*पानी गिरय अषाढ़ मा,झूमय मगन किसान।*
*नाँगर जोतय खेत मा,बोवय संगी धान।।*
*बिदा करे बर जेठ के,आथे मास अषाढ़।*
*गिरथे पानी पोठ तब,आ जा थे जी बाढ़।।*
*बना अपन तँय छानही,खपरा मा जी ढाँक।*
*आवत हवय अषाढ़ कहि,पारत हाबस हाँक।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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