मंगलवार, 16 अगस्त 2016

बन चकवा निहारत हावंव

जब जब तोर मया के सुरता आथे गोरी मोला सावन मा
बरसत रिहिस तोर मया के बदरा मोर हिरदे के आंगन मा
सनन सनन करय पुरवइया मया के मोर खेती खार मा
लहरा मारय घुमर घुमर के नदिया नरवा के धार मा
मोला छोड़ कहां ते चलदेस खोजव तोला आरा पारा मा
डोंगरी पहाड़ी नदिया कछार जाके लुकागे पाना डारा मा
बन चकवा निहारत हावंव पिया मोला पीरीत के पानी
हरिहर होजाही मोर मया के डोली खुश रही जिनगानी
-आचार्य तोषण

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