मंगलवार, 16 अगस्त 2016

कर गया

गलती एक मैं खुलेआम कर गया
अपने ही नाम को बदनाम कर गया
🏝🏝🏝🏝🏝🏝🏝🏝
गांव मे जन्नत थी मां के कदमों पर
खोकर मैने जिसे बेमन शहर गया
🌆🌆🌆🌆🌆🌆🌆🌆
वक्त की मार से बच पाया है कौन
कोई सम्हल गया कोई बिखर गया
🕐🕑🕒🕓🕔🕕
🕖🕗🕘🕙🕚🕛
तमन्ना थी मुकाम पे पहुंचने की मेरी
वक्त आखिर मुझको मजबूर कर गया
🏋🏿🏋🏿🏋🏿🏋🏿🏋🏿🏋🏿🏋🏿🏋🏿
डर के आगे जीत जानते है सभी
बुज्दील वो जीत के आगे डर गया
😰😰😰😰😰😰😰😰
बेवफाई मिली मुझे वफा-ए-इश्क मे
आरजू दिल की रूखसत कर गया
🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃
हुई एहसास गुनगुने इश्क की तोषण
मौसम-ए-पतझड़ मे सावन ठहर गया
🌧🌧🌧🌧🌧🌧🌧🌧
-आचार्य तोषण

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