मंगलवार, 16 अगस्त 2016

लिख दो...


सुन मेरी नई कहानी लिख दो ।
मुझको परियों की रानी लिख दो ।
ललकारी अंग्रेजों को जिसने,
आज वही मनू मर्दानी लिख दो ।
की पूजा वीर शिवा ने जिसकी,
वही शिवा की भवानी लिख दो।
बहती रहूं नीत दरिया बनकर,
मुझमें मौजों की रवानी लिख दो ।
डटी रहूँ मैं ताने सीना अपनी,
सीमा पर मेरी जवानी लिख दो ।
हो जाए चूर टकराए जो पत्थर,
मुझे दरिया ओ तूफानी लिख दो ।
बेटी हूँ मै भारत माँ की "तोषण",
अपने कलम की जुबानी लिख दो ।
-आचार्य तोषण
धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

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