मंगलवार, 16 अगस्त 2016

डमरु बजइय्या शिव शम्भु

डमरु बजइय्या शिव शम्भु सुम्हरत हंव तोला
अवघड दानी तोला कहिथे दान दे दे मोला
सावन महिना चले कंवरिया बोल बम्ब के नारा
तोर मुड़ी ले निकले भोला मात गंग के धारा
धथुरा फर धथुरा के फूल चढावय बेल पतिया
ध्यान लगावय तोला मनावय माता परबतिया
तिरशूल डमरु हांथ बिराजे गले सांप के माला
मांथ मा सोहे दूज के चंदा पहिरे बाघंम्बर छाला
नंदिया बइला तोर सवारी रहिथस तेह शमसान
सब बइरागी कहिथे तोला बइठके लगाए ध्यान
सत्य हे शिव शिव हे सुंदर बेद पुरान ह बताथे
हर हर बम्ब ओम नम: शिवाय धुनी रमाके गाथे
जेन हर आथे मन भर पाथे अवघडिया तोर तीर
बनके याचक काहत हावय "तोषण" खड़े अधीर
@×@हर हर महादेव की जय @×@

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