*सुख अउ दुख रहिथे जिहाँ,जीवन हे वो गाँव।*
*कभू परत बड़ धूप हे,कभू परय जी छाँव।।*
*सुख-दुख आवत जात हे,झन कर चिंता थोर।*
*चिंता ले बुध नास जी,तन घुर जाही तोर।।*
*नइहे सुख जी भाग में,छुटगे सुख के आस।*
*दुख कइसे मोर बितही,मनवा भए उदास।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें