बुधवार, 8 अप्रैल 2020

अनुसुइया वचन

विषय पावन
विधा चौपाई
दिनाँक 12/03/20

पावन मेरी जननी धरती।
मातु सती देवी अवतरती।
लक्ष्मी दुर्गा काली बनकर।
अरियों को भेदी है तनकर।1।

मनु मर्दानी सदा कहाई।
वनदेवी सीता सुखदाई।
शबरी झूठा बेर खिलाई।
प्रेम मगन राघव है खाई।2।

अनुसुइया की सती कहानी।
याद सदा है लोक जुबानी।
मात सिया को शिक्षा देती।
करते बखान सब नेती नेती।3।

दक्षिण कौशल पावन मेरा।
महानदी की उद्गम डेरा।
अरपा पैरी सोढुर राजे।
राजिम नगरी सुंदर साजे।4।

धन्य धन्य है दन्तेवाड़ा।
लगती है नित जहाँ अखाड़ा।
बमलाई है रक्षा करती।
भक्तों के नित संकट हरती।5।

है पावन यह पटल हमारा।
करते  रहे  सदा  विस्तारा।
साधक साधन साध्य सारे।
लग जायें करने विस्तारे।6।

तोषण है नित माथ नँवाता।
शाम सुबह बस गीता गाता।
जय श्री राम बसे घट अंदर।
सुमिरत बिदा हुये दशकंधर।7।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.

परिषद

छत्तीसगढ़िहा कुण्डलियाँ

परिषद तबहे जी हमर,बनही हीरा खान।
एक दुसर ल देख के,सीखन अउ सीखान।
सीखन अउ सीखान,समय जी थोरिक देवव।
अड़हा नाविक जान,नाव ला बढ़िहा खेवव।
कह तोषण कर जोर,भाव ले मन मा गदगद।
खिलही डोहरु फूल,चढ़ै गा सीढ़ी  परिषद।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा

बासी चटनी खाले ठनके

त्वरित कविता

बाई जी कथे मोला जी 
का बतावँव तोला जी
आठ बजत ले सुते रहिथस
बारा बजत ले जागत रहिथस

रात दिन मोबाइल के ध्यान रथे
रहिथे कहीं सुरता जेन कोनों कथे
मोर बार ल मानस निही
आगू पाछु ल जानस निही

कथे मोरो तीर ध्यान लगाय कर 
मछरी कोतरी  भूंजी लाय कर 
तभे तो तोला खवाहू जी
संग संग महूँ खाहूँ जी

महूँ ह कहेंव डुमेश के दाई
जादा झन कर ना करलाई
करोना वायरस फइले हवय
सब झन देखले घइले हवय

बासी चटनी खाले जमके
रही तन हा सबके ठनके
दारभात ल खावव संगी
जय श्री राम गावव संगी।।

तोषण धनगंइहा

कोरोना का डर

कुण्डलियाँ में एक प्रयास...

कोरोना का डर...

कोरोना का डर यहाँ,
            फैला चारों ओर।
कैसा है यह वायरस,
            नहीं दवा का शोर।।
नहीं दवा का शोर,
            करें नव उपचार सभी।
चिन्ता का यह फेर,
            कटे जल्दी रोग अभी।
कह तोषण कर जोड़,
            हाथ को प्रतिदिन धोना।
करना सभी विरोध,
            डरे भागे कोरोना।


चौपाल गली चौक को,
            बंद करे सरकार।
पता दवा की है नहीं, 
            जनता है लाचार।।
जनता है लाचार,
            सोचते बैठे सारे।
कोई तो उपचार,
            ढूँढ लो मोदी प्यारे।
कह तोषण कर जोड़,
            भीड़ जाओ महाबली।
दें कोरोना फेंक ,
             झुमें हर चौपाल गली।

कवि तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
सरपंच, ग्राम पंचायत धनगांव डौं.लोहारा

आजा दाती

कज्जल छंद विधान
मात्रा भार 14-14
सूत्र
2-2-2-2-3-3
4-4-3-3

सादर नमन
छंद:- कज्जल छंद 

आजा  दाती राह फूल।
चरणों  तेरी  न हो धूल।
राजे कर में जो त्रिशूल।
आती  है नव रात मूल।

लाली चुनरी आभ रूप।
है  लगती  मैया  अनूप।
मेरी  माता  है   स्वरूप।
बिखरी  देखो  नई  धूप।

आयी  पावन  चैत रात।
होगी  माता  मुलाकात।
दर्शन  तेरी  बड़ी  बात।
बैरी  की  हो खरी मात।

टेकूँ  नित  मैं  तुझे माथ।
बनकर  दास रहूँ सनाथ।
मिलता है आशीष साथ।
पूजा करते  सिया  नाथ।

कृति
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.

प्रार्थना

*प्रार्थना*

जनता से है प्रार्थना,मर्जी अपनी चले ना,
नियम सरकार का, भी तो अपनाइये।

सबकी ये सोच बने,सीना ताने आगे खड़ें
गाँव के मुखिया का ,साथ तो निभाइये।

लड़ना कोरोना से है,कहना सभी से है ये,
मिलकर आज सब,कदम बढ़ाइये।

कोरोना ये भाग जाए, सावधानी अपनायें।
जन जन मिलकर,चेतना जगाइये।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौं.लोहारा बालोद छ.ग.

राम नाम जाप

*दोहा गजल*

राग द्वेष सब छोड़कर, जाप करो श्री राम।
आशा पूरन नित करे,बनते बिगड़े काम।

पूरा करते काज को,सदा करे कल्याण,
भगत हुये हनुमान जी, करे भजन निष्काम।1।

राम राम तुलसी जपे,रचा नया इतिहास,
अंतिम अवसर में मिला, प्रभु चरण सुखधाम।2।

हे मानव अब जाग जा,गहरी निद्रा त्याग,
ध्यान करो श्री राम को,अद्भुत मिले विश्राम।3।

धनुष बाण करतल सजे,मुख पर है मुस्कान,
हाथ जोड़ 'दिनकर' खड़ा,शत शत करे प्रणाम।4।

-तोषण दिनकर

मंगलवार, 7 अप्रैल 2020

दिनकर

🙏🙏🙏🙏🙏🙏
आदरणीय संजय कौशिक "विज्ञात" जी और आदरणीया अनिता मंदिलवार "सपना"दीदी जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। आपने मुझे उपनाम देने के योग्य समझा, इसके लिए बहुत बहुत आभार...💐💐💐

