रविवार, 4 जून 2017

दाई

*१*

*माँ के मया अपार हे,बाँटे मया दुलार।*
*तीरथ जेकर गोड़ मा,विनय करे संसार।।*

*२*

*दाई जग मा तोर बिन, सुन्ना घर संसार।*
*कहिबो दाई कोन ला, मिलही कहाँ दुलार।।*

३.

*बन अनाथ बन बन फिरँव ,कोनों नइ आवै पास।*

*दाई  बिन  जिनगी घलो , रहिथे    गजब.  उदास।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

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