*माँ के मया अपार हे,बाँटे मया दुलार।*
*तीरथ जेकर गोड़ मा,विनय करे संसार।।*
*दाई जग मा तोर बिन, सुन्ना घर संसार।*
*कहिबो दाई कोन ला, मिलही कहाँ दुलार।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें