मंगलवार, 16 अगस्त 2016

जंगल की बात...


जा रहा था मैं जंगल में
डुबा रहा आनंद मंगल में
राह मिल गया मुझको शेर
देख उनको हो गया ढेर
गब्बर शेर मुझसे कहा
जा रहे हो भाई अकेले कहां ???
हमने कहा भैय्या शेर
हो रही हमको जाने देर
शेर ने अपना मुंह खोला
बड़े चाव से हमको बोला
क्यों हमसे नजर बचाते हो
सुना है ,अच्छी शेर सुनाते हो
सुनकर मै आश्चर्य चकित हो गया
शेर कब शेर का दीवाना हो गया?
शुरू किया सुनाना शेर
वाह वाही की लग गई ढेर
शेर ने कहा शेर तेरा बड़ा अच्छा है
तेरे शेर के आगे इस शेर का दिल अभी बच्चा है
मैने कहा शेर से आपका कहना सच्चा है
शेर के शेर कहना हो जाता गीला कच्छा है
कहा शेर ने तेरे पास शब्दों का कुबेर है
दो चार और सूना करता क्यूँ देर है?
हमने कहा देख शेर, शेर आखिरी पढता हूं
सुबह का निकला शाम हो गया अब घर को चलता हूं
कहने लगा शेर मुझसे आना कल चौबारा
नहीं आओगे शेर कहने जिंदगी मिलेगी ना दोबारा
जैसे तैसे जान बचाकर मैं वहां से निकल पड़ा
लग रहा था मानो कोई सूली लेकर पीछे खड़ा
हाथ जोड किया प्रणाम रब को मैने दुआ मनाया
मन ही मन खुशी मनाया जान बची सो लाखों पाया

-आचार्य तोषण

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