गुरुवार, 18 मई 2017

बेटी

*बेटी*

*बेटी हंव  छत्तीसगढ के*
*जग म  अलख  जगाहूँ*
*दाई ददा के देखे सपना*
*एक  दिन मैं  सिरजाहूँ*

*गरब करही मोर देस जब*
*स्व देस खातिर मर जाहूँ*
*आगु आही जेन बैरी मोर*
*मैं सोजहे पताल पहुचाहूँ*

*रोथे जेन हर बेटी जनम म*
*ओ दाई ददा ल धिक्कार हे*
*बेटा बरोबर राखव महूँ ला*
*जीए  के मोरो अधिकार हे*

*बेटा बनाथे ददा ल भिखारी*
*बेटी ह बनाथे महादानी गा*
*बात अगर ते समज जबे त*
*कहिलाबे मुनि तै ग्यानी गा*

*बेटी मैं तारौं दुठन कुल ला*
*बगिया कस घर संसार गा*
*ददा दाई के बड़ मया पाथों*
*ससुर सास के दुलार गा*

*मैं बेटी अंव रुप अब्बड़ हे*
*दाई भौजी  देरानी  काकी*
*मोसी फुफु दीदी कस मैंहा*
*बहिनी बनके बाँधव राखी*

*बेटा बेटी हे एक समान गा*
*झन पालव गा मन में भरम*
*बेटी बचाना हे बेटी पढ़ाना*
*सबके बने इही धरम करम*

©®
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

सोमवार, 8 मई 2017

मानवता

मानवता के मन मन्दिर में
  ज्योति जला दिव्य ग्यान की
    आन  पड़ी है  आज जरूरत
      मानवता   की   पहचान  की
       आडम्बर  के  पहने चोले सब
         भ्रमण  कर  रहें  हैं  लोग यहाँ
           गुंजन होनी  चाहिए  भूमि पर
             श्री कृष्ण के गीता बखान की

तोषण कुमार चुरेन्द्र

सीख

💐💐💐💐💐💐💐
बढ़िहा बढ़िहा सीख हे ,देवत सबला ग्यान .
💐💐💐💐💐💐💐
आवव सबला सीख के ,करबो एखर मान...
💐💐💐💐💐💐💐

दारू

बिगड़े ल सुधारत नंइहे बने दिन के गोठ करथे
बेंचत हे खुदे दारू खिसा अपन पोठ करथे
बेचइय्या ल काय चिंता काकर घर के फिक्कर
पियइय्या के संगे तोषण लइका सुवारी मरथे
तोषण कुमार चुरेन्द्र

रविवार, 7 मई 2017

फना

फऩा होने चला हूँ आज फिर माँ के कदमों तले
होगी रहमत खुदा की फिर आऊंगा माँ की गोद में
तोषण कुमार चुरेन्द्र

रूख़सत...

हो जाऊँ जो रूखसत तेरी दुनियाँ से "तोषण"
गुजारिश़ है समेट लेना अपनी यादों के पन्नों में
तोषण कुमार चुरेन्द्र

चल पड़ा हूँ...

चल पड़ा हूँ उस राह मैं जहाँ किसी के पैर के निशाँ नहीं है

ढुँढ रहा हाथों मे चिराग लिये खबर मुझे है वो यहीं कहीं है

रहे धरती या आकाश में या खुशबूओं में छिपे फूलों की,

जेहन में बसी है उसकी यादें मुझको राह दिखाती सही है..

तोषण कुमार चुरेन्द्र ९६१७५८९६६७

बुधवार, 3 मई 2017

हरदी के रंग

दुलहिन के  अंग-अंग रंगत हे कांचा हरदी के रंग
भंवरा के जाही पिया घर छोंड़ सब सखी के संग
सपना...सजावत आँखी म पुलकावत हे तन-मन
दाई ददा ल...छोंड़े के दुख पिया मिलन के उमंग

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 26 अप्रैल 2017

मरना होगा

जिंदा गर रहना है साहब तो मरना होगा"
याद करें दुनिया ऐसा कुछ करना होगा"
महान होता नहीं कोई यूँ ही जहान में"
महानता पाने काज महान करना होगा"
तोषण कुमार तोषण कुमार चुरेन्द्र

फना...

फना... होने चले हम....उनके प्यार पर
मजाक...ना उड़ाना कभी..इस हार पर
दो साहिलों को...जोड़ा है. हमने तोषण
दूर जो रहे जमाने से कभी मझधार पर
तोषण कुमार चुरेन्द्र

कविता

निकल  धरिणी के गर्भ से  बन सरिता वो बहती है ।
कलकल छलछल करती हुई वअग्रसर वो रहती है ।
गहन तिमिर से मुझे निकालो दुनियाँ के गुलजार में ,
अंतर्निहित दबी  प्रतिभा मेरी  कविता वो कहती है ।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र  ९६१७५८९६६७

तड़प रही है

तड़प रही है कब से देखो मेरी हाथ तलवार लिये
छोड़ूं ना अब नक्सलियों को तीव्र ललकार लिये
बहुत हो चुका अत्याचार अब नामुराद दरिंदों का
छत्तीसगढ का मै लाल बरसूँगा बस फुंकार लिये
तोषण कुमार चुरेन्द्र

करले जोरा

कोसिस कर गढ़ना गढ़़ हमु मनला बढ़ा तंहूँ बढ़
########################
करले  जोरा  जाय के, भजले तैहा राम।
काया माया सब रही, पाले तै विसराम।।
@@@@@@@@@@@@@@@@@
ध्येय सबन के एक हो, पावव सबले ग्यान।
ग्यान बटत हे रोज के,आवव करलव पान ।।
#########################
तोषण कुमार चुरेन्द्र

नहीं जानते

नहीं जानते दुनिया वाले हमें कसूर हमारा नहीं है
नही है कोई गम जो नाम सूची मे हमारा नहीं है
दिया है जीवन हमे रब ने बड़े नसीबों से तोषण
देश पे मिटना भला किसको जहाँ में प्यारा नहीं है
तोषण कुमार चुरेन्द्र

मंगलवार, 25 अप्रैल 2017

महतारी के पतिया

छत्तीसगढ के जम्मो लइका सियान
जवान ल
*छत्तीसगढ महतारी के पतिया*
💐💐💐💐💐💐
कका रचना मोरो पढ़ लेतेव
बिचार थोरिकिन  कर लेतेव
👏👏👏👏👏👏
दाई के गोदी म बेटा मरत हे
कलहर  के  गोहार  करत हे
😭😭😭😭😭😭
सुन छत्तीसगढिहा बेटा मोर
करव  नही गा  काबर  शोर
😳😳😳😳😳😳
देखत रहू कब तक अइसने
पहिली ले वइसनेके वइसने
🤺🤺🤺🤺🤺🤺
नक्सली ल जो धुर्रा चटावव
मोर दुध के करजा चुकावव
🏋‍♀🏋‍♀🏋‍♀🏋‍♀🏋‍♀🏋‍♀
जेन असल हे मोर औलाद रे
बनके बरस तै जा फौलाद रे
🤺🤺🤺🤺🤺🤺
लेना हे सबके इंतकाम तोला
दे बैरी के मुड़ी काटके मोला
⚔⚔⚔⚔⚔⚔
मरना हे तोला सौ ल मार के
छत्तीसगढ ला बने संवार के
🖋🖋🖋🖋🖋🖋
तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७

रविवार, 23 अप्रैल 2017

बेटी

एक दिन मोर अंगना म किलकारी मारत ,चिरइ सही चहकत ,कोयली बरोबर कुहुकत,मोर बेटी ह खुशी के पेटारा धरके अइस ,जेकर गोड़ के माड़त मोर घर म दुख दरिदरी बिपत्ति जतिक रिहिस सब ह हवा के बड़ोड़ा सही उड़ागे,काबर सियान मन कथे बेटी ह साकछात माता लछमी के सरुप हरे ओकर घर म आय से घर के आव भाव बदल जथे वइसने मोरो बदल गे। तितली बरोबर एती ले ओती घर के चारो कोती गिंजरे ।हंसी ठिठोली करत अपन तोतरी भाखा म मोला जब ददा कहे। त मोर अंतस ल अजब सकुन मिले करेजा ल ठंडक मिले।जेन बेटी ह पेट के बल घसलत माड़ी के सहारा मड़ीयात ठुमुक ठुमुक रेगत कइसे बड़े होगे ,दिन कइसे निकलिस पताच निचलिस ।आज मोला बड़ दुख होवत जेन बेटी ल ननपन ले पालत पोसत बड़े करेंव आज उही अपन करेजा के टुकड़ा ल अपन तन ले अलग करके ओला अपन लेे कोस दुरिहा दुसर के डेहरी म बिदा करत हंव। अब कोन मोला चाय पानी बासी पेज बर हांक पार ही---

"आ ददा एदे चाय ,एदे पानी ,एदे बासी।"

तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 19 अप्रैल 2017

गंगा मंइय्या

तोर मया के बरसा दाई झुमर झुमर के बरसय।
आस पूरो सबके माता झन कोन्हो ह तरसय।।
जल भीतरी ले जनम धरे गंगा मंइया कहाय।
नर नारी सब भक्तन मन के आस ल तै पुराय।।

सोमवार, 17 अप्रैल 2017

मया के चिनहा

तोर मया के चिनहा ल
राखे रहूं सजाके।
मोर हिरदे के कुरिया म
ठोहूं तारा लगाके।

अगोरा म तोर बइठे हावंव
रद्दा म नैना गड़ाके।
कतिक दिन ले देखहूं मैंहा
लहूं चूरी पहिराके।।

मोर मया के कुरिया ल
कब तै अंजोर करबे।
बिन रंग मोर दुनिया ल
कब सतरंगी रंग भरबे।।

मोरो सुध तै लेले पगली
बइहा बरन मोर हाल हे।
बिन तोर जिनगी बिताना
मोर जी के जंजाल हे।

मया के चिनहा देके तैहा
जादा काबर तड़पात हस।
अंगना मोर आहूं कहिके
काबर टुंहू देखात हस।।

मर जहूं तोर सुधरई मा
जादा झन बेकरार कर।
कर मोर संग बिहाव पगली
जिनगी के मोर उद्धार कर।।

शनिवार, 15 अप्रैल 2017

तलबगार

टुटे दिल का कोई खरीद दार नहीं होता

आँखों में नमी ,इश़्के  गुलज़ार नही होता

होती है तन्हाई का मंजर और यादों का समंदर

चाह रह जाती अधूरी कोई तलबगार नहीं होता

गुरुवार, 13 अप्रैल 2017

किसको

दिल के हालात कहो सुनाऊं किसको
विरह की वेदना दिखाऊं किसको
ये जो शहर हैं वो मुर्दों का "तोषण"
दिन के उजालो में भला जगाऊं किसको..

तन्हाई

मेरी तन्हाई को देखकर हंस रही थी वो इस कदर

आँसू पोछने भी नहीं आई कमबख़्त अकेला जानकर....

दिल

पी लेता हूँ शराब
जाकर मयखाने में

उनकी यादों को
दिल से मिटाने को

कमबख़्त है उनकी यादें
मिटी नहीं इस दिल से

याद मिटाते इक दिन ये
कमज़र्फ दिल ही मिट गया....

बिहाव

का बतांव साहब

बर बिहाव के सिजन चलत हे
बाजा घलक नंगतेहे ददकत हे
इंकर बाजा गाजा चक्कर मजी
का बताव नींद घलो नंइ परत हे

फना

लग गई नजर किसकी,बसंत बहार पर/
गुल नहीं कंटक खिलती,अब गुलजार पर/
बंद करें युद्ध लड़ना,अमन रहे जमीं
कर फना जनम अपना,पुनित संसार  पर

तोषण कुमार चुरेन्द्र

दिल

भूले तो जाते उसे है जो दिमाग में रहते है
आप तो वो शख़्स है हमारे दिल में रहते है

पैमाने में

जिंदगी बीत गई मयखानें में
कोई बदलाव न आया जमाने में
बची है ही नहीं अब जिस्मो जान में
रोज पीते हे लहू पर लहू को पैमाने मे

शनिवार, 8 अप्रैल 2017

लेने के देने की

#लेने के #देने की

खा-खाकर ठोकरें बड़ा हुआ हूँ

आदत नही मेरी ठोकर देने की,

फूल बरसा ,काँटें बिछा राहों पर

नसीब समझ आदत है लेने की,

मिलेगा यहीं कहीं जाएगा नहीं

करदे भले देरी रब मुझे देने की,,

बाज़ न आऊँ आदत से अपनी

चाहे पड़ जाए लेने के देने की,,

तोषण कुमार चुरेन्द्र
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सोमवार, 3 अप्रैल 2017

बाटल अदधी अउ चपटी म

घुमेबर चलदेंव मेंह एकदिन गउ दारु भट्ठी म
का मोहनी डराय रथे बाटल अदधी अउ चपटी म

देखेव जाके जब अनर बनर
पियत बइठे सब जतर कतर
चांटत रहे नुन पीये के हे धुन
चाबवत चना ल कटर कटर

चलायके नंइहे सकति फेर चड़के जावै फटफट्टी म
का मोहनी डराय रथे बाटल अदधी अउ चपटी म

सुआरी लइका के मोह नंइहे
दानापानी के थोर संसो नंइहे
लगेहे लत इंहां पियकड़ु के
कोनों चाहे अब कहीं कइहे

पीयेबर पइसा निही त पइसा भिड़ाय चोरकट्टी म
का मोहनी डराय रथे बाटल अदधी अउ चपटी म

हर पियकड़ु जेब म अधार धरथे
पइसा नी रही जोगड़ कोनो करथे
संगवारी खोजथे पियकड़ु अपन
जीते जीयत पीही पीते पीयत मरथे

अलप समय पियइया ल जात देखेव मरघट्टी म
का मोहनी डराय रथे बाटल अदधी चपटी म

तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७
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शुक्रवार, 31 मार्च 2017

राम राम...

