सोमवार, 16 दिसंबर 2019

माथ पकड़ रोता रहा


*-:तोषन के दोहे पंच:-*


माथ पकड़ रोता रहा, बदरा देख किसान।

हुई मिजाई है नहीं, पड़ा धान खलिहान।।१।।


टिपटिप करती ही रही, देखो आधी रात।

बिन दुल्हा जस है लगे, बिन मौसम बरसात।।२।।


ध्यान नहीं दिन रात की , घड़ी घड़ी आँसू धार।

मन आया तो हँस लिये, ये मेघा कचनार।।३।।


पड़े समय की मार जब, मरते जात किसान।

बिन मौसम बरसात ये, कैसा ये दिनमान।।४।।


मिट्टी में है मिल गई, देखे सपने सार।

जीना मरना क्या कहें, है किसान लाचार।।५।।



तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा

डौंडी लोहारा बालोद छत्तीसगढ़

रविवार, 15 दिसंबर 2019

दान

प्रदत्त विधा:- घनाक्षरी
विषय   :- दान
दिनांक:- 15/12/19 रविवार
★★★★★★★★★★★★★★
गाथा दान के हे बड़े,छोटे बड़े सब करे,
बड़े बड़े ऋषि मुनि,करते बखान है।

दानी राजा हरिश्चंद्र,तज दिये राजपाठ,
दान का प्रमाण दिया,जाने ये जहान है।

कबूतर प्राण खातिर,राजा शिवि माँस त्यागे,
दिया सीख मानवता,गाते जो पुराण है।।

दान करो मिल सब,अर्थ कर्म ज्ञान सेवा,
महिमा दानवीरों की,सबसे महान है।
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

समय


*सुधारोपरांत सादर समीक्षार्थ*

विधा दोहा
विषय समय
दिनांक १६/१२/१९
दिन सोमवार
★★★★★★★★★★★★★★
समय कभी रुकता नहीं,नहीं कहीं है ठौर।
गाती कोयल जान कर,झूमे अमिया बौर।।१।।

समय देख कर ही रखें ,एक एक पग फूँक।
आएगा यमराज जब,हो जाएगा मूक।।२।।

समय बड़ा बलवान है, करें समय में काम।
समय चाल को जान कर ,मत कर तू आराम।।३।।

समय एक सा है नहीं,सबको नाच नचाय।
राजा दानी कर्ण भी,इसका पार न पाय।।४।।

नहीं समय पर बस यहाँ, गर्व न कर इंसान।
मिट जानी है जिन्दगी, चलना है शमशान।।५।।
★★★★★★★★★★★★★★
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

सबले बढि़हा नगरिहा भैय्या

सबले बढ़िया नगरिहा भैया 
धरती मैय्या के सेवा बजाय 
बासी चटनी पेज ला खाके
सुग्घर अपन जिंनगी पहाय 
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या....

सुख-दुख के बेरा मा आके 
सब झन सन मिलके गोठियाय
 रहिथे वो रयपुरा गांव में 
सरस्वती के गुण ला गाय
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या...

दीया सही अंजोरिया करथे 
सुमता के रद्दा हे बताय
मधुर सहित के अगवा बनके
फुल बगिया कस हे सिर जाय
सबले बढ़िया नगरिहा भैया...

छत्तीसगढ़ के नगरिहा बेटा 
करनी कहिनी कही न जाय 
तोर दया ले तोर मया ले 
अड़हा लइका गंगा नहाय
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या...

जन्मदिवस हे आज तोरे
जन जन मिलके खुशी मनाय
दे संदेश भाईचारा के 
गोंदा फुल कस ममहाय 
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या...

जिंदगी तोर सलामत राहय 
तोषन धनगंइहा गोहराय 
बनके सूरुज तै नील गगन में 
रहिबे नवा अंजोर बगराय
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या....

तोषन कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडीलोहारा बालोद छत्तीसगढ़

दान


प्रदत्त विधा:- घनाक्षरी
विषय   :- दान
दिनांक:- 15/12/19 रविवार
★★★★★★★★★★★★★★
गाथा दान के हे बड़े,छोटे बड़े सब करे,
बड़े बड़े ऋषि मुनि,करते बखान है।

दानी राजा हरिश्चंद्र,तज दिये राजपाठ,
दान का प्रमाण दिया,जाने ये जहान है।

कबूतर प्राण खातिर,राजा शिवि माँस त्यागे,
दिया सीख मानवता,गाते जो पुराण है।।

दान करो मिल सब,अर्थ कर्म ज्ञान सेवा,
महिमा दानवीरों की,सबसे महान है।
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

