#हरेली
होगे बांवत बियासी भइय्या,खुसी मन के आगर
सावन के तिहार हरेली,जुरमिल धोवन नांगर
पूजा परे पुजेरी भइय्या,धोवा चंऊर चढाय
नांगर मेर हूंम जग देबर,सुघर चीला बनाय
गंहू पिसान के लोई बनाएन,दशमूल ल गोलियाके
गाय बछरू भंइस भंइसा,सबला ओरी पारी खवाके
मंगलू बुधारू टेटकू राऊत,लीम डारा खोंचत हे
बिसकुटनी लावय मनटोरा,समारू बरातू झोंकत हे
रचरच मचमच गेंडी चढ़य,लइका मन के टोली
बहिनी मन सब फुगडी खेलय,करय हंसी ठिठोली
हरयाली के संदेशा देवत,आवय तिहार हरेली
झूलवा झुलय सावन म,मिलके संगी सहेली
आवव संगी सबझन मिल,हरेली तिहार मनाबो
हरिहर रहय ए भुंइया सोंच,एक ठन पेड़ लगाबो
-आचार्य तोषण
होगे बांवत बियासी भइय्या,खुसी मन के आगर
सावन के तिहार हरेली,जुरमिल धोवन नांगर
पूजा परे पुजेरी भइय्या,धोवा चंऊर चढाय
नांगर मेर हूंम जग देबर,सुघर चीला बनाय
गंहू पिसान के लोई बनाएन,दशमूल ल गोलियाके
गाय बछरू भंइस भंइसा,सबला ओरी पारी खवाके
मंगलू बुधारू टेटकू राऊत,लीम डारा खोंचत हे
बिसकुटनी लावय मनटोरा,समारू बरातू झोंकत हे
रचरच मचमच गेंडी चढ़य,लइका मन के टोली
बहिनी मन सब फुगडी खेलय,करय हंसी ठिठोली
हरयाली के संदेशा देवत,आवय तिहार हरेली
झूलवा झुलय सावन म,मिलके संगी सहेली
आवव संगी सबझन मिल,हरेली तिहार मनाबो
हरिहर रहय ए भुंइया सोंच,एक ठन पेड़ लगाबो
-आचार्य तोषण
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