*जिनगी डोंगा धार में,नंइ हाथ पतवार।*
*राम भजन कर सार हे,राम लगाही पार।।*
*हावय डोंगा काठ के, कइसे पार लगाँव।*
*पखरा हर नारी बने, धोवन देदव पाँव।।*
*देखे केंवट राम जी,डोंगा लगे मँगाय।*
*भइया केंवट सुन बने,गंगा दे नहकाय।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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