सारे जग के तम हरूँ,मिला बड़ा उपनाम।
धन्य धन्य विज्ञात जी,करूँ सदा हित काम।
करूँ सदा हित काम,साधना साधक जोगी।
रहूँ साहित्य दास,नित्य नव रचना होगी।
कह दिनकर कर जोड़,बनूँ नित सेवक प्यारे।
दो खुशियों के पुष्प,जगत को सौपूँ सारे।।

-तोषण कुमार चुरेन्द्र"दिनकर"

सोमवार, 6 अप्रैल 2020

जीवन है अनमोल

कलम की सुगंध छंदशाला मंच को सादर नमन

विधा:- दोहा
विषय:-जीवन है अनमोल
दिनाँक:-6/4/20202
दिन:-सोमवार

परमारथ को साथ रख,मीठी वाणी बोल।
रख मन में सदभावना, तब जीवन अनमोल।।1।।

जीवन ये अनमोल है,गाते संत सुजान।
बिन विवेक इंसान ज्यों,लगता ढोर समान।।2।।

जीवन दीपक नित जले,देता चले प्रकाश।
दिनकर दे नव चेतना,चमके नित आकाश।।3।।

धर्म कर्म बिन साधना,बिरथा बाजा ढोल।
परहित मन में है नहीं, क्या जीवन का मोल।।4।।

तोषण हिय में धारणा,बोली तौले बोल।
सुख दुख में सब साथ हो,जीवन है अनमोल।।5।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.

रविवार, 5 अप्रैल 2020

राम राज्य

मंच को सादर नमन

विधा घनाक्षरी
विषय राम राज्य
दिनाँक 05/04/2020
दिन रविवार

जागे पहले मानवता मिटे सब दानवता,
चलें सच्ची राह साथी झूठ हार जाएगा।

दुखियों के सेवा होवे,भूखे कोई नहीं सोवे,
कर भला दुसरों की देव बन जाएगा।

सभी का आदर करे मीठी मीठी बातें करें,
आगे आके बैरी प्यारे गले लग जाएगा।

नवधा सा ज्ञान मिले,खुशियों के पुष्प खिले,
तभी मेरे भारत में राम राज्य आएगा।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.

शुक्रवार, 27 मार्च 2020

भारत मेरा देश है

चंडिका में लघु प्रयत्न
मात्रा भार १३-१३
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भारत  मेरा देश है,
अलग यहाँ का वेश है।
ऋषि मुनियों की ये धरा,
ध्यान प्राण अब ला जरा ।१।

 जन्म जहाँ है राम का ,
नटवर नागर धाम का ।
रावण को  संघारता,
कंस अधम है हारता ।२।

आया था जब गजनवी,
महापात वो दानवी।
हार मान वो है गया,
मिली यहाँ भरके दया।३।

विलायती की मार से,
जगे हिंद अब ताड़ के।
दुश्मन के छक्के छुटे,
इधर उधर हैं सिर फुटे।४।

दुविधा से है जुझ रहा,
जाने कितना घुँट रहा,
रोती ये नर नारियाँ,
बड़ी अजीब बिमारियाँ।५।

विपदा ये विकराल है,
कालों के भी काल है।
कोरोना जो नाम है,
पता नहीं अंजाम है।६।

कोरोना को अब मात दें,
भारत का सब साथ दें।
घर में ही जनता रहे,
यूँ ही बस कुछ दिन सहे।७।

बादल ये छट जाएगा,
अच्छा दिन अब आएगा।
सबका जो सहयोग हो,
यही महा संयोग हो।८।

मिलकर ये सब जानले, 
जा कोरोना ठान ले।
लौट नही वो आएगा, 
मुकी लात अब खाएगा।९।

मिलकर जो सब साथ हो,
जोश-जोश की बात हो।
कोरोना पछताएगा, 
छोड देश अब जाएगा।१०।

कोयल काली जब कुँजे,
भारत माता जय गुँजे।
तोषण मत यूँ हार ना,
कोरोना को मारना।११।
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तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.
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बेटी//कोरोना

हंसगति छंद अनजान
न जान है न पहचान 
फिर भी एक प्रथम प्रयास
सादर
नमन मंच
मात्रा भार ११/९

बेटी.......

बेटी अपनी जान,जरा सुनले माँ।
कब से हूँ मैं द्वार,करेगी कब हाँ।
निर्मम यह संसार,नमो हे भोली।
नैना तरसे नेह, भरे  कब  झोली।


कोरोना .....

दे दो माँ वरदान,करूँ मैं वंदन।
कोरोना हो दूर,करो अब भंजन।
हरलो माता भार,जरा सुन अर्जी।
खुश हो घर संसार,चले जो मर्जी।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा

गुरुवार, 26 मार्च 2020

विज्ञात जन्मदिन

परम आदरणीय श्री गुरूदेव संजय कौशिक "विज्ञात" जी जन्मदिन की बधाई व शुभाशया के संग एक कुण्डलियाँ समर्पित...

अपनी वाणी से कभी,करे नहीं आघात।
अतुलनीय जो है सदा,हैं कवि रवि विज्ञात।
हैं कवि रवि विज्ञात,रौशनी भरते मग में।
मिले मान सम्मान, सदा ही कलयुग जग में।
कह तोषण कर जोड़,पड़े माला नित जपनी।
मिले गुरू विज्ञात,वाह रे किस्मत अपनी।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.

बुधवार, 25 मार्च 2020

माता की नवरात्रि

सादर नमन
दिनाँक:- 25/03/2020
दिन:- बुधवार
विषय:-चित्राभिव्यक्ति
छंद:- कज्जल छंद में एक प्रयास

आजा  दाती राह फूल।
चरणों  तेरी  न हो धूल।
राजे कर में जो त्रिशूल।
आती  है नव रात मूल।

लाली चुनरी आभ रूप।
है  लगती  मैया  अनूप।
मेरी  माता  है   स्वरूप।
बिखरी  देखो  नई  धूप।

आयी  पावन  चैत रात।
होगी  माता  मुलाकात।
दर्शन  तेरी  बड़ी  बात।
बैरी  की  हो खरी मात।

टेकूँ  नित  मैं  तुझे माथ।
बनकर  दास रहूँ सनाथ।
मिलता है आशीष साथ।
पूजा करते  सिया  नाथ।

कृति
तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.

