संध्या वंदन
तुलसी की आरती
हर्षित मन।
देव की पूजा
आशीष माँ बाप का
नहीं है दूजा।
राम का नाम
शबरी का उद्धार
भज निष्काम।
करले कुछ
शानदार शाबासी
गर्वित मन।
स्वप्न हसीन
होती प्रेम मिलन
है लाजमीन।
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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