सोमवार, 12 जून 2017

अषाढ़

*पानी गिरय अषाढ़ मा,झूमय मगन किसान।*
*नाँगर जोतय खेत मा,बोवय संगी धान।।*

*बिदा करे बर जेठ के,आथे मास अषाढ़।*
*गिरथे पानी पोठ तब,आ जा थे जी बाढ़।।*

*बना अपन तँय छानही,खपरा मा जी ढाँक।*
*आवत हवय अषाढ़ कहि,पारत हाबस हाँक।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

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