मंगलवार, 10 मार्च 2020

एसो होरी तिहार मा

होरी तिहार मा...

एसो के होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो
डोकरा बबा डोकरी दाई
सबला गुलाल लगाबो।।

नई छोड़न भइय्या भउजाई
बड़का बबा अउ बड़की दाई
कका काकी दाई ददा संन
सुघर फगुवा गाबो।
एसो होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो।

माते सरसो के फुलवारी 
सियान मितान संग संगवारी
धरे गुलाल अबीर हाथ मा
पिचका अजब चलाबो।
एसो होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो।

रंग पानी के होरी तिहार
बिन पानी हे सब बेकार
जल जीवन हे ए अनमोल
पानी हमन बचाबो।
एसो होरी तिहार मा
नंगतेहे उधम मचाबो।

तोषण धनगंइहा

होरी हे

रंगों का महापर्व होली की
हार्दिक बधाई व शुभाशया
होली विशेष
हाइकु पंच समीक्षार्थ

होलिका दाह~
श्रीफल चढ़ातें है
गाँव के लोग।1।

होली परब~
रंगों से है खेलती
नन्हीं बालाएँ।2।

नील बरन~
धरती को रँगती
फागून रंग।3।

होली की धूम~
नगाड़ा थाप पर
नाचते बाल।4।

फागुवा राग~
बसंत में झूमती
आम्र मंजरी।5।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.

प्रेम सद्भाव

*प्रेम सदभाव लिये,*
              *एकता संदेश दिये,*
*होली का त्योहार हमें,*
              *यही सिखलाती है।*
*रंग सराबोर करे,*
              *सुमता के राह गढ़े,*
*सतरंगी रंग सदा,*
              *पाठ ये पढ़ाती है।*
*आओ मिल हम साथी,*
              *मिलके मनाये होली,*
*बसंत बयार लिये,*
              *कोयलिया गाती है।*
*रंगीला परब भावे,*
              *मन मेरा नाचे गावे,*
*फाग की नगाड़ा अब,*
              *राग जो सुनाती है।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा*
*डौंंडी लोहारा बालोद छ.ग.*

होरी हे

छत्तीसगढ़ी कुण्डलियाँ

आनी बानी रंग हे,
           घोर-घोर के घोर।
बइरी मन हर देख के,
           नाचे मुड़ चिभोर।
नाचे मुड़ चिभोर,
           थाप सुनके नंगारा।
दुरिहा इरषा होय,
            रहे गा भाईचारा।
रंगव सातो रंग,
            बचाके संगी पानी।
भजिया गुजिया संग,
            चुरे खइ आनी बानी।

तोषण धनगंइहा

सोमवार, 17 फ़रवरी 2020

बड़े दिनों बाद

बड़े दिनों बाद...

बड़े दिनों बाद एक बात दिल में आई है।
अपनों के भीड़ में भी कितनी तन्हाई है।

गुजारा हुआ हर पल आज कहता है मुझसे,
अब तेरी वफा में न जाने ये कैसी रूसवाई है।

बहती ये हवाएँ भी सदाएँ देती है हमको,
पहले की वफा हँस कर फिर क्यूँ बेवफाई है।

लौटकर न आना कभी जा अब दूर कहीं,
मेरे दिल की गली से सब दिन की बिदाई है।

ये फिजायें ये गुलशन भी बातें नहीं करते,
कहते ही रहते हमें ये "धनगंइहा" हरजाई है।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
उपाध्यक्ष, मधुर साहित्य परिषद
ईकाई डौंडी लोहारा

शुक्रवार, 31 जनवरी 2020

आभार

कोटि कोटि आभार

जनता हो धनगाँव के,देहव मया दुलार।
हिरदे ले काहत हवँव,तुम सबला आभार।।
तुम सबला आभार, चुने जी हावव मुखिया।
रखहूँ सबके मान,रहय जे कौनों दुखिया।।
हँव तोषण सरपंच,बनाहूँ सबके बनता।
सेवा रहिही पोठ,संग जब देवय जनता।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र'धनगंइहा'(कवि)
नवनिर्वाचित सरपंच, ग्राम पंचायत धनगाँव
उपाध्यक्ष, मधुर साहित्य परिषद
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.

मंगलवार, 21 जनवरी 2020

पेट

*कुण्डलियाँ*

_*पेट*_

_*भरता जिसका पेट है,रहे वही है मौन।*_
_*दीन दुखी लाचार को, पुछे भला अब कौन।।*_
_*पुछे भला अब कौन,काम जब बन है जाता।*_
_*स्वार्थ का संसार,कौन है किसको भाता।।*_
_*रहे कहाँ से ध्यान,नहीं मन अब कुछ करता।*_
_*चंगा रहे शरीर,पेट है जब जब भरता।।*_

_*भूखा रहकर कब तलक,कैसे भजन सुनाय।*_
_*मुख से निकले राम जी,दिल से निकले हाय।।*_
_*दिल से निकले हाय,पेट जब भूखो मरता।*_
_*होकर के मजबूर,काम है फिर भी करता।।*_
_*दिन गये है बीत,खाय जो पत्ता सूखा।*_
_*रहकर सब यूँ मौन,सहो जी बनकर भूखा।*_

_*तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा*_

चुनाव माहोल

माहोल चुनाव बड़ छाए हे।
सबो समिति आगू आए हे।
मांग अड़बड़ हवय तिरपटहा,
प्रत्याशी के मति छरियाए हे।


जेन मिलथे सब काहत हे,
तुहीच ल देबोन वोट हम।
तोला रहिबोन सब चिनके,
फेर झिन करबे नोट कम।
जनता मन के चारो कोती,
हाथ दुनों अभी हरियाए हे।
मांग अड़बड़ हवय तिरपटहा,
प्रत्याशी के मति छरियाए हे।

आथे जब गाँव मा प्रत्याशी,
जनता ल गजब रिझाए बर।
देखा के अपन चुनाव चिनहा,
लगथे गा सुग्घर बताए बर।
बिना नोट के वोट नंइ मिले,
भीड़ लोगन नेता ल चेताए हे।
मांग अड़बड़ हवय तिरपटहा,
मति प्रत्याशी के छरियाए हे।