राम राम जी संगीं हो,लेव राम के नांव..
काज बने गा भोर के,महूं परत हंव पांव...

हांथ जोड़ के विनय हे ,धरंव चरन मा सीस..
मोर सदा मन लगे रत,परम पिता जगदीस...

तोषण कुमार चुरेन्द्र

सीख


पाके  तोरे  सीख  ला, देहुं  सदा  मैं ध्यान.
करहुं  निरंतर  चेष्टा,  लेहुं  मरत  ले  ग्यान..
लेहुं मरत ले ग्यान, भूल ही  नही जियत ले.
हावंव मतिमंद सखा,पड़े जी नीर पियत ले..
सुन  तोषण के बात, रचे छंद ग्यान बुझाके.
गलती  होही   सही,  सीख  ला  तोरे  पाके..
तोषण कुमार चुरेन्द्र

दीनानाथ...

मेरा आशीर्वाद सदा तेरे साथ है
कर्म करना ही सदा तेरे हाथ है
मिलता वही रहता जो नसीब में
हरने वाला दुख वो दीना नाथ है
तोषण कुमार चुरेन्द्र ९६१७५८९६६७

गुरुवार, 30 मार्च 2017

नवदिन राती

मोर शीतला के दरबार में बरे जोत दिन राती
सरधा के करसा मड़ाएंव भक्ति जलाएंव बाती
कोनों मनावय जात्रा करके उंनडत जावय कोनों
सेवा बजावंव माता के मैं जागंव नवदिन राती
तोषण कुमार चुरेन्द्र ९६१७५८९६६७

नवदिन राती

मोर शीतला के दरबार में बरे जोत दिन राती
सरधा के करसा मड़ाएंव भक्ति जलाएंव बाती
कोनों मनावय जात्रा करके उंनडत जावय कोनों
सेवा बजावंव माता के मैं जागंव नवदिन राती
तोषण कुमार चुरेन्द्र ९६१७५८९६६७

आपको...

आपसे ही पाया हमने दे रहे हैं आपको
नही कुछ है पास जो दे सके हैं आपको
यादें सिर्फ है पास मेरे उन बीते लम्हो की
आते हैं याद आप याद मैं आऊँ आपको

तोषण कुमार चुरेन्द्र

मोहब्बत...

सिला  भी  हमें  अज़ीब मिला  तेरी मोहब्बत का
दागदार नही हम लगाओ न इल्ज़ाम तोहम्मत का
गुनाह किये  जो तुमसे  इकरार कर बैठे "तोषण"
होठों पे आता नहीं अब नाम कभी  मोहब्बत का
तोषण कुमार चुरेन्द्र

बुधवार, 29 मार्च 2017

छत्तीसगढ मोर मान रे...

छत्तीसढ़ मोर मान रे..

मैं टुरा छत्तीसगढिहा छत्तीसगढ मोर मान रे
एखर खातिर मोर संगी दे देहूं जान रे

कोरा जेखर खेलेंव कुदेव छंइहा जेखर बाढेंव
गाएंव गाना पारेंव हाना कोयली कुहूकी पारेंव
हरियर हरियर दाई के अचरा सोनहा कस धान रे
एखर खातिर मोर संगी दे देहूं जान रे

चंदर पुरहिन बिलई माई डोंगड़गढ़ बमलाई
रतनपुरहिन माहामाई संबलपुर समलाई
दंतेवड़हिन दंतेसिरी जग बढावय मान रे
एखर खातिर मोर संगी दे देहूं जान रे

बीर नरायेन के जनमभूमि श्रृंगी  के गाँव हे
भगत माता कर्मा जिंहाव शबरी के ठाँव हे
बरसे नवधा भक्ति जिंहा राम करथे बखान रे
एखर खातिर मोर संगी दे देहूं जान रे

भेलई कोरबा दल्ली राजहरा  सबके आस पुरोवत हे
देस परदेस ल भाईचारा म तार ले तार जुड़ोंवत हे
अमर होगे मैतरी गार्डन भारत बधिन मितान रे
एखर खातिर मोर संगी दे देहूं जान रे

जेकर कोरा उपजत हावय हीरा मोती पन्ना
चना राहेर कोदो तिली भर्री जागेहे गन्ना
दुनिया भर होवत हावय मोर छत्तीसगढ के मान रे
एखर खातिर मोर संगी दे देहूं जान रे

बोलव सुनव गावव बजावव छत्तीसगढिही बोली
मया पीरीत के घोरे सरबत करव हँसी ठिठोली
हाँथ जोड़के "तोषण" घलो सुनावत हे तान रे
एखर खातिर मोर संगी दे देहूं जान रे

रचना:-
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ
४९१७७१
मो.९६१७५८९६६७
टीप:-कृपया रचनाकार की मेहनत के साथ खिलवाड़ न करते हुए समूल रुप में साझा करें!
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छत्तीसगढ मोर मान रे...

छत्तीसढ़ मोर मान रे..

मैं टुरा छत्तीसगढिहा छत्तीसगढ मोर मान रे
एखर खातिर मोर संगी दे देहूं जान रे

कोरा जेखर खेलेंव कुदेव छंइहा जेखर बाढेंव
गाएंव गाना पारेंव हाना कोयली कुहूकी पारेंव
हरियर हरियर दाई के अचरा सोनहा कस धान रे
एखर खातिर मोर संगी दे देहूं जान रे

चंदर पुरहिन बिलई माई डोंगड़गढ़ बमलाई
रतनपुरहिन माहामाई संबलपुर समलाई
दंतेवड़हिन दंतेसिरी जग बढावय मान रे
एखर खातिर मोर संगी दे देहूं जान रे

बीर नरायेन के जनमभूमि श्रृंगी  के गाँव हे
भगत माता कर्मा जिंहाव शबरी के ठाँव हे
बरसे नवधा भक्ति जिंहा राम करथे बखान रे
एखर खातिर मोर संगी दे देहूं जान रे

भेलई कोरबा दल्ली राजहरा  सबके आस पुरोवत हे
देस परदेस ल भाईचारा म तार ले तार जुड़ोंवत हे
अमर होगे मैतरी गार्डन भारत बधिन मितान रे
एखर खातिर मोर संगी दे देहूं जान रे

जेकर कोरा उपजत हावय हीरा मोती पन्ना
चना राहेर कोदो तिली भर्री जागेहे गन्ना
दुनिया भर होवत हावय मोर छत्तीसगढ के मान रे
एखर खातिर मोर संगी दे देहूं जान रे

बोलव सुनव गावव बजावव छत्तीसगढिही बोली
मया पीरीत के घोरे सरबत करव हँसी ठिठोली
हाँथ जोड़के "तोषण" घलो सुनावत हे तान रे
एखर खातिर मोर संगी दे देहूं जान रे

रचना:-
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ
४९१७७१
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तोषण कुमार चुरेन्द्र

उड़ता चलूँ नील गगन में साथ तेरे ऐ "तोषण"
फिक्र नहीं परवाज की राहें हो कितनों मील...

सोमवार, 27 मार्च 2017

गऊमाता

कांहाँ चलदेस तैहा भगवन,छोड़ कलजुगिहा जमाना में
देखना आज तोर गऊ माता,पहुँचत हवे बुचड़खाना में

धरती दाई ल गऊ रुप म
जुगत्रेता म उद्धार करे
द्वापर म तै आके कन्हैया
गइय्यन के सतकार करे

खात रेहे तै कंस्के मनोहर,दुध दही मही ल खाना में
देखना आज तोर गऊ माता,पहुँचत हवे बुचड़खाना में

गोरस जेकर अमरित असन,
गौमुत हावय दवइ समान
गोबर बने जिंहा खातु कचरा,
हरिहर रखथे खेत खलिहान

आज उर्वरा खोवत हावय,युरिया रसायनिक दाना में
देखना आज तोर गऊ माता,पहुँचत हवे बुचड़खाना में

घर में जेकर गऊमाता हे,
सब देंवता के रहवास हे
होय न पूजा जिंहा गऊमाता के,
ऊँकर समूल बिनास हे

बाँटे सबला दुध दही अउ,पेट भरे डारा पाना में
देखना आज तोर गऊ माता,पहुँचत हवे बुचड़खाना में

कतलखाना ल बंद करव,
तोषण संग गोहरावत हंव
गऊ महतारी के सेवा करव,
सबब तुंहला बतावत हंव

सतजुग द्वापर फेर ले आही,ए कलजुगिहा जमाना में
देखना आज तोर गऊ माता,पहुँचत हवे बुचड़खाना में

सुरहिन कपिलन नांव दाई के,
मान बढाव महतारी के
जनम मरन तक सांथ निभाथे,
हक नंइहे का चिन्हारी के

आज मिलके कसम ये खाबो,जयकारा लगाबो जमाना में
देखबे अब गऊ माता ल,पहुँचन नंइ देन बुचड़खाना में

तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७
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चोला

हाड़ मास के चोला बने हे होरा कस भुजाही गा
माटी के ओढ़ना सीराना माटी कथरी जठाही गा
हरिहर रूखवा के पाना रही कतिक दिन हरिहर
परही सपेटा जब घाम के लगही वहु पिवराही गा

प्रेम मिलन...

काबर तै सपना देखाथस
काबर तै सपना देखाथस
काबर तै जीव ल जलाथस
छाती म मारे गोली ओ संवरेगी जोही....
जिनगी म करदे अंजोर...हो...


सुरता हर तोर रानी जब जब मोला आथे
मन बइहा किंजरत रहिथे हिरदे चानी हो जाथे
कोयली कस तै कुकुवाथस
काबर मोला तरसाथस
मया म भरदे झोली ओ संवरेगी जोही....
जिनगी म करदे अंजोर...हो...
अभी जारी हे.........

रविवार, 26 मार्च 2017

होली हे

छत्तीसगढ के पागा कलगी २९ बर एक छोटकुन परयास...

होली हे

पुरब पसचिम उत्तर म ,ढंग के मनइस ग होली
छत्तीसगढ के दकछिन म ,जब चले दनादन गोली

घर म खात रेहेन रोटी पीठा ,जवान खावत रिहिन गोली
रंग बिरंग गुलाल लगाएंन त ,मांथ लगाए लाल रोली

कुरबानी ऊँखर बिरथा मत होए ,एखर करव जतन
गोहार थोरकिन सुन लेतेव ,परदेस के मुखिया रमन

काखरो भिंजे कपडा लत्ता ,काखरो भिंजे चोली हे
जम्मो दु:ख ल भुलाके काहत हों ,संगी मन ला होली हे.

तोषण कुमार चुरेन्द्र
९६१७५८९६६७

नीर

महिमा हावय निक तोर, सबले हस तै पोठ ।
कोन करे जी रक्षा अब, कोन करे हे गोठ ।।
कोन करे हे गोठ, फुरसद नंइहे काम ले ।
नीर पिये सब आज, प्यास बुझत अब दाम ले ।।
सुन तोषण के बात, धरले गठरी सही मा ।
निकले महि चीर के, तोर निक हावय महिमा ।।

🖋तोषण कुमार चुरेन्द्र🖋

 तोषण कुमार चुरेन्द्र: होली

 तोषण कुमार चुरेन्द्र: होली

होली

होली तो हमने खेली नहीं यारा
मन का सपना टुट गया सारा
छत्तीसगढ की माताएं रो रही
गमगीन हुआ है माहौल सारा

अदाकार

अ----अपनी कमाई का
दा----दान करने वाला
ही सच में अदाकार है

तोषण कुमार चुरेन्द्र

साधु

साधु बन जही नेता कभू
मोला नंइ ममहात हे

भट्ठी चलाय बर इंहा देख
अपने गोड जमात हे.

फरक का परही नेता ला
ऊंकर दुहानु गाय दुहात हे

घर में जावय पीके मंदहा
सुवारी लइका ल ठठात हे.

तोषण कुमार चुरेन्द्र

सोरठा दोहा

सोरठा
प्रनवंउ ग्यानु कुमार ,सदा रख दीन पर नेह !
भजत तोषण कुमार,बरसहु जी सुभग सनेह !!

दोहा
दाई ददा स गुरूजी,करथे गा उद्धार !
मिलथे किरपा इंकरे,होथे बेडा पार !!
तोषण कुमार चुरेन्द्र

तुमसे

हमने भी सीखा है प्यार करना तुमसे
सीखा है हमने भी इनकार करना तुमसे
श़िकवा करो या करो शिकायत किसी से
छोडेंगे ना कभी इकरार करना तुमसे

तोषण कुमार चुरेन्द्र

डिजिटल जमाना

याहा देखव संगी जमाना कइसन आगे
आवत चोर ल देख के घर के रखवार भागे
तावा कस तिपे भोंभरा म बिन चप्पल के रेंगे
कन कनले ठंडा पानी म जिमी कांदा उसनागे...

बड़ सुघ्घर गोठ हे हमर देस डिजिटल होवत हे
चक्कर म डिजिटल के गड़बड़ फिजिकल होवत हे
छोटे बड़े टुरी टुरा के हांथ म हे मोबाइल "तोषण"
आँखी लगत चसमा दाई ददा बर डिफिकल होवत हे
तोषण कुमार चुरेन्द्र

चोरी

चोरी करके पेट भरना आखिर कितने दिनों तक ऐसा करेगा करने वाला
एक दिन तो पकड में आएगा ही
जो चोर होता है उसका जीवन कभी सुखमय नही हो सकता उसका समूल विनाश हो जाता है रावण की तरह....
जीवन बिताएं विभीषण की तरह जिन पर भगवान राम की कृपा हमेशा बनी रही....
जय श्री राम...
तोषण कुमार चुरेन्द्र

विश्वास

मन को है विश्वास अगर
मंजिल मिल ही जाएगी..
करते रहें पग -पग मेहनत
इक दिन रंग ये लाएगी.
तोषण कुमार चुरेन्द्र९६१७५८९६६७

शनिवार, 25 मार्च 2017

हमर धनगाँव के बजार

हमर धनगाँव के बजार के चित्रण चंद पंक्ति म आप मन के सादर प्रस्तुत...
पडथे हमर गाँव रे संगी बजार दिन बुधवारी
आथे जिंहा बेंचाय बर आनी बानी तरकारी

आके तैहा लेले संगी लेना हे तोला जोभी
कुंदरु करेला मुनगा भांटा हावय फूल गोभी

चना मुर्रा मिरची भजिया अउ बरा समोसा
खाबोन बइठके होटल म संगी मसाला धोसा

टिकली फुंदरी इस्नु पावडर आके तै बिसाले
मयारू के मया बर किसम किसम के नपाले

घुमंव न बजार कभू अकेला कहीं मैं चुपचुप
आबे संगी घुमेबर तोला खवाहू पानी गुपचुप

तोषण कुमार चुरेन्द्र ९६१७५८९६६७

गुनेहगार

गुनेहगार है वो हर शख़्स ,कहर इंसाँ पे बरपाता है
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जात -पात की दलदल में ,हम इंसाँ को भरमाता है
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गुजारिए जिंदगी आजाद ,भगत राज जैसे"तोषण "
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रखकर जिसे हर दिल में ,तहे दिल से पूजा जाता है
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तोषण कुमार चुरेन्द्र ९६१७५८९६६७
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छत्तीसगढ के कोरा

शीर्षक :-छत्तीसगढ़ के कोरा
लहर लहर मोर गांव मा
सरसों फूल लहरावै।
छत्तीसगढ़ के कोरा मा
मया के फूल मुसकावै।
सीरी पंचमी के सुआगत म
पुरवइय्या ह डोलत हे।
होरी म गुलाल खेलबो
कारी कोयली बोलत हे।।
मिठ्ठू बनावै सुआ ददरिया
परेवना ह राग लमावै।
छत्तीसगढ़ के कोरा म
मया के फूल मुसकावै।।
आमा ह मउरे बोईर झरगे
परसा ह ललियात हे।
कुलर पंखा निकलत हाबे
गरमी के सुरता करात हे।
कोनों खाही ठंडा कुलफी
बरफ हा कोनों सुहावै।
छत्तीसगढ़ के कोरा म
मया के फूल मुसकावै।।
सुमता ले रहिबो हमन
मया के गीत ल गाबोन।
आऔ सबोझन मिलके
होरी ल सुघर मनाबोन।।
बिधुन होके बाजै नंगारा
सबला नाच नचावै।
छत्तीसगढ़ के कोरा म
मया के फूल मुसकावै।।
-आचार्य तोषण

काबर तै सपना देखाथस

काबर तै सपना देखाथस काबर तै जीवरा जराथस

छतिया मा मारे गोली मोर सवरेंगी गोरी

जिनगी म करदे तै अंजोर......


सुरता ह तोर बैरी जब जब मोला आथे

मनभंवरा बइहा होके रोई रोई गाना गाथे

काबर तरसाए मोला मया नंइ लागे का तोला

पुरवइय्या करत हावे शोर सवरेंगी जोही

जिनगी म करदे तै अंजोर....



आजा रे उड़त चिरइय्या बन कोयली गीत सुनाथे

आँखी ले आँसू निकले मया के दुख हरियाथे

मन मा समाए काबर आसा देखाए काबर

मया के बाँधे तैह डोर सवरेंगी बैरी

जिनगी म करदे तै अंजोर.....


सुघरई म होगेंव दीवाना बैरी होगेहे जमाना

संगी मन हांसे मोला का करिहंव तिही बताना

दिल ल तड़पाए काबर जादू बरसाए काबर

सुध बुध ल लेई डारे मोर सवरेंगी गोरी

जिनगी म करदे तै अंजोर......

तोषण कुमार चुरेन्द्र

वचन

रघुवीर के बचन कभु जावय नही जी खाली
किरपा एक दिन होथे जरुर आज नही त काली...
तोषण कुमार चुरेन्द्र

कदम...

यूं ही कदम हम अपना उठाते नहीं "तोषण "
चलते हैं हम जमाना साथ चल पड़ता है.....
तोषण कुमार चुरेन्द्र

अक्षय कुमार

रियल लाइफ हीरो अक्षय कुमार के सुकमा के शहीदों को 1 करोड़ 8 लाख देने पर उनकी देशभक्ति को नमन करती मेरी ताजा 
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           "अक्षय कुमार"

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खिलाडी कुमार जिनका नाम है
कर. दिखालाया  नेक  काम  है
सबकी  दुआ  ले रहा "बॉस को
छत्तीसगढ   कर रहा सलाम है.
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कभी न इनकी भणडार क्षय हो
नही किसी का  कदापि भय हो
नील गगन में   बन  चमके तारे
हे !  अक्षय  सदा  तेरी जय हो..
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दीन  दुखियों  की  सेवा करके
स्नेह भावना  जो मन में भरके
किया  बडा  उपकार आज ये
नही भुला पायेंगे हम भी मरके
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हुई ताजा फिर आज कहानी
सुनी कभी  दादा की जुबानी
हुए महान शिवि, रंन्तिदेव भी
परहित  जीवन  दिये कुर्बानी
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मान बांटते चल सम्मान मिलेगा
खुशियों  भरा  ब़ागान  मिलेगा
करले "तोषण" कुछ  नेक काम
तेरी मुट्ठी में सारा जहान मिलेगा
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रचना:-©®
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगाँव डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ
९६१७५८९६६७
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                टीप
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होली

कइसे मनावंव जी होली

मोर छत्तीसगढ के बस्तर म,
दिन रात चलत हे गोली..

तिही बताना संगवारी मोर ,
कइसे मनावंव जी होली..

डर डर जिंहा जिनगी जियतहे,
हमर सगा सोदर मन.

काबर हमर सरकार नंइ देखे,
दुख पीरा भरे ओखर मन.

लगत हे जेकर माथा म,
छिन छिन लहु के रोली..

तिही बताना संगवारी मोर,
कइसे मनावंव जी होली...
 
ढर ढर आँखी ले आँसू निकले,
मोर छत्तीसगढ महतारी के,

जेकर लइका प्रान ल त्यागे,
अब मोह का रंग पिचकारी के

कहां ले पाही अपन अंगना म,
फेरले हंसी ठिठोली

तिही बताना संगवारी मोर,
कइसे मनावंव जी होली...

फूलबगिया ल उजडत देख,
करेजा चानी होवत हे

बेटा के आस ल देख के ,
घर घर महतारी रोवत हे

नक्सलवाद ल खतम करव,
सुनव "तोषण" के बोली

तिही बताना संगवारी मोर,
कइसे मनावंव जी होली.....

रचनाकार
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडी लोहारा
बालोद छ.ग.
९६१७५८९६६७
रचना दिनाँक १२/०३/१७

रविवार, 22 जनवरी 2017

गुरू घासीदास के संदेश

छत्तीसगढ़ी दोहा विधा म नानकून उदिम
शीर्षक:-"गुरू घासीदास के संदेश"
गरीब घर मा पग धरे, नांव ग घासीदास।
मिल सब सोहर गात हे,दिन हे सबके खास।१॥
जिला बलौदा बाजार म ,हे गिरौदपुर धांम।
अमरौतिन माता हवय ,पिता ग महंगु नांम।।२॥
बन -बन के रस्ता चले, सत के करे तलास।
धरे तापसी बेस ला ,मन नंइ रहय हतास।।३॥
जात भेद ला मेंट के ,माने सबल समान।
दिस संदेसा शांति के ,मुख सतनाम जबान।।४॥
धरम सदन गा मानथे, पुर भंडार ल आज।
एक जगा जुरियात हे, जम्मो संत समाज।।५॥
बाजे मांदर थाप गा ,गजब लगे संगीत।
छत्तीसगढ़ी मा विधा, सुग्घर पंथी गीत।।६॥
भुल-चूक ला छमा करव,तोषण हवे नदान।
हांथ जोंड बिनती करे,किरपा करव सुजान।।७॥
© ®
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़चित्र में ये शामिल हो सकता है: 1 व्यक्ति

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...