शनिवार, 14 दिसंबर 2019

शादी के लड्डू तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा

*सार छंद मे एक अदना प्रयास*
*शादी के लड्डू*

शादी में हैं बजते बाजे,झूमें नाचे सारे।
सपनों की रानी है अपनी,जो निहारती द्वारे।। 
फूटे मन शादी के लड्डू,दिन ये ऐसा आया।
जाऊंगा चढ़कर मैं घोड़ी,दिल में उमंग छाया।।

रह रह वो पुकारती होगी,आ जा दुल्हे राजा।
तरस गयी है अँखिया मेरी,ज्यादा मत तरसाजा।।
दिल मेरा हिचखोले खाये,इकपल रहा न जाये।
लेकर क्यूँ बेचैनी दिल ये,पलपल मचला जाये।।

जल्दी फेरे तुम लगवाओ,बाजा ढोल बजाओ।
शादी की शहनाई गुंजी,सेहरा माथ सजाओ।।
आओ मेरे सारे भाई,घड़ी बड़ी शुभ है आई।
तोषन देता आकर बन्दे,लाखा कोटि बधाई।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

वोट

-: विनम्र प्रार्थना :-
देना अपना वोट...

डर है जिसको हार की,बाँटे भर भर नोट ।
जनता भाई जागकर,..देना अपना वोट ।।

देना अपना वोट,चुनो जी मुखिया अपना ।
करे गाँव का नाम,...करे जो पूरा  सपना ।।

कह तोषन कर जोड़,बात ये उसको इसको ।
सब मिल देना वोट,मना जो चाहे जिसको ।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र"धनगंइहा"
डौंडी लोहारा बालोद छत्तीसगढ़
९५७५०७०६८९

अंत्याक्षरी

समीक्षार्थ 
एक प्रयास प्रदत्त शब्दांतक्षरी पर

[13/12, 8:49 pm] Toshan:

 भूल नहीं इतिहास को,मिलती जिनसे राह।
मिलती जिससे प्रेरणा,सागर भरे अथाह।।

[13/12, 8:53 pm] Toshan:

 उपासना श्री राम की,कर लेता दिन  रैन।
कट जाता शुभ शाम ये,चित को मिलता चैन।।

[13/12, 9:03 pm] Toshan:

 बनकर दानव मत करो,रावण जस अट्हास।
हो सकता है दिन कभी,अपना भी परिहास।।

[13/12, 9:06 pm] Toshan:

 आकर इस संसार में,भटक गया इंसान।
भूला बैठा नेक को,मन रखकर अभिमान।।

[13/12, 9:08 pm] Toshan:

 रोज नई किरणों संग,लेकर आता धूप।
वंदन बारम्बार है, हे दिनपति सुरभूप।।

[13/12, 9:10 pm] Toshan:

 समय बड़ा बलवान है,बदले सबकी चाल।
पल में हँसता आदमी,पल में रोता हाल।।

[13/12, 9:14 pm] Toshan:

 सच्चा रखलो आचरण,बनकर मानव मीत।
देना लेना नित प्रीत को,यही जगत की रीत।।

टूटे पंखों को ले करके

समीक्षार्थ...
एक अदना सा प्रयास...
टूटे पंखों को ले करके,
कैसे जीवन जीना हो।
किसको कहते साथ चले हम,
घोर हला जब पीना हो।

छाये काले बादल गम का,
कहीं नही उजियारा है।
बीच भँवर में अपनी कश्ती,
दूर कहीं न किनारा है।
पाया नहीं है इस जहान में,
कोई कहीं महजबीना हो।।1।।


अपनी पीर दिखायें किसको,
नहीं किसी से यारी है।
जिसे दिया था हमने दिल को,
उसने हमें बिसारी है।
लेकर खंजर वार करे जो,
खुदा कहीं न हसीना हो।।2।।


जिसको माना अपना सबकुछ,
बन बैठी ओ हरजाई।
हाय बेरुखी नखरे उसकी,
तोषन को रास न आई।
छोड़ चलूँगा दुनिया को अब,
मेरी  कब्र मदीना हो।।3।।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

