मंगलवार, 16 अगस्त 2016

बाबा तुलसीदास

बाबा तुलसीदास
राजा पुर गांव म जनम धरे
सावन सुकल साते में आय।
जनम लेवत जय राम बोले
दाई हुलसी के मन ल भाय ।।

छोड़ चलिस दाई जग म
तैहर अनाथ कहाय।
मांग झांग के पेट भरे नीत
रात भर नींद न आय।।
रतनावली के बात ल माने
भगति म ध्यान लगाय।
राम दरश बर घुमे बन बन
शिव धाम कांशी तंन जाय।।
नरहरि दास गुरू जब मिलगे
नवा नांव तुलसी के पाय।
सेस सनातन जब गुरू मिले
अपन सिकछा पूरा कर पाय ।।
चित्रकुट म बसगे जाके
दुख के बदरा नीत छाय।
राम भगति उपजे अंतस म
तुलसीदास बनके छाय।।
आचार्य तोषण

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