शनिवार, 17 जून 2017

लबरा

*मोर मया समझे नहीं, देथस मोला दोस।*
*निच्चट लबरा तँय हवच,मोला बड़ अपसोस।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

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