*बेटी*
*बेटी हंव छत्तीसगढ के*
*जग म अलख जगाहूँ*
*दाई ददा के देखे सपना*
*एक दिन मैं सिरजाहूँ*
*गरब करही मोर देस जब*
*स्व देस खातिर मर जाहूँ*
*आगु आही जेन बैरी मोर*
*मैं सोजहे पताल पहुचाहूँ*
*रोथे जेन हर बेटी जनम म*
*ओ दाई ददा ल धिक्कार हे*
*बेटा बरोबर राखव महूँ ला*
*जीए के मोरो अधिकार हे*
*बेटा बनाथे ददा ल भिखारी*
*बेटी ह बनाथे महादानी गा*
*बात अगर ते समज जबे त*
*कहिलाबे मुनि तै ग्यानी गा*
*बेटी मैं तारौं दुठन कुल ला*
*बगिया कस घर संसार गा*
*ददा दाई के बड़ मया पाथों*
*ससुर सास के दुलार गा*
*मैं बेटी अंव रुप अब्बड़ हे*
*दाई भौजी देरानी काकी*
*मोसी फुफु दीदी कस मैंहा*
*बहिनी बनके बाँधव राखी*
*बेटा बेटी हे एक समान गा*
*झन पालव गा मन में भरम*
*बेटी बचाना हे बेटी पढ़ाना*
*सबके बने इही धरम करम*
©®
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें