गुरुवार, 15 जून 2017

राह

*राह   नई   हो   चाह  की,  नई   नई   हो  सोच।*

*सम्हल-सम्हल कर हम चलें,आये कहीं न मोच।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...