धनगंइहा के दोहे



दीपक मिट्टी से बना,जलता भानु समान।
तम हरता है रात में,खोकर निज पहचान।।

 भूल नहीं इतिहास को,मिलती जिनसे राह।
मिलती जिससे प्रेरणा,सागर भरे अथाह।।

 उपासना श्री राम की,कर लेता दिन  रैन।
कट जाता शुभ शाम ये,चित को मिलता चैन।

 बनकर दानव मत करो,रावण जस अट्हास।
हो सकता है दिन कभी,अपना भी परिहास।।

 आकर इस संसार में,भटक गया इंसान।
भूला बैठा नेक को,मन रखकर अभिमान।।

 रोज नई किरणों संग,लेकर आता धूप।
वंदन बारम्बार है, हे दिनपति सुरभूप।।

 समय बड़ा बलवान है,बदले सबकी चाल।
पल में हँसता आदमी,पल में रोता हाल।।

 सच्चा रखलो आचरण,बनकर मानव मीत।
देना लेना नित प्रीत को,यही जगत की रीत।।

बुधवार, 11 दिसंबर 2019

माथ नँवाऊँ

माँ तेरे चरणों में शीश झुकाऊँ
करूँ वंदना मैं तुझको मनाऊँ

तुम्ही जीवन मेरा सारा जहाँ
तेरी कृपा से माँ सरगम गाऊँ।

ध्येय पथ मेरा रुकने न पायें
सत्यपथ पर बलि बलि जाऊँ।

दुख पहाड़ हो या लाख बाधा
दुआ से कभी पग न डिगाऊँ।

तेरा लाल दाती माता सबकी
मंदमति मैय्या तुमको रिझाऊँ।

आस तोषन को तेरे दरश की
लक्ष्य पथ अपने साथ पाऊँ।

हल्बा समाज सारे तुझे ध्याये
संग मिलकर ध्वज लहराऊँ।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
बालोद, छत्तीसगढ़
11/12/19

गाय

गाय की दशा
११/१२/१९
गाय हमारी मातु है, जाने ये संसार।
फिर भी बूचड़ खान में, क्यूँ कटती लाचार।।
क्यूँ कटती लाचार, ध्यान इस पर दें सारे।
गौ हत्या हो बन्द, लगायें मिलकर नारे।
आज बचायें प्राण, डरी हैं जो बेचारी।
करलें रक्षा यत्न, मातु है गाय हमारी।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

साहित्य

कुण्डलियाँ 
*साहित्य*

जीवन का आधार है,चारों वेद पुराण।
गीता रामायण पढ़े,तृप्ति मिलेगी प्राण।।
तृप्ति मिलेगी प्राण,तभी उद्धार हमारा।
करिए सदा प्रचार, जहाँ साहित्य बिसारा।।
कह तोषन कविराज, ध्यान कर नित तन मन का।।
रखें इसे सम्हाल,सार है ये जीवन का।।

*विकृत पाठ*

रेखा माला घन जटा,दण्ड शिखा का पाठ।
ध्वज रथ मिलकर ये बने,विकृत पाठ हैं आठ।।
विकृत पाठ हैं आठ,संत मुनियों की बानी।
नहीं मिलेगी ठौर, धरा नभमंडल पानी।।
कह तोषन कविराय, दृश्य ये हमनें देखा।
अक्षर अक्षर भिन्न, जटा घन माला रेखा।।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
बालोद, छत्तीसगढ़

गाय का पालन

पालन पोषण गाय का,भूल गया इंसान।
गोद बिठाये घूमता,लेकर मानव श्वान।।
लेकर मानव श्वान,रौब है बड़े जताते।
गौमाता को भूल,श्वान को दूध पिलाते।।
कैसा है इंसान, दिखायें कैसे चालन।
होगा कैसे जान,गाय का लालन पालन।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
बालोद, छत्तीसगढ़

पवन प्रभाती

१०/१२/१९
*सुप्रभातम्*
पवन प्रभाती शुभ घड़ी,चिड़िया करती शोर।
दिनकर का है आगमन,नित प्रतिदिन की भोर।।
नित प्रतिदिन की भोर,नया हो जीवन अपना।
रघुवर का है साथ,सदा ही उनको जपना।।
कह तोषन कविराज,किरण है प्रतिपल आती।
देने नव संदेश,घड़ी शुभ पवन प्रभाती।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

अंतर जाल

माया अंतरजाल का,सिमट गया संसार।
सारा जग है हाथ में,किसका रहा विचार।।
किसका रहा विचार,समझ कोई समझावे।
एक पलक में ज्ञान,हाथ अपने आ जावे।।
कह तोषन कविराज, सुगम हमने हल पाया।
समझे इसका मान,जाल का अंतर माया।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
9617589667

मानवता

हास होती मानवता,जाग उठी दानवता,
कैसी ये विडंबना है,मेरे हिन्दुस्तान मे।

बेटी बहू जाए कहाँ,पुकार लगाये कहाँ,
घिरे हुये इत उत,कलयुगी हैवान में।

न्याय कुछ ऐसा मिले,हैवानों के पग हिले,
कुछ नहीं रहाअब,बातों के कृपाण में।

तोषन अब नही सहे ,मिलकर सब कहें,
लाओ कुछ अब नया,विधि के विधान में।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

