बुधवार, 7 जून 2017

कारीगर

*विसकर्मा   के   रूप हे , कारीगर   हे   नाँव।*
*किसम-किसम गढ़ना गढ़े,बइठे लिमवा छाँव।।*

*कारीगर के हाथ में,जादू बिकट समाय।*
*हँसिया रापा पीट के,बछुला ठोस बनाय।।*

*आगी आँच ल तँय सहे ,करथस सबके काम।*
*सहिथस घाम पियास तँय,नइये तोल अराम।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

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