रीत हे देखव याहा कइसे ,
दानी ह लालची होवत हे।
अपन मत के दान करेबर,
ये पइसा खातिर रोवत हे।
गाँव समाज ल छोड़ सब,
अपनेच सुवारथ सधाए हे।
मांग अड़बड़ हे तिरपटहा,
मति प्रत्याशी के छरियाए हे।

गाँव के बढ़िहा विकास करय,
अइसन मुखिया बनावव जी।
मिलजुल के मोर संगी साथी,
गाँव ल सरग सजावव जी।
सच्चा ल चुनव अच्छा चुनव,
अतरी 'धनगंइहा' सोरियाए हे।
मांग अड़बड़ हे तिरपटहा,
मति प्रत्याशी के छरियाए हे।
माहोल चुनाव बड़ छाए हे।
सबो समिति आगू आए हे।
मांग अड़बड़ हवय तिरपटहा,
प्रत्याशी के मति छरियाए हे।


तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
उपाध्यक्ष, मधुर साहित्य परिषद
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.
२०/०१/२०२०
९५७५०७०६८९

बुधवार, 15 जनवरी 2020

तुमने जो अगर(परमानंद प्रकाश)

....................................................

तुमने जो अगर दिल से पुकारा नहीं होता 
तुम आज मेरे तो, मै तुम्हारा नहीं होता

मै मर ही गया था, तेरे इस जुल्म-ओ- सितम से
जो रब का अगर मेरे इशारा नहीं होता

जिस रात मेरे ख्वाब मे आती नहीं है तू 
उस रोज मेरे दिन का गुजारा नहीं होता

हाँ साँथ मेरे तू जो चले राह में तो ठीक 
बिन तेरे मुझे चलना गवारा नही होता

"परमा" को तेरा प्यार अगर होता जो हासिल
तो गर्दिशो मे मेरा सितारा नही होता

- परमानंद प्रकाश,गुरुर,छत्तीसगढ

सोमवार, 13 जनवरी 2020

जाबो मतदान करे

घनाक्षरी

जाबो मतदान करे,हक ये हमर हरे,
मिले हावे मोका येला, कभु नी गंवाना हे।

चुनबो अपन नेता,सबके हावै चहेता
सुनो मोर भैय्या भौजी,विहीला जिताना हे।

गाँव के बिकास करे,दीन दुख दूर करे,
फले फूले गाँव सारी,सुग्घर बनाना हे।

सुनो सब नर नारी,मिले हावै अब पारी,
देश अउ समाज ला,सुदृढ़ सजाना हे।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
उपाध्यक्ष
मधुर साहित्य परिषद
डौंडी लोहारा

शुक्रवार, 10 जनवरी 2020

विचार

*किसी के चरित्र पर कीचड़ उछालने से पहले अपने निगेहबान की निगरानी रखें कि स्वयं कहाँ है। पक्षी हो या विपक्षी मनुष्य के अंतर्निहित गुण और अवगुण होना स्वभाविक है। लेकिन गुण की अधिकता के कारण अवगुण का निशान छिप जाता है शायद यह ज्ञान कीचड़ उछालने वाले के समझ से परे लगता है। कर भी क्या सकते है।कहा गया है कि*
_*" फुलै फरै ना बेत,जलधि जो बरसहि सुधा।*_
_*मुरख जान ना चेत,मिले जो गुरु बिरंचि सम।।"*_

गुरुवार, 9 जनवरी 2020

उम्मीदवार के ब्यथा

*उम्मीदवार के ब्यथा*

सऊँख मोरो जी चर्राय राहय
जाके फारम फटले भरदेंव।
लड़हूँ महूँ चुनाव अब कहिके 
गाँव भर मा ढिंढोरा करदेंव।।

बनेबर बर तो मैं बनगे हावँव
सरपंच पद उम्मीदवार मँय।
आगू पाछू मोर कोनों नंइ घूमय
कइसे के करिहँव परचार मँय।।

बीजा छीतेहँव धनहा डोली मा
पानी ला घलोक देवइय्या नंइहे।
लेना जी लेना सबोझन कहिथे
संग में रेंगइय्या कोनो नंइहे।।

देख के कहिथँव ये दूनियादारी
एक बात तो अब समझ आथे।
चलथे जी ओकर आगू पीछू मा
जेन हर पाँवपूट चेपटी पियाथे।।

मँय हर रहिगेंव सिधवा सादा
दाँव पेंच मोला आवय नहीं।
सुनेंव वो मनखे कभू नंइ जीते
जेन कभू पियाय खवावय नहीं।।


मुड़ी ह फिजगेहे पानी मा तब
सुरा ला का अब  डरराना हे।
होही जइसन राम जी राखय
पाँव नंइ चिटको हटाना हे।।

कहिथे तोषन सुनगा भैय्या
डर के आघू मा ही जीत हे।
नहीं काहत हे बहिरी ले जेन
भीतरे भीतर ले तोर मीत हे।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद छ.ग.
9575070689

मंगलवार, 7 जनवरी 2020

बतिया

अलंकार की जानकारी

एक प्रयोग और देखें (सफल निष्फल के निर्णायक आप) 

*श्लेष अलंकार:-*
*एक शब्द में एक से अधिक अर्थ जुड़े हों (जहाँ कोई शब्द एक ही बार प्रयुक्त हो किंतु प्रसंग भेद में उसके अर्थ अलग-अलग निकलते हों वहाँ पर श्लेष अलंकार होता है।*
*1 काँसा* 
*2 भाव*

*मानवीयकरण अलंकार:-* 
*अमानव ( प्रकृति, पशु-पक्षी व निर्जीव पदार्थ में मानवीय गुणों का आरोपण करना मानवीयकरण अलंकार कहलाता है* जैसे:- 
*काँसा मूरत रो रही*

*विप्सा अलंकार;-* 
*मनोभावों को प्रकट करने के लिए शब्द को दुहराना (विप्सा-दुहराना)* जैसे 
*छि: छि: -- तिरस्कृत , घृणा योग्य*

'कौशिक' काँसा हिय व्यथा, रोया काँसा जातु।
काँसा मूरत रो रही, भिक्षु-पात्र, लघु, धातु ।
भिक्षु-पात्र, लघु, धातु, भाव बिन पीछे रहते।
कौन समझता दर्द, सुनाकर किसको कहते॥
छि: छि: उठता प्रश्न, बने फिर कैसे लौकिक। 
भिक्षु-दान, लघु, धातु, विवाहों में क्यों 'कौशिक' ॥ 
*संजय कौशिक 'विज्ञात'*

