आहू संगी हव गाँव मा,देखँव पेज ल राँध।।
बसे तीर धनगाँव के, हवय खरखरा बाँध।
बुंद-बुंद पानी जतन, रख तै बाँध बनाय।
अलप काल मा काम दे,सबके हवै सहाय।।
पानी बड़ अनमोल हे,एकर कतरो साख।
पानी बिरथा होय झन,बाँध बना के राख।।
तोषण कुमार चुरेन्द्र
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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