घनाक्षरी

मनहरणघनाक्षरी /कवित्त छंद 

//आन बान शान देखो//

आन बान शान देखो,देश का निशान देखो,
लहर लहर करे,नीले आसमान में।
इसकी निराली बात,सबसे है यह खास,
वीरों की थाती मानों,बसा निगेबान में।
लाल बाल पाल भिड़े, आजादी के गीत लिये,
बन गुल जो ये खिले,मेरे बागबान में।
हमने आजादी पायी,तन मन हरषायी,
हुआ गणतंत्र अब,देखो हिन्दूस्थान में।

//माथ मैं नवाऊँ आज//

माथ मैं नवाऊं आज,जिनपे है हमें नाज़,
जय जय करता है,सारा हिन्दूस्थान है।
क्रांतिकारी बनकर,सुख दुःख तजकर,
मेरे हिन्दूस्थान को ये, बनाया महान है।
भित पट तुम खोलो,भारत की जय बोलो,
झूमे नाचे गाए गीत,खेत खलिहान है।
'तोषण' ये आज कहे, मिलकर सब रहे,
एकता के दीप जले,मिले परवाज़ है।

//चुपचाप झिन रहा//

चुप चाप झिन रहा,कुछु कहीं तहूँ कहा,
मनवा के बतिया ल,खोल तैं जुबान ले,
गोठ मोर सुनले तैं,थोर देख लहुट के,
तन झन छुट जाय,मोर ये परान ले.
दिल मा समाय तैहा,नँइ भूलों तोला मैहा,
तोर हँव दिवाना मैं,अपन तैं मान ले.
कहर बरपा न तैं,मोला तरसा न तैं
मोर मया ल पगली,थोरकुन मान ले.

अटल रहा है सदा

अटल रहा है सदा,दिल में बसा है सदा,
अटल रहेंगे सदा,पूरे हिंदुस्तान में.
बन के जगनायक,दीनों के ये सहायक,
फूल बन महके ये,सारे गुलिस्तान में.
देश के चिराग बने,देखो सीना ताने चले,
निकले ये शेर सम,भारत की शान में.
याद सदा आयेंगे वो,दिल में समायें हैं जो,
अटल बिहारी बसे,तन मन प्राण में.

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा,डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़
9617589667

मकड़जाल

चित्र चिंतन
11/12/19
=========
1.
मकड़ी जाल
तरूवर शाख पे--
बच्चे झूलते।
=========
2.
अंतर जाल
दुनिया में बिखरे--
सूर्य किरणें।
=========
3.
जाल फैलाये
मकड़ी निहारती--
कीट पतंगा।
==========
4.
उलझी मक्खी
मकड़ी के जाल में--
ओस की बुँदे।
==========
5.
मकड़जाल
बुनते न थकती--
सीखें सबक।
==========
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
बालोद, छत्तीसगढ़

मेरा देश

*मेरा देश*
*दोहा*
*9/12/19*
भारत मेरा देश है,सकल गुणों की खान।
ऋषि मुनि के वेश में,करते लाख बखान।।

रंगीला मेरा देश ये,सतरंगी है फाग।
समता ममता है भरा,बहे प्रेम अनुराग।।

राम कृष्ण की ये धरा,बहती गंगा धार।
मर्यादा का पाठ है,गीता की बौछार।।

राजगुरू सुखदेव ने,माना अपनी जान।
त्यागे अपने प्राण को,सदा बढ़ाया मान।।

तेरे मेरे के फेर में,बँटे नहीं इन्सान।
अपना जाने देश को,होगा तभी महान।। 


तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

मकडज़ाल

बालमन की कविता का प्रयास
मकड़ी और जाल

मकड़ी रानी मकड़ी रानी।
अजब गजब तेरी कहानी।
कभी पेड़ में कभी घरों में,
काटती रहती जिन्दगानी।।१।।


लालच में आते कीट पतंग।
भिन्न भिन्न और रंग विरंग।
भोजन थाल स्वयं सजाती,
बड़ी निराली है तेरी प्रसंग।।२।।


काल  को नहीं हो जानती।
करती रहती हो जो ठानती।
सीख देती दुनिया को सारी,
हार कभी नहीं तुम मानती।।३।।


नित योजना स्वयँ गुनती।
कहाँ किसी की हो सुनती।
मारे कोई या सताये कोई,
जाला प्रतिदिन हो बुनती।।४।।


जीवन बड़ी तेरी न्यारी है।
फिर भी बनी तू बेचारी है।
महाराणा है तुझसे सीखा,
फिर करी  सेना तैयारी है।।५।।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