शब्द- अर्थ 

*'जातु' अवयव* (कदाचित्) कभी 
काँसा - कनिष्ठ, भिक्षुक पात्र, धातु 
भाव- भावना/ मूल्य/ भाव (गूढ़ विचार) 
भिक्षु - भिखारी 
कनिष्ठ- लघु

चरण 11, लघु के बाद यति 
लघु का अर्थ कनिष्ठ: 
बहन के फेरों के बाद जब बहन पहली बार दुल्हन बन ससुराल जाती है तब कनिष्ठ महत्वपूर्ण हो जाता है उसे साथ भेजा जाता है।

*धातु-काँसा* लड़की के विवाह के समय दान दिया जाने वाला काँसा का बर्तन खाण्ड कटोरा कहलाता है। (इसके पीछे की परंपरा का अर्थ भिन्न भिन्न स्थान पर भिन्न हो सकता है और कुछ स्थान पर यह परंपरा हो ही ना ऐसा भी हो सकता है) उत्तर भारत में ऐसा बहुतायात देखने में आता है। जिसका अर्थ यह माना जाता है कि आज से हम दोनों परिवार इस कटोरे की तरह एक हुए और हमारे संबंध इतने ही मधुर रहेंगे जितनी इसमें देसी घी और खण्ड हैं 
प्रश्न यही कि काँसा प्रयोग मृत प्रायः हो चुका है ऐसे में इसकी शुद्धता और आवश्यकता परम्पराओं में जीवित है जहाँ काँसा का प्रयोग अनिवार्य माना जाता है।

*2 भाव* 
धातु ... भाव मूल्य (सोने सी महंगी न हो)
लघु .... भाव विचार (समानता का भाव न हो)
भिक्षु .... भाव दान का (दानवीर के दान करने के  भाव न हों) 

इनके बिना पीछे रहते हैं

देखा बिकता वोट

सोमवार, 16 दिसंबर 2019

अंडा

समीक्षा मे...

_*कुण्डलियाँ*_

_*कैसी ये सरकार है,देता हाथ मड़ोड़।*_
_*पोषकता के नाम पर,गजब निकाला तोड़।।*_
_*गजब निकाला तोड़,गुरू  खिलवाते अंडा।*_
_*कह तोषन कर जोड़,नही बरसाओ डंडा।।*_
_*करते नित जो भोग,और होगी मति वैसी।*_
_*रोध करें पुर जोर,नियम है कैसी कैसी।।*_
 
_*तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा*_
_*डौंडी लोहारा बालोद छत्तीसगढ़*_

कुमकुम वेणी

●●●●●कलम की सुगंध छंदशाला●●●●●
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
            कुण्डलियाँ शतकवीर हेतु
★★★★★★★★★★★★★★★★
              दिनांक - 16.12.19
★★★★★★★★★★★★★★★★
              कुण्डलियाँ (1) 
                विषय-वेणी

लाती मन मुस्कान ये,देख अजब श्रृंगार।।
वेणी है अभिन्न अंग,शोभित होती नार।
शोभित होती नार,खिले गजरा इठलाती।
मन को भाती साज,रूप यौवन मधुमाती।।
कह तोषन कविराज,शाम या पवन प्रभाती।
वेणी कैसी साज,सोच है हिय मे लाती ।।
★★★★★★★★★★★★★★★★
              कुण्डलियाँ (2) 
              विषय-कुमकुम

कुमकुम से ही शान है,माने नारी आज।
शोभित नारी जिंदगी,नारी का है ताज।।
नारी का है ताज,मान है जग में पाता।
रहे सदा जो साथ,बलम से निर्मल नाता।।
कह तोषन कविराज,रहो कभी नहीं गुमसुम।
हे भारत की नार,माँथ सिरजाओ कुमकुम।।
★★★★★★★★★★★★★★★★
             रचनाकार का नाम
      तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
    डौंडी लोहारा बालोद, छत्तीसगढ़

वोट

माँगत माँगत बीतगे,मोर सुबे ले शाम।
वोट मिले मोला कहीं,कर लेहूँ आराम।।
कर लेहूँ आराम,पाँव बड़ मोर पिरागे।
खसकत हावे नोट,मोर पनही घलो घिसागे।।
मिलही कतका वोट,गुनँव मैं जागत जागत।
रेगँव खोरे खोर,वोट मै माँगत माँगत।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद छत्तीसगढ़

वेणी कुमकुम


*वेणी*
अधोभाग में झूमती,पृष्ठभाग बन नाग।
वेणी तेरी हर छटा,गाती फगुवा राग।
गाती फगुवा राग,नगाड़ा हिवड़ा बाजे।
नागिन सम इठलाय,संग नित गजरा साजे।
कह तोषन कर जोरि,साध कोई नवी सधो।
नयनन भी हरषाय,देख वेणी भाग अधो।।

*कुमकुम*
कुमकुम भाग्य नार की,बाग पुष्प महकाय।
चुटकी भर सिन्दूर से,जीवन है सिरजाय।।
जीवन है सिरजाय,रही है सदा सुहागिन।
जिनके रहे न माथ,नार ये बड़ी अभागिन।।
जीवन का श्रृंगार, कभी रखे नहीं गुमसुम।
है सजनी का प्यार,जगाती भाग्य कुमकुम।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडी लोहारा बालोद छत्तीसगढ़
५:३५अपरान्ह मंगलवार १७/१२/१९

माथ पकड़ रोता रहा


*-:तोषन के दोहे पंच:-*


माथ पकड़ रोता रहा, बदरा देख किसान।

हुई मिजाई है नहीं, पड़ा धान खलिहान।।१।।


टिपटिप करती ही रही, देखो आधी रात।

बिन दुल्हा जस है लगे, बिन मौसम बरसात।।२।।


ध्यान नहीं दिन रात की , घड़ी घड़ी आँसू धार।

मन आया तो हँस लिये, ये मेघा कचनार।।३।।


पड़े समय की मार जब, मरते जात किसान।

बिन मौसम बरसात ये, कैसा ये दिनमान।।४।।


मिट्टी में है मिल गई, देखे सपने सार।

जीना मरना क्या कहें, है किसान लाचार।।५।।



तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा

डौंडी लोहारा बालोद छत्तीसगढ़

रविवार, 15 दिसंबर 2019

दान

प्रदत्त विधा:- घनाक्षरी
विषय   :- दान
दिनांक:- 15/12/19 रविवार
★★★★★★★★★★★★★★
गाथा दान के हे बड़े,छोटे बड़े सब करे,
बड़े बड़े ऋषि मुनि,करते बखान है।

दानी राजा हरिश्चंद्र,तज दिये राजपाठ,
दान का प्रमाण दिया,जाने ये जहान है।

कबूतर प्राण खातिर,राजा शिवि माँस त्यागे,
दिया सीख मानवता,गाते जो पुराण है।।

दान करो मिल सब,अर्थ कर्म ज्ञान सेवा,
महिमा दानवीरों की,सबसे महान है।
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

समय


*सुधारोपरांत सादर समीक्षार्थ*

विधा दोहा
विषय समय
दिनांक १६/१२/१९
दिन सोमवार
★★★★★★★★★★★★★★
समय कभी रुकता नहीं,नहीं कहीं है ठौर।
गाती कोयल जान कर,झूमे अमिया बौर।।१।।

समय देख कर ही रखें ,एक एक पग फूँक।
आएगा यमराज जब,हो जाएगा मूक।।२।।

समय बड़ा बलवान है, करें समय में काम।
समय चाल को जान कर ,मत कर तू आराम।।३।।

समय एक सा है नहीं,सबको नाच नचाय।
राजा दानी कर्ण भी,इसका पार न पाय।।४।।

नहीं समय पर बस यहाँ, गर्व न कर इंसान।
मिट जानी है जिन्दगी, चलना है शमशान।।५।।
★★★★★★★★★★★★★★
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

सबले बढि़हा नगरिहा भैय्या

सबले बढ़िया नगरिहा भैया 
धरती मैय्या के सेवा बजाय 
बासी चटनी पेज ला खाके
सुग्घर अपन जिंनगी पहाय 
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या....

सुख-दुख के बेरा मा आके 
सब झन सन मिलके गोठियाय
 रहिथे वो रयपुरा गांव में 
सरस्वती के गुण ला गाय
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या...

दीया सही अंजोरिया करथे 
सुमता के रद्दा हे बताय
मधुर सहित के अगवा बनके
फुल बगिया कस हे सिर जाय
सबले बढ़िया नगरिहा भैया...

छत्तीसगढ़ के नगरिहा बेटा 
करनी कहिनी कही न जाय 
तोर दया ले तोर मया ले 
अड़हा लइका गंगा नहाय
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या...

जन्मदिवस हे आज तोरे
जन जन मिलके खुशी मनाय
दे संदेश भाईचारा के 
गोंदा फुल कस ममहाय 
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या...

जिंदगी तोर सलामत राहय 
तोषन धनगंइहा गोहराय 
बनके सूरुज तै नील गगन में 
रहिबे नवा अंजोर बगराय
सबले बढ़िया नगरिहा भैय्या....

तोषन कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा
डौंडीलोहारा बालोद छत्तीसगढ़

दान


प्रदत्त विधा:- घनाक्षरी
विषय   :- दान
दिनांक:- 15/12/19 रविवार
★★★★★★★★★★★★★★
गाथा दान के हे बड़े,छोटे बड़े सब करे,
बड़े बड़े ऋषि मुनि,करते बखान है।

दानी राजा हरिश्चंद्र,तज दिये राजपाठ,
दान का प्रमाण दिया,जाने ये जहान है।

कबूतर प्राण खातिर,राजा शिवि माँस त्यागे,
दिया सीख मानवता,गाते जो पुराण है।।

दान करो मिल सब,अर्थ कर्म ज्ञान सेवा,
महिमा दानवीरों की,सबसे महान है।
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

शनिवार, 14 दिसंबर 2019

शादी के लड्डू तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगंइहा

*सार छंद मे एक अदना प्रयास*
*शादी के लड्डू*

शादी में हैं बजते बाजे,झूमें नाचे सारे।
सपनों की रानी है अपनी,जो निहारती द्वारे।। 
फूटे मन शादी के लड्डू,दिन ये ऐसा आया।
जाऊंगा चढ़कर मैं घोड़ी,दिल में उमंग छाया।।

रह रह वो पुकारती होगी,आ जा दुल्हे राजा।
तरस गयी है अँखिया मेरी,ज्यादा मत तरसाजा।।
दिल मेरा हिचखोले खाये,इकपल रहा न जाये।
लेकर क्यूँ बेचैनी दिल ये,पलपल मचला जाये।।

जल्दी फेरे तुम लगवाओ,बाजा ढोल बजाओ।
शादी की शहनाई गुंजी,सेहरा माथ सजाओ।।
आओ मेरे सारे भाई,घड़ी बड़ी शुभ है आई।
तोषन देता आकर बन्दे,लाखा कोटि बधाई।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

वोट

-: विनम्र प्रार्थना :-
देना अपना वोट...

डर है जिसको हार की,बाँटे भर भर नोट ।
जनता भाई जागकर,..देना अपना वोट ।।

देना अपना वोट,चुनो जी मुखिया अपना ।
करे गाँव का नाम,...करे जो पूरा  सपना ।।

कह तोषन कर जोड़,बात ये उसको इसको ।
सब मिल देना वोट,मना जो चाहे जिसको ।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र"धनगंइहा"
डौंडी लोहारा बालोद छत्तीसगढ़
९५७५०७०६८९

अंत्याक्षरी

समीक्षार्थ 
एक प्रयास प्रदत्त शब्दांतक्षरी पर

[13/12, 8:49 pm] Toshan:

 भूल नहीं इतिहास को,मिलती जिनसे राह।
मिलती जिससे प्रेरणा,सागर भरे अथाह।।

[13/12, 8:53 pm] Toshan:

 उपासना श्री राम की,कर लेता दिन  रैन।
कट जाता शुभ शाम ये,चित को मिलता चैन।।

[13/12, 9:03 pm] Toshan:

 बनकर दानव मत करो,रावण जस अट्हास।
हो सकता है दिन कभी,अपना भी परिहास।।

[13/12, 9:06 pm] Toshan:

 आकर इस संसार में,भटक गया इंसान।
भूला बैठा नेक को,मन रखकर अभिमान।।

[13/12, 9:08 pm] Toshan:

 रोज नई किरणों संग,लेकर आता धूप।
वंदन बारम्बार है, हे दिनपति सुरभूप।।

[13/12, 9:10 pm] Toshan:

 समय बड़ा बलवान है,बदले सबकी चाल।
पल में हँसता आदमी,पल में रोता हाल।।

[13/12, 9:14 pm] Toshan:

 सच्चा रखलो आचरण,बनकर मानव मीत।
देना लेना नित प्रीत को,यही जगत की रीत।।

टूटे पंखों को ले करके

समीक्षार्थ...
एक अदना सा प्रयास...
टूटे पंखों को ले करके,
कैसे जीवन जीना हो।
किसको कहते साथ चले हम,
घोर हला जब पीना हो।

छाये काले बादल गम का,
कहीं नही उजियारा है।
बीच भँवर में अपनी कश्ती,
दूर कहीं न किनारा है।
पाया नहीं है इस जहान में,
कोई कहीं महजबीना हो।।1।।


अपनी पीर दिखायें किसको,
नहीं किसी से यारी है।
जिसे दिया था हमने दिल को,
उसने हमें बिसारी है।
लेकर खंजर वार करे जो,
खुदा कहीं न हसीना हो।।2।।


जिसको माना अपना सबकुछ,
बन बैठी ओ हरजाई।
हाय बेरुखी नखरे उसकी,
तोषन को रास न आई।
छोड़ चलूँगा दुनिया को अब,
मेरी  कब्र मदीना हो।।3।।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

धनगंइहा के दोहे



दीपक मिट्टी से बना,जलता भानु समान।
तम हरता है रात में,खोकर निज पहचान।।

 भूल नहीं इतिहास को,मिलती जिनसे राह।
मिलती जिससे प्रेरणा,सागर भरे अथाह।।

 उपासना श्री राम की,कर लेता दिन  रैन।
कट जाता शुभ शाम ये,चित को मिलता चैन।

 बनकर दानव मत करो,रावण जस अट्हास।
हो सकता है दिन कभी,अपना भी परिहास।।

 आकर इस संसार में,भटक गया इंसान।
भूला बैठा नेक को,मन रखकर अभिमान।।

 रोज नई किरणों संग,लेकर आता धूप।
वंदन बारम्बार है, हे दिनपति सुरभूप।।

 समय बड़ा बलवान है,बदले सबकी चाल।
पल में हँसता आदमी,पल में रोता हाल।।

 सच्चा रखलो आचरण,बनकर मानव मीत।
देना लेना नित प्रीत को,यही जगत की रीत।।

बुधवार, 11 दिसंबर 2019

माथ नँवाऊँ

माँ तेरे चरणों में शीश झुकाऊँ
करूँ वंदना मैं तुझको मनाऊँ

तुम्ही जीवन मेरा सारा जहाँ
तेरी कृपा से माँ सरगम गाऊँ।

ध्येय पथ मेरा रुकने न पायें
सत्यपथ पर बलि बलि जाऊँ।

दुख पहाड़ हो या लाख बाधा
दुआ से कभी पग न डिगाऊँ।

तेरा लाल दाती माता सबकी
मंदमति मैय्या तुमको रिझाऊँ।

आस तोषन को तेरे दरश की
लक्ष्य पथ अपने साथ पाऊँ।

हल्बा समाज सारे तुझे ध्याये
संग मिलकर ध्वज लहराऊँ।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
बालोद, छत्तीसगढ़
11/12/19

गाय

गाय की दशा
११/१२/१९
गाय हमारी मातु है, जाने ये संसार।
फिर भी बूचड़ खान में, क्यूँ कटती लाचार।।
क्यूँ कटती लाचार, ध्यान इस पर दें सारे।
गौ हत्या हो बन्द, लगायें मिलकर नारे।
आज बचायें प्राण, डरी हैं जो बेचारी।
करलें रक्षा यत्न, मातु है गाय हमारी।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

साहित्य

कुण्डलियाँ 
*साहित्य*

जीवन का आधार है,चारों वेद पुराण।
गीता रामायण पढ़े,तृप्ति मिलेगी प्राण।।
तृप्ति मिलेगी प्राण,तभी उद्धार हमारा।
करिए सदा प्रचार, जहाँ साहित्य बिसारा।।
कह तोषन कविराज, ध्यान कर नित तन मन का।।
रखें इसे सम्हाल,सार है ये जीवन का।।

*विकृत पाठ*

रेखा माला घन जटा,दण्ड शिखा का पाठ।
ध्वज रथ मिलकर ये बने,विकृत पाठ हैं आठ।।
विकृत पाठ हैं आठ,संत मुनियों की बानी।
नहीं मिलेगी ठौर, धरा नभमंडल पानी।।
कह तोषन कविराय, दृश्य ये हमनें देखा।
अक्षर अक्षर भिन्न, जटा घन माला रेखा।।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
बालोद, छत्तीसगढ़

गाय का पालन

पालन पोषण गाय का,भूल गया इंसान।
गोद बिठाये घूमता,लेकर मानव श्वान।।
लेकर मानव श्वान,रौब है बड़े जताते।
गौमाता को भूल,श्वान को दूध पिलाते।।
कैसा है इंसान, दिखायें कैसे चालन।
होगा कैसे जान,गाय का लालन पालन।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
बालोद, छत्तीसगढ़

पवन प्रभाती

१०/१२/१९
*सुप्रभातम्*
पवन प्रभाती शुभ घड़ी,चिड़िया करती शोर।
दिनकर का है आगमन,नित प्रतिदिन की भोर।।
नित प्रतिदिन की भोर,नया हो जीवन अपना।
रघुवर का है साथ,सदा ही उनको जपना।।
कह तोषन कविराज,किरण है प्रतिपल आती।
देने नव संदेश,घड़ी शुभ पवन प्रभाती।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

अंतर जाल

माया अंतरजाल का,सिमट गया संसार।
सारा जग है हाथ में,किसका रहा विचार।।
किसका रहा विचार,समझ कोई समझावे।
एक पलक में ज्ञान,हाथ अपने आ जावे।।
कह तोषन कविराज, सुगम हमने हल पाया।
समझे इसका मान,जाल का अंतर माया।।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़
9617589667

