*विसकर्मा के रूप हे , कारीगर हे नाँव।*
*किसम-किसम गढ़ना गढ़े,बइठे लिमवा छाँव।।*
*कारीगर के हाथ में,जादू बिकट समाय।*
*हँसिया रापा पीट के,बछुला ठोस बनाय।।*
*आगी आँच ल तँय सहे ,करथस सबके काम।*
*सहिथस घाम पियास तँय,नइये तोल अराम।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
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