चल पड़ा हूँ उस राह मैं जहाँ किसी के पैर के निशाँ नहीं है
ढुँढ रहा हाथों मे चिराग लिये खबर मुझे है वो यहीं कहीं है
रहे धरती या आकाश में या खुशबूओं में छिपे फूलों की,
जेहन में बसी है उसकी यादें मुझको राह दिखाती सही है..
तोषण कुमार चुरेन्द्र ९६१७५८९६६७
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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