मंगलवार, 16 अगस्त 2016

मेरे जाने के बाद

मेरे जाने के बाद
मेरी मां की आंखों मे
आंसू आने मत आने देना यारों
जा रहा हूँ
छोड़कर इसे
अब तुम्हें सौंपकर

चुकाया जो कर्ज़ था मुझपे मां के नाम की "तोषण"
बारी अब तो तेरी है ऋण से उऋण होने की
मेरे गुलिस्तां ए वतन मे फूल अमन का खिलाना "तोषण"
देखे हैं राह ए वतन पे बंदिशों के कांटें बिखरे पड़े
यूं मायूस होकर हमें बिदा कभी न करना
"तोषण"
हमारी मौत पर दुनिया सारी नाज करेगी..
............जय हिंद
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आचार्य तोषण

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