जब जब तोर मया के सुरता आथे गोरी मोला सावन मा
बरसत रिहिस तोर मया के बदरा मोर हिरदे के आंगन मा
सनन सनन करय पुरवइया मया के मोर खेती खार मा
लहरा मारय घुमर घुमर के नदिया नरवा के धार मा
मोला छोड़ कहां ते चलदेस खोजव तोला आरा पारा मा
डोंगरी पहाड़ी नदिया कछार जाके लुकागे पाना डारा मा
बन चकवा निहारत हावंव पिया मोला पीरीत के पानी
हरिहर होजाही मोर मया के डोली खुश रही जिनगानी
-आचार्य तोषण
बरसत रिहिस तोर मया के बदरा मोर हिरदे के आंगन मा
सनन सनन करय पुरवइया मया के मोर खेती खार मा
लहरा मारय घुमर घुमर के नदिया नरवा के धार मा
मोला छोड़ कहां ते चलदेस खोजव तोला आरा पारा मा
डोंगरी पहाड़ी नदिया कछार जाके लुकागे पाना डारा मा
बन चकवा निहारत हावंव पिया मोला पीरीत के पानी
हरिहर होजाही मोर मया के डोली खुश रही जिनगानी
-आचार्य तोषण

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