मंगलवार, 16 अगस्त 2016

कइसे फरगे रे करूवा करेला

कइसे फरगे रे करूवा करेला
मैं बिरवा केरा के लगाएंव
कोन जनी का करम करेंव
तेखर फर ल पाएंव
करनी की दण्ड भोगे ल परही
चढाय परसाद ल झोंके ल परही
करम के लेखा संग म जाथे
अहू बात ल तो सोचेंल परही
"करम प्रधान विश्व करि राखा।
जो जस करहि तस फल चाखा।
आचार्य तोषण

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