बुधवार, 31 मई 2017

हाइकु

🌿🌿🌿🌿
शीतल नीर
तृप्ति मिले मन को
मन में धीर
🌿🌿🌿🌿
सूना है जग
आ जाओ लौटकर
देखूँ मैं मग
🌿🌿🌿🌿
दीदार तेरा
आरजू में हो तुम
लो खत मेरा
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*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

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