गटके हलाहल विष के प्याला नीलकंठ कहाय
डम डम बाजे डमरू तोर निकले नम: शिवाय
सांप डेढ़ू के माला पहिरे बइला के हवय सवारी
संग बिराजे पारबती मइय्या सबके मन ला भाय
सोला सावन सममार सब भगतन तोला मनाय
बने कंवरिया गंगाजल धरके तोर दरश बरजाय
बेलपतिया फूल धथरा फर गांजा के सुघर हूंम
बोल बमबम जय बोल बम जयकारा गजब सुनाय
जपले तैहर हर हर भोला शंखर औघडिया बाबा
हिमालय जेखर धाम हे कहिथे कांशी अउ काबा
मनके मनौती मनाले तैहर हावय शंखर साथ म
खुले हवय सबरदिन "तोषण"भोलेनाथ के ढाबा

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