लोग मुझे हमेशा अच्छा कहते ,मेरी हर बात मानते ,हर कोई मुझसे मिलने को आतुर ,मुझसे बात करना ,मुलाकात करना , मेरे संग खाना चाय पीना बैठना उठना हर गतिविधियों मे मेरे संग शामिल होना पता नहीं और क्या क्या ? इन सबके पीछे कारण था विश्वास ,मेरी अच्छाई ,मेरी दिलेरी ,मेरी परोपकारिता, समाज में मेरा उठना बैठना।सभी सम्मान देते। आदर करते।
एक दिन अचानक मेरी सायकल खराब।स्कूल जाने को परेशान ।एक ही आस थी कोई तो लिफ्ट देने वाला मिल जाए ताकि मैं अपने कर्तव्य स्थल तक पहुंच सकूं। आशा पूरा भी हुआ वो भी इस तरह एक शराबी के साथ। उन्होंने लिफ्ट तो दी लेकिन शायद उनकी रोज की आदत थी शराब पीने की।चौराहे पर गाड़ी रोक एक होटल में मेरे लिए चाय बोलकर एक मिनट में आया कहकनिकल गया ।जब वह वापस आया तो मैंने पूछा भी नहीं कि गया कहां था? क्योंकि उसका जवाब उनके मुंह से आने वाली गंध बता रही थी। मैंने बस इतना कहा जहां तुम गए थे वहां मुझे भी लेके जा सकते थे पर लेके क्यों नही गए? उनका जवाब सुनकर मैं स्तब्ध ।उन्होंने बड़े आदरपूर्वक कहा 'मैं ठहरा शराबी बदनाम लेकिन मैने कही सुना है कि गुरू का सम्मान ,आदर और महिमा भगवान से भी बढ़कर है मैं भला उसे कैसे धूमिल करता।कोई देख लेता तो निहायत आपके लिए तरह तरह की बातें करता इसलिए आपको वहाँ संग लेकर नहीं गया। हे गुरूजी !आगे कोई दूसरा लिफ्ट लेकर चले जाइये ।ऐसा कहकहर वह चला गया और मैं सोचता रह गया कि संसार मे ऐसे लोग भी हैं जो दूसरों की मान मर्यादा का ध्यान रखते है।
शिक्षा;- खुद कीचड में रहकर भी कमल की जड़ कमल को दुनिया में प्रभावी बनाकर रखती है।
आचार्य तोषण
मंगलवार, 28 जून 2016
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
राम नाम
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
-
"पाँच बातें " पाठ - 14 "पाँच बातें " कक्षा - 4 1- हर एक काम इमानदारी से करो ! 2- जो भी तुम्हारा भला करे, उसका कह...
-
एक सिपाही सीमा मे डटे हे ।अइसन देवारी तिहार म । त मन म का बिचारत हे। का काहत हे आवव देखन ।कविता के चार लाइन हमर देस के जवान मन बर सादर समर...
-
चंडिका में लघु प्रयत्न मात्रा भार १३-१३ ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^ भारत मेरा देश है, अलग यहाँ का वेश है। ऋषि मुनियों की ये धरा...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें