अंधियार
खेती खार के गोठे झनकर
बनी भूती म चलथे गुजारा
मिल जथे एदे पैंतीस किलो
आधा बोरी चँउर के सहारा
सोंचथों जातेंव परदेश कमाए
ददा के आंखी होगे हे अंधियार
नंइहे मोर कर रूपिया पइसा
कइसे मनावंव देवारी तिहार
धान पान घलो मिंजाय नंइहे
मोर जिंनगी होगे हे अंधियार
करजा के मारे चिंता धरेहे
गुनथों एहा कइसे छुटाही
कब किरपा होही लछमी के
दुख दलिदरी कब ए सिराही
सोंचत-सोचत तन ह घुरत हे
जिंनगी म होही कब उजियार
नंइहे मोर कर रूपिया पइसा
कइसे मनावंव देवारी तिहार
धान पान घलो मिंजाय नंइहे
मोर जिंनगी होगे हे अंधियार
©®
आचार्य तोषण, धनगांव डौंडीलोहारा, बालोद
छत्तीसगढ़ ४९१७७१
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें