गुरुवार, 18 मई 2017

बेटी

*बेटी*

*बेटी हंव  छत्तीसगढ के*
*जग म  अलख  जगाहूँ*
*दाई ददा के देखे सपना*
*एक  दिन मैं  सिरजाहूँ*

*गरब करही मोर देस जब*
*स्व देस खातिर मर जाहूँ*
*आगु आही जेन बैरी मोर*
*मैं सोजहे पताल पहुचाहूँ*

*रोथे जेन हर बेटी जनम म*
*ओ दाई ददा ल धिक्कार हे*
*बेटा बरोबर राखव महूँ ला*
*जीए  के मोरो अधिकार हे*

*बेटा बनाथे ददा ल भिखारी*
*बेटी ह बनाथे महादानी गा*
*बात अगर ते समज जबे त*
*कहिलाबे मुनि तै ग्यानी गा*

*बेटी मैं तारौं दुठन कुल ला*
*बगिया कस घर संसार गा*
*ददा दाई के बड़ मया पाथों*
*ससुर सास के दुलार गा*

*मैं बेटी अंव रुप अब्बड़ हे*
*दाई भौजी  देरानी  काकी*
*मोसी फुफु दीदी कस मैंहा*
*बहिनी बनके बाँधव राखी*

*बेटा बेटी हे एक समान गा*
*झन पालव गा मन में भरम*
*बेटी बचाना हे बेटी पढ़ाना*
*सबके बने इही धरम करम*

©®
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

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