शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

कर उपकार दधीचि बरोबर

कर उपकार दधीचि बरोबर
देव मनुज ल तारे बर
करले दान ए काया के
कलयुगी दानव ल मारे बर

जीयत भर के संग संगवारी
सब इंहिचे रही जाही
तन पिंजरा म बइठे चिरइय्या
कब फूर्र ले उड जाही

आहस तेहा जाबे एक दिन
सब संन हंस गोठियाले
जिनगी डोंगा उबारे बर
 राम भजन ल गाल

कइसे फरगे करूवा करेला
मैं बिरवा केरा के लगाएंव
कोन जनी का करम करेंव
जेखर मैं फर ल पाएंव

करनी की दण्ड भोगे ल परही
चढाय परसाद ल झोंके ल परही
करम के लेखा संग म जाथे
अहू बात ल तो सोचेंल परही

"करम प्रधान विश्व करि राखा।
जो जस करहि तस फल चाखा।"
(राम चरित्र मानस)
आचार्य तोषण

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