मानवता

हास होती मानवता,जाग उठी दानवता,
कैसी ये विडंबना है,मेरे हिन्दुस्तान मे।

बेटी बहू जाए कहाँ,पुकार लगाये कहाँ,
घिरे हुये इत उत,कलयुगी हैवान में।

न्याय कुछ ऐसा मिले,हैवानों के पग हिले,
कुछ नहीं रहाअब,बातों के कृपाण में।

तोषन अब नही सहे ,मिलकर सब कहें,
लाओ कुछ अब नया,विधि के विधान में।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

घनाक्षरी

मनहरणघनाक्षरी /कवित्त छंद 

//आन बान शान देखो//

आन बान शान देखो,देश का निशान देखो,
लहर लहर करे,नीले आसमान में।
इसकी निराली बात,सबसे है यह खास,
वीरों की थाती मानों,बसा निगेबान में।
लाल बाल पाल भिड़े, आजादी के गीत लिये,
बन गुल जो ये खिले,मेरे बागबान में।
हमने आजादी पायी,तन मन हरषायी,
हुआ गणतंत्र अब,देखो हिन्दूस्थान में।

//माथ मैं नवाऊँ आज//

माथ मैं नवाऊं आज,जिनपे है हमें नाज़,
जय जय करता है,सारा हिन्दूस्थान है।
क्रांतिकारी बनकर,सुख दुःख तजकर,
मेरे हिन्दूस्थान को ये, बनाया महान है।
भित पट तुम खोलो,भारत की जय बोलो,
झूमे नाचे गाए गीत,खेत खलिहान है।
'तोषण' ये आज कहे, मिलकर सब रहे,
एकता के दीप जले,मिले परवाज़ है।

//चुपचाप झिन रहा//

चुप चाप झिन रहा,कुछु कहीं तहूँ कहा,
मनवा के बतिया ल,खोल तैं जुबान ले,
गोठ मोर सुनले तैं,थोर देख लहुट के,
तन झन छुट जाय,मोर ये परान ले.
दिल मा समाय तैहा,नँइ भूलों तोला मैहा,
तोर हँव दिवाना मैं,अपन तैं मान ले.
कहर बरपा न तैं,मोला तरसा न तैं
मोर मया ल पगली,थोरकुन मान ले.

अटल रहा है सदा

अटल रहा है सदा,दिल में बसा है सदा,
अटल रहेंगे सदा,पूरे हिंदुस्तान में.
बन के जगनायक,दीनों के ये सहायक,
फूल बन महके ये,सारे गुलिस्तान में.
देश के चिराग बने,देखो सीना ताने चले,
निकले ये शेर सम,भारत की शान में.
याद सदा आयेंगे वो,दिल में समायें हैं जो,
अटल बिहारी बसे,तन मन प्राण में.

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा,डौंडी लोहारा
छत्तीसगढ़
9617589667

मकड़जाल

चित्र चिंतन
11/12/19
=========
1.
मकड़ी जाल
तरूवर शाख पे--
बच्चे झूलते।
=========
2.
अंतर जाल
दुनिया में बिखरे--
सूर्य किरणें।
=========
3.
जाल फैलाये
मकड़ी निहारती--
कीट पतंगा।
==========
4.
उलझी मक्खी
मकड़ी के जाल में--
ओस की बुँदे।
==========
5.
मकड़जाल
बुनते न थकती--
सीखें सबक।
==========
तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा
बालोद, छत्तीसगढ़

मेरा देश

*मेरा देश*
*दोहा*
*9/12/19*
भारत मेरा देश है,सकल गुणों की खान।
ऋषि मुनि के वेश में,करते लाख बखान।।

रंगीला मेरा देश ये,सतरंगी है फाग।
समता ममता है भरा,बहे प्रेम अनुराग।।

राम कृष्ण की ये धरा,बहती गंगा धार।
मर्यादा का पाठ है,गीता की बौछार।।

राजगुरू सुखदेव ने,माना अपनी जान।
त्यागे अपने प्राण को,सदा बढ़ाया मान।।

तेरे मेरे के फेर में,बँटे नहीं इन्सान।
अपना जाने देश को,होगा तभी महान।। 


तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

मकडज़ाल

बालमन की कविता का प्रयास
मकड़ी और जाल

मकड़ी रानी मकड़ी रानी।
अजब गजब तेरी कहानी।
कभी पेड़ में कभी घरों में,
काटती रहती जिन्दगानी।।१।।


लालच में आते कीट पतंग।
भिन्न भिन्न और रंग विरंग।
भोजन थाल स्वयं सजाती,
बड़ी निराली है तेरी प्रसंग।।२।।


काल  को नहीं हो जानती।
करती रहती हो जो ठानती।
सीख देती दुनिया को सारी,
हार कभी नहीं तुम मानती।।३।।


नित योजना स्वयँ गुनती।
कहाँ किसी की हो सुनती।
मारे कोई या सताये कोई,
जाला प्रतिदिन हो बुनती।।४।।


जीवन बड़ी तेरी न्यारी है।
फिर भी बनी तू बेचारी है।
महाराणा है तुझसे सीखा,
फिर करी  सेना तैयारी है।।५।।


तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा डौंडी लोहारा
बालोद छत्तीसगढ़

रविवार, 8 दिसंबर 2019

गीता ज्ञान 2

तेरा मेरा कुछ नहीं, जाए भी न कुछ कहीं,
समर भूमि में कान्हा,गीता जो सुनाते हैं।

करम मे ध्यान रख,धरम महान रख,
बिना कोई करम के,फल नहीं पाते हैं।

नहीं कोई छोटा बड़ा,किस बात पे है अड़ा,
छोड़ सब मोह माया,कमान उठाते हैं।

मुझसे ही पैदा होते,मुझमें ही आके खोते,
गीता ज्ञान अर्जुन को,कृष्ण जी बताते हैं। 

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

गीता ज्ञान 1


आ जाओ हे प्यारे कान्हा, करके कोई बहाना,
भारत की धरती ये,तुझको बुलाती है।

दे जा वही गीता ज्ञान,फिर हो पवित्र प्राण,
कोटिक कलुष भरे,दुनिया सताती है।

द्रोपदी की लाज रखी,यही आस मन जगी,
मिलकर बेटियाँ ये,पुकार लगाती है।

शंखनाद कर देते,सारी पीड़ा हर लेते,
गौमाता निहारती है,याद में रंभाती है।

तोषण कुमार चुरेन्द्र
धनगंइहा, डौंडी लोहारा

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...