मंगलवार, 16 अगस्त 2016

-माटी के मितान

शीर्षक:-माटी के मितान
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जेन माटी के रकछा खातिर होईन कतको बलिदान गा
इही माटी के दुलरवा बेटा हरंव माटी के मितान गा
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ऊवत सूरूज मा करंव आरती दीया अगर कपूर जलाइके
दण्डाशरन पांव पंइंय्या लागंव हांथ जोड़ दुनो लमाइके
सब जुरियाके हंस मुसकाके माटी के जस ला गान गा
इही माटी के दुलरवा बेटा हरंव माटी के मितान गा
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आवय दिन जब खेती किसानी नांगर बइला हे हमर संगवारी
अरातता के सुर ला लमावंव मुडी मा खुम्हरी हांथ तुतारी
हरिहर करबोन धनहा डोली बोंएंबर चलव सब धान गा
इही माटी के दुलरवा बेटा हरंव माटी के मितान गा
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मनटोरा भउजी हर बासी धरके खेती डोली डहर गा आवय
मंगलू भइय्या मारय हरिया चांच मा आंखी ल जमावय
होत मंझनिया लिमंऊ चटनी संन बोरे बासी ल खान गा
इही माटी के दुलरवा बेटा हरंव माटी के मितान गा
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नांगर बइला ल धो मांज के मनाबोन गा हरेली तिहार
घुमड़े बादर चलय पुरवइया पानी के रिमझिम परे बउछार
हुम धूप अगरबत्तियां धरके चीला के रोटी चढ़ान गा
इही माटी के दुलरवा बेटा हरंव माटी के मितान गा
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सरग ले सुघ्घर ए भुइंया ह एखर माटी माथ के चंदन हे
सेवा बजावंव गुन ल गावंव गोड़ ल घेरी बेरी बंदन हे
इहां धुर्रा लागे अइसन संऊहत सोनहा समान गा
इही माटी के दुलरवा बेटाहरंव माटी के मितान गा
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रचना:-आचार्य तोषण धनगांव डौंडीलोहारा
बालोद छत्तीसगढ़पिन:-४९१७७१
मुहूबाइल:८६१७५८९६६७

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