सोमवार, 12 जून 2017

सुख दुख

*सुख अउ दुख रहिथे जिहाँ,जीवन हे वो गाँव।*
*कभू  परत  बड़  धूप हे,कभू परय जी छाँव।।*

*सुख-दुख आवत जात हे,झन कर चिंता थोर।*
*चिंता  ले  बुध नास जी,तन  घुर  जाही तोर।।*

*नइहे सुख जी भाग में,छुटगे सुख के आस।*
*दुख कइसे मोर बितही,मनवा भए उदास।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

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