रविवार, 8 दिसंबर 2019

गीता ज्ञान 2

तेरा मेरा कुछ नहीं, जाए भी न कुछ कहीं,
समर भूमि में कान्हा,गीता जो सुनाते हैं।

करम मे ध्यान रख,धरम महान रख,
बिना कोई करम के,फल नहीं पाते हैं।

नहीं कोई छोटा बड़ा,किस बात पे है अड़ा,
छोड़ सब मोह माया,कमान उठाते हैं।

मुझसे ही पैदा होते,मुझमें ही आके खोते,
गीता ज्ञान अर्जुन को,कृष्ण जी बताते हैं। 

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

गीता ज्ञान 1


आ जाओ हे प्यारे कान्हा, करके कोई बहाना,
भारत की धरती ये,तुझको बुलाती है।

दे जा वही गीता ज्ञान,फिर हो पवित्र प्राण,
कोटिक कलुष भरे,दुनिया सताती है।

द्रोपदी की लाज रखी,यही आस मन जगी,
मिलकर बेटियाँ ये,पुकार लगाती है।

शंखनाद कर देते,सारी पीड़ा हर लेते,
गौमाता निहारती है,याद में रंभाती है।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

बुधवार, 27 नवंबर 2019

जहरीली धुआँ


दिनांक :-२७/११/१९
विषय :-प्रदत्त चित्र आधारित रचना
विधा :-कुण्डलियाँ

निकले जहरीली धुआँ,व्याकुल है संसार।
चारो दिक में चिमनियाँ,करते हाहाकार।।
करते हाहाकार, व्योम में बनकर दानव।
मुश्किल में है प्राण,पेड़ के हो चाहे मानव।।
कह तोषन कविराज, राह है बड़ी कटीली।
घटे परत ओजोन,धुआँ निकले जहरीली।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

चिमनी

दिनांक २७/११/१९
चित्र आधारित रचना
विधा कुण्डलिनी

उगले चिमनी है धुआँ,फैले चारो ओर।
नील गगन में लालिमा,मिले नहीं अब शोर।
मिले नहीं अब शोर,कालिमा जब है छाया।
कब होगी ये भोर,जान पे बन ये आया।
कह तोषन कविराज, तनिक तो बाता सुनले।
बन्द करो सरकार, धुआँ है चिमनी उगले।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

मंगलवार, 26 नवंबर 2019

राजनीति

राजनीति के फेर में,चलही बहुते दाँव।
जनता चुनही जान के ,लड़हूँ महूँ चुनाव।।
लड़हूँ महूँ चुनाव,शौक मोरो जागत हे।
मिलही मोला जीत,देख के अइसे लागत हे।।
माँगे तोषन वोट,मिले आशीष ढेर में।
बाँटव कभू न नोट, राजनीति के फेर में।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

नदी

समीक्षार्थ
दिनांक:-26/11/19
विषय :-नदी का संरक्षण
विधा :-कुण्डलिनी

नदियाँ गन्दी हो रही,हम है जिम्मेदार।
खुद ही में जब दोष है,करते क्या सरकार।।
करते क्या सरकार,नदी है अब आफत में।
रक्षण की है बात,योजना की लागत में।
कह तोषन कविराज, भूलकर अपनी कमियाँ।
सरिता माता मान,सभी सिरजाओ नदियाँ।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

रविवार, 24 नवंबर 2019

बाल श्रम

घर मे हैं कुछ नही,पढ़ने की सुध नहीं,
भोर से है निकले जो,रोटी की जुगाड़ में।

होटल हो चाहे बासा,रोजी की है इक आशा,
इत उत डिब्बा बीने,बेचें है कबाड़ में।

मारे है गरीबी जिन्हें,बोलो भला कैसे जिये,
पाठशाला जाते नहीं, झाँके है किवाड़ में।

तोषन है गरीब मेरे,फूटे है नसीब तेरे,
बाल होके काज करे,दिल्ली क्या मेवाड़ में।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

गौ रक्षा


गौ रक्षा

गौ रक्षा की बात पे,बन जा साथी ढाल।
माता अपनी कह रही,जागो मेरे लाल।।
जागो मेरे लाल,समय है ऐसा आया।
करती गायें आह,कहर है कैसा छाया।।
कह तोषन कविराज, नया हो भारत नक्शा।
साथी आओ आज,करें मिल गौ  की रक्षा।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

गौरक्षा

दिनांक:-24/11/19
विषय:- गौरक्षा
विधा :-कुण्डलिनी

कब होगी साकार ये,गौ रक्षा की बात।
दाँव पेच में रह गयी,मिले कहाँ सौगात।।
मिले कहाँ सौगात,आस में लटकी सपने।
कितनी मिलती गाय,देख लो सब घर अपने।।
कह तोषन कविराज,गाय गुण गाते जोगी।
चिन्ता का है विषय,गाय कब रक्षित होगी।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

मंहगाई

दिनांक:-24/11/19
विषय:-मंहगाई
विधा:-कुण्डलिनी

देख मंहगाई यहाँ,मचा रही है लूट।
हाय हाय जनता करे,सबके छक्के छूट।।
सबके छक्के छूट,रहे मन को मार यहाँ।
दुखी रहे इन्सान,कहे हैं अब जिये कहाँ।
कह तोषन कविराज,प्रभो मेरे  कन्हाई।
मचती हाहाकार,यहाँ देख मंहगाई।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

अंडा


अंडा

अंडा सोया मिल रहा,बच्चे नाचे झूम।
सरकारी आदेश है,मचा रही है धूम।।
मचा रही है धूम,आस्तिक मन कतरावे।
कहाँ फँसे है आन,जरा भी रास न आवे।।
कह तोषन कविराज,फाँस ये कैसा फंडा।
आधे मन को मार,आध है खाये अंडा।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

शिक्षक

शिक्षक

शिक्षक

बनकर  शिक्षक  आज  जो , बाँट  रहे  है ज्ञान।
महिमा  इनकी  है  बड़ी , गाते  सन्त  सुजान ।।
गाते  सन्त  सुजान , दोष सब  दूर  हटाते ।
गुरुवर  है  भगवान ,  ब्रह्म  भी  शिव भी  गाते ।।
कह  तोषन  कविराज , वृक्ष  है सीधा  तनकर ।
धन्य  धन्य  यह  प्राण ,खड़े  है शिक्षक  बनकर।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

सबके घर दीया बरे,



तोषण के कुण्डलिनी

सबके घर दीया बरे,जगमग हे संसार।
कमलापति के संगिनी,देवय खुशी अपार।।
देवय खुशी अपार,साथ में झूमव नाचव ।
राग द्वेष सब टार,मया के गाना गावव।।
सुन तोषण के बात,गोठ हे जब्बर कबके।
राखव मीठ जबान,मिले हे ममता सबके।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा,डौंडी लोहारा

९६१७५८९६६७

गुरुवार, 21 नवंबर 2019

स्वच्छता अभियान

दिनांक:-२१/११/१९
विधा :- चौपाई
विषय :-स्वच्छता अभियान

है आन चढ़ा परवान बड़ा।
सारे लेकर अभियान खड़ा।
हर घर साफ सफाई होगी।
नहीं  दिखेगा  कोई  रोगी।



स्वच्छ रहेगा  भारत अपना।
बापू का था बस यह सपना।
सभी  निरोगी  रहे   सयाना।
स्वच्छ  रहे  भारत ने ठाना।



हाथ  सफाई  करलो भाई।
भौजी   भैया   बापू  माई।
घर आँगन जब स्वच्छ रहेगा।
मच्छर  हमसे  विदा  कहेगा।

अपना भारत सबसे प्यारा।
जग मे अच्छा लगता न्यारा।
आओ मिलकर हाथ बढ़ायें।
अपना भारत स्वच्छ बनायें।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा,डौंडी लोहारा

पालीथीन


देखो पॉलीथीन के , बढ़ी निराली बात।
दुष्प्रभाव से जान लो  , खानी पड़ती मात।।
खानी पड़ती मात , जान कर चुप्पी साधा.
तड़पे पर्यावरण , धरा जो पनपी बाधा।
कह तोषन कविराज,देख के लाखों लेखों।
त्यागो पालीथीन,बन्द अब करके देखो।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

मोबाइल

मोबाइल

मोबाइल जो हाथ में ,आते खूब विचार।
फँसते अंतरजाल जो,मिले अलग संसार।।
मिले अलग संसार, भरे है सार खजाना।
सदुपयोग लो जान,दिशा है देती नाना।
कह तोषन कविराज,चेहरे आती स्माइल।
छोट बड़े मत जान,हाथ में है मोबाइल।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

पॉलीथीन

*पॉलीथीन*

पॉलीथीन    नहीं    उपयोगी।
कहते   फिरते   लाखों योगी।
काम  कभी  ये साथ न लावें।
धरती को   खुशहाल  बनावें।

कागद    जानी   गायें   खाती।
अल्प समय ही वह मर जाती।
चिन्ता व्यापक सब जग जाना।
करे जतन अब बहु विधि नाना।

बन्जर  अपनी  धरती  होती।
पर्यावरण   की  आँखें  रोती।
तकलीफे  ये  लाखों  सहती।
बन्द करे  अब धरती कहती।

पॉलीथीन नही है छड़ती।
ढेरों  पहाड़  टापू  बनती।
करे जरा विचार ये आयें।
पॉलीथीन  मुक्त हो जायें।

भारत  होगा  सुन्दर  अपना।
हो हम सबका अब ये सपना। 
मिलकर आओ कदम बढ़ाये।
प्रदुषण को  अब दूर भगाये।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७

नशा



  नशा 
*******
सुनो नशे की लत बुरी , गंदी आदत छोड़ ।
लुट जाता परिवार है , करलो इसका तोड़ ।। 
करलो इसका तोड़ , खाक में सब मिल जाता ।
मान रहे ना प्यार , नहीं जग कोई भाता ।।
सबकी लगती हाय , इसे मन में आज गुनो।
कहना सबकी मान,सदा हिय की बात सुनो ।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७

बुधवार, 20 नवंबर 2019

सूरज बाँटे रौशनी

सुधारोपरांत

सूरज बाँटे रौशनी , जगमग है संसार।
चलना जिसका काम है , करे सदा उपकार।।
करे सदा उपकार , वही है खुशियाँ  पाता।
मिलकर रहना सार , यही है निर्मल नाता।।
बढ़ते रहना राह , फूल हो चाहे काँटे।
प्रेम दया सद्भाव , नित्य ही खुशियाँ बाँटे।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

माटी ले बने हँव



माटी ले  बने हँव  संगी, माटी मा जड़े हँव।
कभू किसान त कभू, जवान बन खड़े हँव।
छल कपट ले तारे बर,सत के दिया बारे बर,
बन के लेखनी लड़े बर तोषण तीर अड़े हँव।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा

सोमवार, 18 नवंबर 2019

खोपा के गजरा

समीक्षा कर देतेव एक प्रयास हे

सरसी छंद

खोपा के गजरा मन भावय,पवन करत हे सोर।
नदिया नरवा देवय ताना,झूमय नाचय मोर।।1।।

बेनी झूलय कनिहा डोलय,महके गजरा फूल।
कर डारे हे बइहा पगला,लहरे अचरा तोर।।2।।

दिन रतिहा सूरतिया झूलय,आँखी आँखी कोर।
मर जाहूँ किरिया हे तोला,बाँधे मयारु डोर।।3।।

मुच-मुच हाँसी मोला मोहे,कोयल जइसन गोठ।
भाथे तोला देखे- देखे,लेवय हियन हिलोर।।4।।

करले जोरा अब तँय गोरी,ले के आहूँ कार।
ले जाहूँ भँवरा के तोला,सजले धजले थोर।।5।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

शनिवार, 16 नवंबर 2019

बिलासपुर यात्रा

जय श्री राम
बिलासपुर का है सफर,मित्रों का है साथ।
सदा रहे रघुनाथ के,मुझ तोषण पर हाथ।।

जय श्री राम

शनिवार, 9 नवंबर 2019

राम राज


_//धनगंइहा के दोहे सप्तक//_

राम राज की कल्पना, आज हुई साकार।
न्याय चक्र के साथ में,नमन करे सरकार।।1।।

मेरे रघुवर राम की,बनेगी सुंदर ठाँव।
दर्शन करने आइये, मिलकर पूरा गाँव।।2।।

हुआ विजय आज जो,हर्षित है संसार।
दिपावली लौटी फिर से,करें राम जयकार।।3।।

दीप जले उजियार घर,भारत वर्ष महान।
होगा नव निर्माण अब,कहते संत सुजान।।4।।

राम राज की बात सुन,हुए नर नार।
जय जय सीताराम के,गुंजे जय जयकार।।5।।

मोदी के सरकार में,कारज हुए अनेक।
शिखर सफलता पग चुमें,चाह एक से एक।।6।।

हिन्दू मुस्लिम एक हो,तोषण का संदेश।
होकर सब एक जुट,सकल मिटाएँ क्लेश।।7।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
९६१७५८९६६७

All rights reserved@writter Toshan Kumar Churendra 

शुक्रवार, 8 नवंबर 2019

मधुर साहित्य

_*मधुर साहित्य*_

मधुर  _मधुर साहित्य_ अपनी,
मधुर साहित्य  अपनी मधुर।
बढ़ने और बढ़ाने के खातिर,
भरलें अब रग-रग में सरूर।

_आकाश_ की छाया के नीचे,
लोहारा बना जो सुंदर ठाँव।
साहित्यकार हैं जुड़े अनेक,
कितनें शहर व कितनें गाँव।

रखते सबको जो एक समान,
मुखिया _कन्हैया_ की अगुवाई।
_अरूणाभ_ करते हैं आवभगत,
_धनगंइहा_ जी की जोर लगाई।

कोष मधुर  को  देखे _पीताम्बर_,
अंकुर फूटा हुआ जो नव _उदय_।
खिला _गुलाब_ है अब अपने मग,
नित प्रतिदिन होता रहा सूर्योदय।

_एक्य होकर सब साथ चलें हम,_
_मधुर मधुर परिवार बनें अपना।_
_नीलगगन पर चमके सूर्य बनकर,_
_हम सबका हो अब एक सपना।_

★ _रचना_  ★
_तोषण कुमार चुरेन्द्र_
_धनगंइहा, डौंडी लोहारा_
_9617589667_

तोर पैरी के रूनझून

गोरी रे तोर पइरी ह रूनझून बाजे ना
मया म रानी दिल झूमझूम नाचे ना
मोर दिल म समाये,मोला दिवाना बनाये
सोये निंदिया म तैह बही सपना देखाये
गोरी तोर पइरी ह...

चढ़ती जवानी तोर उमर सोला साल हे
होंठ गुलाबी तोर गोरी गोरी गाल हे
चंदा बरन हे चेहरा लागत कमाल हे
हांसी ले फूल झरथे हिरनी कस चाल हे
तोर आंखी के काजर घुमरे करिया बादर
गिरथे पानी बूंद बूंद ले बन जाथे रे सागर
गोरी तोर पइरी ह...

आजा मोर बंइहा म तोला मैंह प्यार देहूं
अपन बनाके तोला जिनगी संवार देहूं
पीरीत के छंइहा रही जइसे घर दुवार देहूं
बनके रहिबो राजा रानी अइसे संसार देहूं
गाबो मया के गीत ल बांधे मया पीरीत ल
सुख दुख ल सहिबो संगे दुनिया के रीत ल
गोरी तोर पइरी ह...

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा
9617589667

सबके घर दीया बरे



तोषण के कुण्डलिनी

सबके घर दीया बरे,जगमग हे संसार।
कमलापति के संगिनी,देवय खुशी अपार।।
देवय खुशी अपार,साथ में झूमव नाचव ।
राग द्वेष सब टार,मया के गाना गावव।।
सुन तोषण के बात,गोठ हे जब्बर कबके।
राखव मीठ जबान,मिले हे ममता सबके।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा,डौंडी लोहारा

९६१७५८९६६७

बुधवार, 6 नवंबर 2019

खोपा के गजरा

समीक्षार्थ

सरसी छंद

खोपा के गजरा मन भावय,पवन करत हे सोर।
नदिया नरवा देवय ताना,झूमय नाचय मोर।।1।।

बेनी झूलय कनिहा डोलय,महके गजरा फूल।
कर डारे हे बइहा पगला,लहरे अचरा तोर।।2।।

झूलत रहिथे तोरे चेहरा,आँखी आँखी तीर।
मर जाहूँ किरिया हे तोला,बाँधे पीरित डोर।।3।।

मुच मुच हाँसी मोला मोहे,कोयल जइसन गोठ।
भाथे तोला देखे- देखे,मारे हिय हिलोर।।4।।

करले जोरा अब तै गोरी,ले के आहूँ कार।
ले जाहूँ भँवरा के तोला,कर लेबे सिंगार चोर।।5।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

गीत राम के गावव


समीक्षार्थ

सार छंद

गीत राम के गावव संगी,पियो राम के प्याला।
उठत राम के सुरता आथे,मोर राम रखवाला।।
राम बताही सबला रद्दा,चरन माँथ टेकावव।
बिना राम जिनगी हे बिरथा,नेति नेति गुन गावव।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा,डौंडी लोहारा


सोमवार, 4 नवंबर 2019

करमा गीत

समीक्षार्थ
करमा गीत
*मुखड़ा*
‪#‎लडका‬
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
‪#‎लड़की‬
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
*अंतरा 1*
‪#‎लड़का‬
धान लुए हंसिया  गजब उड़ाय कंशी
सुध मा तोर खोके मन बजावय बंशी
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
*अंतरा 2*
#लड़की
आए ला सावन रिमझिम परे फोहार
बन बन किजरौं मैं पारत हँव गोहार
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़का
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
*अंतरा 3*
#लडका
सुघ्घर लागे रानी हांसी तोर ठिठोली
कजरेली नैना ले मारे मया गोली
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
#लड़की
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
*अंतरा 4*
#लड़की
धिक धिनिंधा मादर बाजे करमा के ताल
तोर मया म होगेंव बही हाल हे बेहाल
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
#लड़का
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
*संघरा*
‪#‎लड़का_लड़की‬
करमा नचाहूं तोला ओ आना मादर के थाप मा
करमा नचादे मोला गा आना मादर के थाप मा
गीत ‪
तोषण‬ कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा
डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़ ९६१७५८९६६७


राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...