रविवार, 18 जून 2017

चाह बुलंद

एक प्रयास

*हाइकु*

चाह बुलंद।
सीखना निरंतर।
मिलेगा लक्ष्य।

बढ़ता चल।
मंजिल देखे राह।
सुन्दर कल।

आफताब हूँ।
आलोकित संसार।
लाजवाब हूँ।

शीतल सोम।
प्रकाशित अवनि।
देखता व्योम।

इक मुस्कान।
लगे मनभावन।
दिल कुर्बान।

तोषण कुमार चुरेन्द्र

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